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सब्सिडी की अवधि बढ़ाने से घर खरीदारों को राहत

बिंदिशा सारंग /  May 25, 2020

जिन लोगों ने ऋण संबद्ध सब्सिडी योजना (सीएलएसएस) के तहत घर खरीदने का मौका गंवा दिया था, उनके लिए अच्छी खबर है। कोविड-19 संकट से निपटने के लिए दिए गए आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत इस योजना को मार्च 2021 तक बढ़ा दिया गया है। इस योजना को मई 2017 में शुरू किया गया था और यह 31 मार्च 2020 को समाप्त हो गई थी। पैसाबाजार डॉट कॉम के मुख्य कार्याधिकारी एवं सह-संस्थापक नवीन कुकरेजा के मुताबिक, 'इस योजना को आगे बढ़ाने का मकसद पहली बार घर खरीदने वालों को ऋण लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।' एमबी वेल्थ फाइनैंशियल सॉल्यूसंस के एम बर्वे ने कहा, 'जो लोग किसी शहर में रहते हैं, उनके लिए मोटा किराया चुकाना मुश्किल होता है। ऐसे में वे शहर के बाहरी हिस्से में खुद के मकान में रहना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें उससे भी कम ईएमआई देनी होगी, जितना अभी वे किराया चुका रहे हैं। वहीं ऋण चुकाने के बाद घर भी उनका हो जाएगा।' आगे भी घर से काम जारी रहने के आसार हैं, इसलिए शहर के बाहरी इलाके में चले जाने से ज्यादा परेशानी नहीं होगी।

अगर आप पात्रता के मापदंड पूरे करते हैं और एक घर खरीदना चाहते हैं तो आपको इस सब्सिडी का फायदा उठाना चाहिए। माईमनीमंत्रा डॉट कॉम के प्रबंध निदेशक राज खोसला ने कहा, 'प्रॉपर्टी की कीमतों में भारी गिरावट आई है। कुछ प्रॉपर्टी के दाम 50 फीसदी या उससे भी अधिक घटे हैं। इस समय ब्याज दरें भी कम हैं, इसलिए अगले कुछ महीनों बाद खरीद लागत मौजूदा स्तर से कम नहीं होने के आसार हैं। इसके अलावा आपको ब्याज दर सब्सिडी अग्रिम मिल रही है, जिससे खरीद के फैसले को लेकर बहुत माथापच्ची करने की जरूरत नहीं है।'


शर्तों पर दें ध्यान

उस परिवार या आवदेक के पास भारत में पक्का घर नहीं होना चाहिए। आवेदक ने पहले किसी आवास योजना के तहत कोई सरकारी सहायता प्राप्त नहीं की होनी चाहिए। ईडब्ल्यूएस या एलआईजी श्रेणी में मालिक महिला होना जरूरी है। इसके अलावा सब्सिडी के आकलन के लिए अधिकतम अवधि 20 साल है।

सीएलएसएस के लाभ प्राप्त करने के लिए व्यक्ति का इन तीन श्रेणियों में से किसी एक में होना जरूरी है। पहली श्रेणी आर्थिक कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) या निम्न आय समूह (एलआईजी) है। इस श्रेणी में उन लोगों को शामिल किया गया है, जिनकी सालाना आय 3-6 लाख रुपये है। दूसरी श्रेणी मध्य आय समूह (एमआईजी-1) है, जिसमें 6 से 12 लाख रुपये तक आय वाले लोग शामिल हैं। वहीं एमआईजी-2 में 12 से 18 लाख रुपये की सालाना आय वाले लोग आते हैं। बर्वे कहते हैं कि हाल में वेतन कटौती के कारण बहुत से और लोग इन श्रेणियों में आ गए होंगे और सब्सिडी हासिल करने के लिए पात्र बन गए होंगे।

जिन लोगों की सालाना पारिवारिक आय 6 से 12 लाख रुपये (एमआईजी-1)  है, उन्हें 20 लाख रुपये के ऋण पर 4 फीसदी ब्याज सब्सिडी मिलती है। वहीं 12 से 18 लाख रुपये तक आय वाले लोगों (एमआईजी-2 श्रेणी) को इतनी ही अवधि के लिए 3 फीसदी ब्याज सब्सिडी मिलती है। एमआईजी-1 को केवल 9 लाख रुपये और एमआईजी-2 को 12 लाख रुपये की ऋण राशि पर ब्याज सब्सिडी मिलती है, भले ही कुल ऋण की राशि उससे अधिक हो। आप निर्धारित सीमा से भी अधिक ऋण ले सकते हैं, मगर उस पर ब्याज सब्सिडी नहीं मिलेगी। सालाना पारिवारिक आय में पति, पत्नी, अविवाहित बेटों और अविवाहित बेटियों की आमदनी शामिल होती है। यह प्रॉपर्टी 2011 की जनगणना के वैधानिक शहर में स्थित होनी चाहिए।


