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उतारचढ़ाव का फायदा उठाने के लिए हमारे पास कुछ नकदी है

पुनीत वाधवा /  May 24, 2020

बीएस बातचीत

सरकार के राहत पैकेज और भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से दरों में औचक कटौती ने पिछले पखवाड़े बाजार को व्यस्त रखा। वेलेंटिस एडवाइजर्स के संस्थापक और प्रबंध निदेशक ज्योतिवर्धन जयपुरिया ने पुनीत वाधवा को दिए साक्षात्कार में कहा कि निवेशकों को उच्च जोखिम और कम जोखिम संतुलन बनाने वाली रणनीति अपनानी चाहिए ताकि कई क्षेत्रों में निवेश का फायदा उठाया जा सके जो अल्पावधि के लिहाज से अपेक्षाकृत सुरक्षित हों और सस्ते शेयर भी जो अगले कुछ सालों में उच्च रिटर्न दे सकते हों। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश...

बाजार को परिदृश्य को लेकर आपका क्या नजरिया है?

हम अभी तीन तरह के झटके - चिकित्सीय झटके और इसके परिणामस्वरूप आपूर्ति के झटके और मांग के झटके का सामना कर रहे हैं। कोविड-19 के चिकित्सीय समाधान की तलाश ही बाजार का आकार तय करने जा रहा है। हमें लग रहा है कि अगले 24 महीने में दवा या टीके के जरिए चिकित्सीय समाधान पा सकता है और ज्यादा संभावना है कि दोनों उपलब्ध हो जाए। वित्त वर्ष 2021 हालांकि अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किल भरा होगा, लेकिन वित्त वर्ष 2022 सामान्य रह सकता है और यह बाजार को अपने पूर्व के स्तर पर पहुंचने का जरिया उपलब्ध कराएगा। अल्पावधि में इस वायरस और लॉकडाउन को लेकर काफी अनिश्चितता रहने वाली है। ऐसे में हम अपने पोर्टफोलियो मेंं कुछ नकदी रख रहे हैं ताकि बाजार में होने वाले उतारचढ़ाव का फायदा उठाया जा सके।


महामारी के कारण हुई आर्थिक गिरावट से निपटने के लिए नीति निर्माताओं की तरफ से घोषित कदम को आप कैसे देखते हैं?

अर्थव्यवस्था को मदद देने की खातिर राजकोषीय कदम के बजाय मौद्रिक नीति पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, शायद इसकी वजह पहले से ही खराब हो रही सरकारी वित्त की स्थिति है। भारतीय रिजर्व बैंक ने व्यवस्था में नकदी झोंकने, ब्याज दर घटाने और कर्जदार के दबाव को सहज बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है। आरबीआई के सामने चुनौती बैंकों का जोखिम घटाने की है। सरकार ने एमएसएमई को गारंटी और समाज के कमजोर वर्गों को नकद हस्तांतरण के जरिए सहायता देने का मार्ग चुना है। वित्तीय सहायता के अभाव में बाजार निराश है, जिसकी दरकार मांग में तेजी लाने के लिए हो सकती है। अब भी उम्मीद बनी हुई है कि सरकार खर्च बढ़ाएगी जब अर्थव्यवस्था खुल जाएगी। सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए काफी बड़ा कदम उठाया है और वह है एपीएमसी का विखंडन। उन्हें इस संकट का इस्तेमाल भूमि व श्रम सुधार के लिए करना चाहिए।


अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से भी प्रोत्साहन के एक और दौर की उम्मीद है? क्या अन्य केंद्रीय बैंक इस राह पर चलेंगे?

कोविड-19 महामारी की पृष्ठभूमि में दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था को बहाल करने के लिए कई कदम उठाएंगे। दुनिया भर में नकदी सहज होगी और ब्याज दरें कम होंगी। नकारात्मक दरें भी हो सकती हैं। बॉन्ड का प्रतिफल निकट भविष्य में कम रहेगा। नकदी झोंके जाने से मदद मिली है और यह इक्विटी कीमतों को सहारा देना जारी रखे हुए है।


महामारी ने भारतीय वित्तीय क्षेत्र को कितना कमजोर किया है?

हम उस दौर से बाहर निकल रहे हैं जहां हमने विगत के गैर-निष्पादित कर्ज के लिए प्रावधान किया था और वित्तीय क्षेत्र के लिए भविष्य काफी मजबूत नजर आ रहा है। कोविड-19 निश्चित तौर पर गैर-निष्पादित कर्ज के लिए प्रावधान का एक दौर लाएगा क्योंकि कंपनियों ने वास्तव में शून्य बिक्री के परिदृश्य के बारे में नहीं सोचा था। कुल मिलाकर यह क्षेत्र में एकीकरण लाएगा। उधारी के क्षेत्र के भीतर हमारा नजरिया बड़े बैंकों पर ज्यादा तेजी का होगा।


दूरसंचार क्षेत्र के लिए स्थितियां कैसी बन रही हैं?

तीन वजहोंं से दूरसंचार उद्योग बेहतर स्थिति में हैं। पहला, डेटा अब नया तेल बन गया है। लॉकडाउन के कारण डेटा का मांग बढ़ी और घर से काम करने का सिलसिला अभी जारी रहेगा, साथ ही लोगों की आवाजाही कम होगी और फिजिकल मीटिंग डेटा की मांग और बढ़ाएंगे। दूसरा, उद्योग तीन कंपनियों में एकीकृत हो गया है और टैरिफ बढऩे की संभावना है।

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