बिजनेस स्टैंडर्ड - पिछले साल से ज्यादा हुई गेहूं खरीद
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पिछले साल से ज्यादा हुई गेहूं खरीद

संजीव मुखर्जी और एजेंसियां / नई दिल्ली May 26, 2020

लॉकडाउन के बावजूद, 2020-21 विपणन सत्र अप्रैल-मार्च में सरकार की वार्षिक गेहूं खरीद पिछले वर्ष की 3.413 करोड़ टन की सीमा को पार कर गया है। इसमें मध्य प्रदेश और पंजाब अग्रणी राज्य हैं जबकि देश के बड़े उत्पादकों में से एक उत्तर प्रदेश खरीद में पिछड़ रहा है।  

केंद्र सरकार की ओर से दर्ज आंकड़ों के मुताबिक केंद्रीय पूल के लिए रविवार तक कुल मिलाकर 3.415 करोड़ टन गेहूं की खरीद हुई जबकि 2019-20 के पूरे सत्र में केंद्रीय पूल के लिए करीब 3.413 करोड़ टन गेहूं की खरीद की गई थी।  गेहूं खरीद का सत्र अप्रैल से मार्च तक चलता है लेकिन अधिकांश खरीद पहले तीन महीने में ही हो जाती है। सरकार ने इस साल किसानों से करीब 4.07 करोड़ टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है जो पिछले वर्ष के मुकाबले 60 लाख टन से भी अधिक है। इसकी वजह है कि 2019-20 फसल वर्ष जुलाई-जून में 10.718 करोड़ टन गेहूं की पैदावार हुई है जो अब तक का रिकॉर्ड उत्पादन है। इससे पिछल वर्ष में 10.36 करोड़ टन गेहूं की पैदावार हुई थी।  

रविवार तक केंद्रीय पूल के लिए 3.415 करोड़ टन गेहूं खरीद के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब ने इसमें 1.4 करोड़ टन के अपने लक्ष्य में से 1.258 करोड़ टन का योगदान किया है जबकि मध्य प्रदेश से उसके 1 करोड़ टन के लक्ष्य से भी अधिक 1.133 करोड़ टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है।  हरियाणा में रविवार तक उसके 75 लाख टन के लक्ष्य में से करीब 70.6 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। जबकि उत्तर प्रदेश में 24 मई तक महज 20.3 लाख टन गेहूं की खरीद हुई जबकि उसका लक्ष्य 55 लाख टन का है। देश भर में केंद्रीय पूल के लिए की जानी वाली गेहूं की खरीद में चार राज्यों की हिस्सेदरी 80 फीसदी से अधिक है।  भले ही खरीद इस साल के लक्ष्य से अभी भी बहुत कम है लेकिन सूत्रों का कहना है कि इसके लिए अभी भी समय है क्योंकि कोविड-19 को लेकर किए गए लॉकडाउन के कारण देश के अधिकांश हिस्सों में गेहूं की खरीद 15 दिन की देर से शुरू हुई थी। हरियाणा जैसे राज्यों में खरीद 20 अप्रैल से शुरू हुई जबकि सामान्यतया खरीद अप्रैल के पहले हफ्ते में शुरू हो जाती है।

बहरहाल, खरीद पिछले साल से थोड़ी कम भी रह जाती है तब भी अनाज की कोई कमी नहीं होगी, क्योंकि पिछले साल का काफी स्टॉक बचा हुआ है। यह स्थिति तब है जबकि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत प्रवासियों को अतिरिक्त अनाज का वितरण किया गया है।  उत्तर प्रदेश में कम खरीद के लिए सामाजिक दूरी के नियम और श्रमिकों की कमी बताई जा रही है। इससे क्रय केंद्र बनाए जाने के बावजूद खरीद में तेजी नहीं आ सकी। राज्य के ज्यादातर हिस्सों में गेहूं की कटाई भी देर से हुई थी। वहीं व्यापारियों का कहना है कि खरीद की सुस्त रफ्तार के कारण बहुत से किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दाम पर बेचनी पड़ी है।

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