अग्रिम लाभ

इस योजना का एक सबसे बड़ा फायदा यह है कि पैसा अग्रिम दिया जाता है। टीबीएनजी कैपिटल एडवाइजर्स के संस्थापक एवं सीईओ तरुण बिरानी ने कहा, 'ब्याज सब्सिडी ऋणदाता के जरिये आपके ऋण खाते में जमा की जाती है। इसका अच्छा पहलू यह है कि ब्याज सब्सिडी का लाभ अग्रिम मिलता है, जिससे बकाया मूलधन कम हो जाता है। इससे आपका कर्ज एवं ईएमआई कम हो जाते हैं।' यह बात ध्यान रखें कि आप सीएलएसएस से जो घर खरीद सकते हैं, वे छोटे नहीं हैं। एमआईजी-1 श्रेणी में आने वाले 160 वर्ग मीटर तक के कारपेट एरिया का घर खरीद (पुनर्खरीद सहित) या निर्माण कर सकते हैं। एमआईजी-2 की सीमा 200 वर्ग मीटर है। 200 वर्ग मीटर करीब 2,152 वर्ग फुट होता है। कहां से शुरुआत करें? प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) योजना में शामिल वित्तीय संस्थानों जैसे बैंक या आवास वित्त कंपनी से संपर्क करें। ऋणदाता से ऋण सब्सिडी आवेदन फॉर्म लेकर इसे भरें और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ इसे जमा कराएं। बिरानी कहते हैं, 'सत्यापन के बाद आवास ऋण की राशि आपके बैंक खाते में जमा कर दी जाएगी। यह होने के बाद आपका ऋणदाता नोडल एजेंसियों  से संपर्क करता है ताकि आपके बैंक खाते में वह सब्सिडी डालने की प्रक्रिया शुरू की जा सके, जिसके आप हकदार हैं।'

मगर यह सब लॉकडाउन हटने के बाद ही संभव हो सकता है। बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी ने कहा, 'फिलहाल ग्राहकों के लिए वित्तीय संस्थानों में जाना और खुद इन संस्थानों के लिए दस्तावेज संग्रहित करना और उनका सत्यापन करना संभव नहीं है। इसकी वजह सामाजिक दूरी के नियम और कर्मचारियों की किल्लत है। इस वजह से डिजिटल विकल्पों की दरकार है, जिनकी मदद से बिना संपर्क एवं कागजी कार्रवाई के ऋण दिए जा सकें। ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका आधार ई-केवाईसी, वीडियो केवाईसी और सीकेवाईसी का ज्यादा इस्तेमाल होगा।' इसकी शुरुआत तत्काल करें। लॉकडाउन के दौरान ही सभी दस्तावेज जुटा लें, सीएलएसएस फॉर्म डाउनलोड कर लें और सभी दस्तावेज तैयार कर लें। आप लॉकडाउन खत्म होने के बाद प्रॉपर्टी देखना शुरू कर सकते हैं और ऋण की औपचारिकताएं शुरू कर सकते हैं।

आप किसी भी ऋणदाता संस्थान से कर्ज ले सकते हैं। ये संस्थान निजी या सरकारी बैंक, सहकारी बैंक, लघु वित्त बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां आदि आदि हो सकते हैं। इस योजना के तहत आय मापदंड के आधार पर निर्धारित आवास ऋण राशि के लिए कोई प्रोसेसिंग फीस नहीं है। हालांकि ऋणदाता इस सीमा से अधिक के ऋण पर सामान्य प्रोसेसिंग फीस ले सकते हैं। शेट्टी ने कहा, 'योजना की मियाद बढ़ाना स्वागत योग्य कदम है क्योंकि इससे मौजूदा आर्थिक चुनौतियों के बावजूद मध्यम वर्गीय परिवारों को अपना घर खरीदने का सपना पूरा  करने में मदद मिलेगी।'

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