बिजनेस स्टैंडर्ड - यात्रियों की मौत, ट्रेन के प्रबंधन पर सवाल
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यात्रियों की मौत, ट्रेन के प्रबंधन पर सवाल

शाइन जैकब /  May 28, 2020

बिजनेस स्टैंडर्ड यात्रियों की मौत, ट्रेन के प्रबंधन पर सवाललॉकडाउन के दौरान फंसे लोगों को घर ले जाने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने मई दिवस पर मजदूरों को श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का तोहफा दिया। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में कथित तौर पर ट्रेन में भोजन और पानी की कमी और लंबी यात्रा की वजह से ट्रेन में ही नौ लोगों की मौत होने की वजह से न केवल रेलवे यातायात प्रबंधन को लेकर संदेह बढ़ा बल्कि यह भी सवाल उठने लगे क्या इन ट्रेनों के जरिये 25 मार्च से लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान सामने आई मानवीय त्रासदी को दूर करने की कोशिश की गई है?

सोशल मीडिया पर भोजन और पानी की कमी की शिकायत करते यात्रियों और रेलवे स्टॉल लूटने वाले लोगों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। विशेषज्ञों ने संकेत दिया कि एक दिन में 12,000 से अधिक यात्री ट्रेनों का संचालन करने वाला भारतीय रेलवे अब एक दिन में सिर्फ 250 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने में ही जूझ रहा है।   

उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर जाने वाली विभिन्न श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में सोमवार से लेकर अब तक नौ लोग मृत पाए गए हैं। एक मृत महिला के वीडियो पर लोगों की तीखी प्रतितिक्रया देखने को मिली जिसके पास मौजूद उसका बच्चा उसे जगाने की कोशिश कर रहा था। हालांकि भारतीय रेल ने इस तरह की मौत के लिए पहले से ही खराब सेहत और वृद्धावस्था को जिम्मेदार ठहराया। श्रमिक अधिकार संगठन वर्किंग पीपुल्स चार्टर के चंदन कुमार ने आरोप लगाते हुए कहा, 'भारतीय रेलवे की तरफ से की गई यह कुप्रबंधन की मिसाल है। उत्तर प्रदेश तक जाने वाली ट्रेनें ओडिशा पहुंच रही हैं। दो महीने के अंतराल में ऐसा लगता है कि रेलवे निष्क्रिय हो गया है क्योंकि प्रवासियों को पानी और भोजन तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा।'

रेलवे ने बाद में गुरुवार शाम को कहा कि राज्यों को टिकट किराये के अलावा रेलवे द्वारा दिए जाने वाले भोजन के लिए भी भुगतान करना होगा। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को लेकर विवाद 1 मई के बाद से शुरू हो गया था।

शुरुआत में ज्यादातर यात्रियों को इन ट्रेनों में टिकट के लिए पैसे देने पड़ते थे। बाद में जब कांग्रेस ने कहा कि उनकी पार्टी उनके टिकट के लिए भुगतान करेगी तो सरकार को 4 मई को अपना रुख बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके बाद से केंद्र 85 फीसदी और राज्यों बाकी 15 फीसदी खर्च का वहन कर रहे थे। नागपुर स्थित गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) दिशा की निदेशक अंजलि बोरहदे ने कहा, 'आपको कोई योजना नहीं दिखेगी। हर दिन वे गाडिय़ों की संख्या के आंकड़े पेश करते हुए इसे परोपकारी अभियान मानकर चल रहे हैं। प्रवासियों को उनके घर तक पहुंचाना सरकार का कर्तव्य है जो देश की अर्थव्यवस्था और उद्योग की रीढ़ हैं।'

इन विशेष ट्रेनों को लेकर रेल मंत्री पीयूष गोयल की भी जबानी जंग राज्यों के साथ जारी रही है। इसकी शुरुआत तब हुई जब मंत्री ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल अपने प्रवासी कामगारों को वापस लाने के लिए उत्सुक नहीं है। इसके बाद ट्रेनों की उपलब्धता को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और गोयल के बीच ट्विटर पर जंग शुरू हो गई। ठाकरे ने कहा कि राज्य ने केंद्र से जितनी ट्रेन की मांग की थी उसकी आधी गाडिय़ां भी राज्य को नहीं मिल रही ।

गोयल ने ट्रेन वापसी मुद्दे को हवा दी कि ट्रेनें खाली वापस नहीं चल सकतीं। प्रवासियों के परिवहन के लिए काम कर रहे एक राज्य सरकार के अधिकारी ने बताया, 'हमें ट्रेनों की उपलब्धता के मुद्दों का सामना करना पड़ा। अब केंद्र और राज्य मुद्दों को सुलझाने के लिए काम कर रहे हैं।'

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के लिए परेशानी यह है कि उन्हें सुपर फास्ट ट्रेन के रूप में लॉन्च किया गया था लेकिन बाद में इसमें देरी होने लगी। उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाली एक ट्रेन ओडिशा पहुंच गई  जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर जाने वाले मार्गों पर भीड़ के कारण हमने 23 और 24 मई को ट्रेनों का मार्ग बदला। ऐसा केवल दो दिनों के लिए किया गया था क्योंकि 80 फीसदी ट्रेनें इन दोनों राज्यों की ओर जा रही थीं।  देरी की वजह से ही देश के विभिन्न हिस्सों से रेलवे स्टेशन के स्टॉल लूटने वाले लोगों के वीडियो सामने आने लगे।'

हालांकि रेलवे ट्रेन में मौतों की संख्या के बारे में आधिकारिक आंकड़े लेकर नहीं आ रहा है, लेकिन उत्तर और मध्य भारत में लू की वजह से गैर-वातानुकूलित ट्रेन में यात्रा करने वालों की परेशानी बढ़ गई। रेलवे के पूर्व अतिरिक्त सदस्य विजय दत्त ने कहा, 'मार्ग में बदलाव भारतीय रेलवे के लिए एक मानक प्रोटोकॉल है। अगर यह श्रमिक स्पेशल ट्रेन है तो रेलवे सबसे छोटे मार्ग के लिए कम पैसे लेता है लेकिन यह सबसे तेजी से पहुंचने वाले मार्ग को अपनाता है। इसलिए मार्ग बदलने और देरी में कुछ भी असामान्य बात नहीं है। फिलहाल रेलवे द्वारा औसतन 250 श्रमिक ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है और  इसके अलावा 30 विशेष वातानुकूलित ट्रेनों का संचालन भी किया जा रहा है।'

एक उद्योग विशेषज्ञ ने कहा, 'भारतीय रेलवे एक दिन में 21,000 गाडिय़ां चलाता था जिनमें करीब 13,000 यात्री ट्रेन और अन्य 8,000 मालगाडिय़ां शामिल हैं। अब यही रेलवे एक दिन में 280 ट्रेनें भी चलाने के लिए संघर्ष कर रहा है। लू के बीच ही 1 जून से 200 से अधिक गैर-एसी गाडिय़ां शुरू की जा रही हैं, ऐसे में उन्हें उचित सेवाएं सुनिश्चित करनी चाहिए और उन्हें समय पर भोजन और पानी मुहैया कराना चाहिए। 21 मई को जिन ट्रेनों की बुकिंग शुरू हुई उनका संचालन 1 जून से शुरू होगा।'

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