बिजनेस स्टैंडर्ड - राजस्थान के बाद यूपी-मध्य प्रदेश में टिड्डी का साया
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राजस्थान के बाद यूपी-मध्य प्रदेश में टिड्डी का साया

संजीव मुखर्जी और एजेंसियां / नई दिल्ली/जयपुर/लखनऊ May 26, 2020

बिजनेस स्टैंडर्ड राजस्थान के बाद यूपी-मध्य प्रदेश में टिड्डी का सायाटिड्डी दल सोमवार को राजस्थान की राजधानी जयपुर में घुसने के बाद अब उत्तर प्रदेश की तरफ बढ़ रहे हैं। इससे राज्य के 10 जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। कुछ लोग इसे दो दशक में टिड्डियों का सबसे बड़ा हमला बता रहे हैं। पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के किसानों ने कहा कि टिड्डियां खेतों में खड़ी गर्मियों के मूंग की फसल की उत्पादकता पर बुरा असर डाल सकती हैं। इस बार राज्य में रिकॉर्ड रकबे में गर्मियों के मूंग की बुआई हुई है।

टिड्डी दल सबसे पहले राजस्थान में पाकिस्तान से आए थे। इससे बाद ये पिछले कुछ सप्ताह के दौरान मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की तरफ बढ़े हैं। अब इनके उत्तर प्रदेश में भी घुसने का खतरा पैदा हो गया है। मध्य प्रदेश में टिड्डियों ने नर्मदा नदी के आसपास के क्षेत्र में खड़ी गर्मियों के मूंग की फसल को नुकसान पहुंचाया है। वहीं इनके उत्तर प्रदेश में कुछ सब्जियों को नुकसान पहुंचाने की भी खबरें हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल गर्मियों के दलहन की बुआई करीब 8.7 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के मुकाबले 61 फीसदी अधिक है। इस बार रकबा बढऩे में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश का अहम योगदान है, जहां बड़े पैमाने पर गर्मियों का मूंग उगाया जाता है। अधिकारियों ने कहा कि टिड्डियों का सबसे पहले और सबसे तगड़ा हमला राजस्थान में हुआ है। मगर राजस्थान में खड़ी फसलें बहुत अधिक नहीं हैं।

किसान स्वराज संगठन के संस्थापक और प्रवक्ता भगवान मीणा ने कहा, 'टिड्डियों ने मध्य प्रदेश में सीहोर, नसरुल्लागंज, हर्दा, देवास और खातेगांव आदि जिलों में हमला किया है, जहां वे मूंग की खड़ी फसल को खा रही हैं। यह हमला तब हुआ है, जब किसान मिट्टी में पर्याप्त नमी के कारण अच्छा उत्पादन होने की उम्मीद कर रहे थे।'

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विभिन्न सलाह जारी की हैं मगर उसने अभी जमीन पर नतीजे नहीं दिखाए हैं। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने पिछले सप्ताह जुलाई तक टिड्डियों के हमलों की चेतावनी जारी की थी।

टिड्डियां पिछले साल से पाकिस्तान, ईरान और 10 अफ्रीकी देशों समेत 12 देशों में लाखों हेक्टेयर फसली रकबे को नष्ट कर चुकी हैं। अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के देश पिछले साल दिसंबर से ही टिड्डी दल की समस्या से जूझ रहे हैं।

टिड्डी चेतावनी संगठन,  जोधपुर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'आम तौर पर टिड्डियां भारत-पाकिस्तान सीमा के आसपास के क्षेत्रों में मई-जून में प्रजनन करती हैं। इसके बाद दल बनाकर अन्य दिशाओं में बढ़ती हैं, जिन्हें धीरे-धीरे नियंत्रित किया जाता है।'

क्या हैं टिड्डियां

टिड्डियां कीट हैं, जिन्हें एफएओ दुनिया में सबसे पुराने प्रवासी कीट मानता है। इनमें थार टिड्डी सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है।

प्रजनन की आदर्श स्थितियां क्या हैं?

लंबे मॉनसून और भारी तूफान जैसी स्थितियों में तेजी से प्रजनन करती हैं। महज तीन महीने में 20 गुना बढ़ जाती हैं।

कितनी नुकसानदेह हैं?

एफएओ के मुताबिक एक वयस्क टिड्डी रोजाना अपने भार के समान मात्रा में यानी करीब 2 ग्राम खा सकती है। अगर उसका दल एक दिन में 130 से 135 किलोमीटर दूरी तय करता है तो 35,000 लोगों के बराबर खाना चट कर सकता है। हालांकि टिड्डियां मानव या पशुओं पर हमला नहीं करती हैं। वे हरी फसलों को खाती हैं।

टिड्डी का जीवनकाल कितना है?  

थार की एक टिड्डी करीब तीन से पांच महीने जिंदा रहती है।

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