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महाराष्ट्र सरकार पर संकट के बादल!

आदिति फडणीस और सुशील मिश्र / नई दिल्ली May 26, 2020

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में कोविड-19 महामारी के प्रबंधन में कोताही से जुड़े सवालों से खुद को और अपनी पार्टी को दूर रखने की कोशिश की जिसके बाद से नए राजनीतिक गठबंधन और संभवत: राष्ट्रपति शासन लगाए जाने विकल्प को लेकर अटकलें शुरू हो गईं। राज्य में शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार में कांग्रेस गठबंधन सहयोगी की भूमिका में है। कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भी हाल ही में टिप्पणी की थी कि महाराष्ट्र सरकार, महाविकास आघाडी नहीं बल्कि सिर्फ शिवसेना ही चला रही है जिसके बाद सियासी सरगर्मी और तेज हो गई।

सरकार को अस्थिर करने के संदेह के घेरे में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी राकांपा) भी है। पार्टी सुप्रीमो शरद पवार और उनके सहयोगी प्रफुल्ल पटेल ने न केवल राज्यपाल बीएस कोश्यारी से संपर्क साधा बल्कि पटेल ने शिवसेना और कांग्रेस नेताओं के निशाने पर आए रेल मंत्री पीयूष गोयल का भी बचाव किया जिन पर प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्यों में ले जाने में रेलवे की तरफ से मदद की कमी को लेकर तीखा प्रहार किया जा रहा है। रविवार रात को गोयल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से प्रवासी कामगारों की सूची उपलब्ध कराने के साथ ही कहा कि उनका मंत्रालय मुंबई मुख्यालय वाले मध्य रेलवे को 125 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। गोयल ने आगे ट्वीट में कहा, 'आपने कहा है कि आपके पास एक सूची तैयार है इसीलिए मैं आपसे अनुरोध कर रहा हूं कि आप कृपया अगले कुछ घंटे के भीतर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक को सभी जानकारी उपलब्ध कराएं मसलन ट्रेन कहां से चलेगी, ट्रेनों के अनुसार यात्रियों की सूची, उनका मेडिकल प्रमाणपत्र और ट्रेन कहां जाएगी ताकि हम ट्रेनों के समय की योजना बना सकें। उनके कहने का अर्थ यह था कि राज्य सरकार प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए कोई सुझाव दिए बगैर ही राजनीतिक मुद्दा बना रही है।'

सप्ताहांत के दौरान महाराष्ट्र सरकार और केंद्र के समर्थकों के बीच कटाक्षों का दौर जारी था। शिवसेना के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने गोयल को संबोधित करते हुए कहा, 'महाराष्ट्र सरकार ने आपको उन श्रमिकों की सूची दे दी है जो अपने गृहराज्य वापस लौटना चाहते हैं। एक ही अनुरोध है कि ट्रेन स्टेशन तक पहुंच जाए जैसा कि पहले घोषणा की गई थी गोरखपुर जाने वाली ट्रेन ओडिशा पहुंच गई थी।'

कांग्रेस ने कहा कि सरकार प्रवासी मजदूरों को भोजन और पानी उपलब्ध कराए बिना देश के दौरे पर ले जा रही है।

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने गठबंधन में बदलाव से इनकार नहीं किया है। जाहिर है कि वे सही समय का इंतजार कर रहे हैं कि कब सरकार गिराई जा सकती है। राज्य में 288 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 144 के स्तर पर पूरा होता है। शिवसेना के पास 56, भाजपा के 105 और राकांपा के पास 54 सीटें हैं। कांग्रेस और छोटे दल और निर्दलीय उम्मीदवार शिवसेना का समर्थन कर रहे हैं। अगर राकांपा भी समर्थन वापस लेती है तो शिवसेना सरकार अल्पमत में चली जाएगी। हालांकि, महाराष्ट्र महामारी के संकट से जूझ रहा है ऐसे में संभव है कि केंद्र सरकार यह घोषणा कर सकती है कि राष्ट्रपति शासन लगाया जा रहा है क्योंकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार ने बहुमत खो दिया है। भाजपा के राज्यसभा सदस्य नारायण राणे ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की। राणे ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से सोमवार को मुलाकात कर वैश्विक महामारी से निपटने में शिवसेना सरकार की विफलता के मद्देनजर राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। वहीं शिवसेना नेता संजय राउत ने राणे की मांग पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर राष्ट्रपति शासन लगाना ही है तो केंद्र को गुजरात के साथ शुरू करना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र में शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस की गठबंधन सरकार की 'अस्थिरता' की अटकलों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह बेहतर होगा कि विपक्ष को क्वारंटीन में रखा जाए और महाराष्ट्र सरकार को अस्थिर करने की उनकी कोशिशें उलटी पड़ सकती हैं।

Keyword: Maharashtra Government, Rahul Gandhi, Covid-19, कांग्रेस, राहुल गांधी, कोविड-19, महाराष्ट्र सरकार, राष्ट्रपति शासन,
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