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मौके का फायदा उठाएंगे देसी विनिर्माता

शैली सेठ मोहिले / मुंबई May 25, 2020

रक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए हुई हालिया घोषणा से खरीद की रणनीति के संबंध में बहुप्रतीक्षित स्पष्टीकरण मिलेगा और इससे भारतीय कंपनियों को अपने निवेश और उत्पादन क्षमता की योजना बनाने का मौका मिल जाएगा। महिंद्रा समूह और लार्सन ऐंड टुब्रो के अधिकारियों ने ये बातें कही। उन्होंने कहा, चाहे देसी पूंजीगत सामान की खरीद के लिए अलग बजट का मामला हो या फिर उपकरणों के आयात को चरणबद्ध तरीके से रोकने का या स्थानीय स्तर पर कलपुर्जे की खरीद का, इन कदमों से मेक इन इंडिया को मजबूती मिलेगी और यह क्षेत्र स्वतंत्र रूप से कार्यक्रम बना पाएगा।

महिंद्रा समूह के ग्रुप अध्यक्ष (एयरोस्पेस, डिफेंस, एग्री व स्टील क्षेत्र) एस पी शुक्ला ने कहा, जिस पैकेज की घोषणा हुई है उसमें अल्पावधि, मध्यम अवधि और लंबी अवधि के लिहाज से तत्व मौजूद हैं। यह कलपुर्जे व उपकरण की स्थानीय खरीद को 40 फीसदी तक के स्तर पर ले जाएगा। महिंद्रा समूह की मौजूदगी रक्षा के तीनों क्षेत्रों में है और वह विनिर्माण क्षमता पर निवेश तब शुरू करेगी जब सरकार सामान की सूची की घोषणा करेगी, जिसकी सोर्सिंग सिर्फ और सिर्फ स्थानीय तौर पर ही हो सकती है। शुक्ला ने कहा, इनमें से कई सामानों में हमारी दिलचस्पी होगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले हफ्ते भारत के रक्षा व एयरोस्पेस क्षेत्र में निवेश में मजबूती के लिए कई कदमों का ऐलान किया, जो 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज का हिस्सा है। नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में रक्षा मंत्रालय का दायित्व संभालने वाली निर्मला ने रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा मौजूदा 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी करने का ऐलान किया है। नकारात्मक आयात सूची बनाने के अलावा वित्त मंत्री ने देसी पूंजीगत सामान की खरीद के लिए अलग बजट आवंटन भी किया है।

शुक्ला ने कहा, देसी खरीद और आयातित सामान के लिए अलग-अलग बजट स्वागतयोग्य कदम है और यह भारतीय कंपनियोंं को अपनी उत्पादन क्षमता और उत्पादन की योजना उसके मुताबिक करने में सक्षम बनाएगा। अन्यथा हमें नहीं पता कि कितनी मात्रा देसी होगी। उन्होंने कहा कि कलपुर्जे की स्थानीय खरीद रणनीतिक तौर पर आत्मनिर्भर करने के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण होगा और इससे लागत में भी कमी आएगी। यह छोटे व मझोले उद्यमों को फायदा पहुंचाएगा और विनिर्माताओं के लिए निर्यात का गंतव्य खोलेगा। अभी कलपुर्जे के आयात पर किसी तरह की पाबंदी नहीं है।

एलऐंडटी के पूर्णकालिक निदेशक (डिफेंस व स्मार्ट टेक्नोलॉजिज) और वरिष्ठ कार्यकारी उपाध्यक्ष जे डी पाटिल ने कहा, इससे देसी रक्षा उत्पादन पर दोबारा ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा और भारतीय निजी कंपनियों में निवेश करने व क्षमता तैयार करने का भरोसा पैदा करेगा। यह आपूर्ति शृंखला को भी आश्वस्त करेगा कि वह तैयार क्षमता का लगातार इस्तेमाल कर सके। उम्मीद की जा रही है कि बजट का यह हिस्सा सालाना आधार पर प्रतिशत के हिसाब से बढ़ेगा।

यह देसी कार्यक्रमों को संरक्षित करेगा, जो सरकारों के बीच अनुबंध में बजट के अवरोध के कारण लगातार टलते रहे हैं। पाटिल ने कहा, कलपुर्जे की स्थानीय खरीद से एमएसएमई के लिए काफी मौके सामने आएंगे। यह कदम आयातित कलपुर्जे के देसीकरण को अधिकतम बनाएगा और यह काम ओईएम के साथ साझेदारी के जरिए होगा, न कि उन्हें आयात करके।

उन्होंने कहा कि सरकार को प्रतिबंधित हथियार और प्लेटफॉर्म को अधिसूचित करना चाहिए और यह काम समयबद्ध होना चाहिए ताकि भारतीय उद्योग को उत्पादन क्षमता तैयार करने के लिए स्पष्ट रोडमैप मिल जाए और देसी शोध व विकास के अलावा नवोन्मेष को बढ़ावा मिले।

भारत हर साल 100 अरब डॉलर की रक्षा साजोसामान की खरीद का ऑर्डर देता है और उसे दुनिया भर की रक्षा कंपनियों के लिए सबसे आकर्षक बाजारों में से एक बनाता है। 2018-19 में शुद्ध एफडीआई निवेश 14.2 फीसदी बढ़ा। एफडीआई आकर्षित करने वाले अहम क्षेत्रों में सेवा, ऑटोमोबाइल और केमिकल शामिल हैं।

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