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सुधार की लंबी राह के बीच मल्टीप्लेक्स पर क्यूएसआर की दिख रही बढ़त

श्रीपाद एस ऑटे / मुंबई May 24, 2020

लॉकडाउन के कारण डिस्क्रिीशनरी मांग पर असर पडऩे और उपभोक्ताओं के व्यवहार पर पडऩे वाले असर की पृष्ठभूमि में बाहर खाना खाने के लिए और भीड़भाड़ वाली जगहों मसलन मॉल और सिनेमा थिएटर जाने से लोग बचेंगे। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2020 (कोविड के पहले) के स्तर पर रिकवरी को पहुंचने में कम से कम 15 से 20 महीने लग जाएंगे। हालांकि डिस्क्रीशनरी क्षेत्र के भीतर भी उम्मीद यह है कि क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (क्यूएसआर) की रिकवरी मल्टीप्लेक्स के मुकाबले तेज हो सकती है।

25 मार्च से शुरू लॉकडाउन के बाद से क्यूएसआर शेयरों मसलन जुबिलैंट फूडवक्र्स और वेस्टलाइफ डेवलपमेंट का मल्टीप्लेक्स मसलन पीवीआर और आईनॉक्स लीजर के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए बाजार का भी ऐसा ही मानना है। केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के मुताबिक, बाहर खाना खाने और सार्वजनिक जगहों पर जाने के मामले में उपभोक्ताओं के बीच डर कुछ समय तक बना रहेगा, ऐसे में डिस्क्रीशनरी क्षेत्र की रिकवरी की रफ्तार सुस्त रहेगी। उन्होंंने कहा, हालांकि क्यूएसआर कंपनियों के डिलिवरी चैनल से उन्हें बेहतर रिकवरी में मदद मिलेगी और प्राथमिकता की सूची में मल्टीप्लेक्स का स्थान आखिरी होगा।

ऐक्सिस सिक्योरिटीज के मुख्य निवेश अधिकारी नवीन कुलकर्णी की राय डिस्क्रीशनरी क्षेत्र (मल्टीप्लेक्स व क्यूएसआर समेत) पर नकारात्मक है और उनका भी मानना है कि क्यूएसआर की रिकवरी तेज रहेगी।

डोमिनो पिज्ज्जा की भारतीय फ्रैंचाइजी जुबिलैंट फूडवक्र्स ने 20 मई को चौथी तिमाही के नतीजे की घोषणा में छोटे शहरों में डिलिवरी कारोबार में सुधार कोविड पूर्व के स्तर पर पहुंचने को रेखांकित किया था। क्यूएसआर को स्थानीय कंपनियों से भी बाजार हिस्सेदारी मिल सकती है।

आईडीबीआई कैपिटल के विश्लेषक वरुण सिंह ने कहा, मौजूदा माहौल ने संगठित क्यूएसआर में ब्रांडेड कंपनियों में अच्छे मौके की पेशकश की है, जो ओपन किचन के जरिये परिचालन करती है और वे असंगठित और क्लाउड किचन कंपनियों से बाजार हिस्सेदारी हासिल कर सकती हैं क्योंकि वे ग्राहकों को सुरक्षा और साफ-सफाई का भरोसा देती हैं। जोमैटो और स्विगी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के जोखिम खत्म हो सकते हैं क्योंकि लोग जानी पहचानी व ब्रांडेड कंपनियों को प्राथमिकता देंगे।

हालांकि संगठित क्यूएसआर के रेस्तरां कारोबार पर दबाव (जो करीब 40 फीसदी राजस्व देता है) और बड़े शहरों में मांग में सुधार (जो कोविड-19 के कारण प्रभावित हुआ है) जारी रहेगा और इस पर नजर रखी जा सकती है। दूसरा, उच्च इनपुट लागत से मार्जिन पर असर पड़ सकता है क्योंंकि मौजूदा माहौल में ऐसी बढ़ी लागत का भार ग्राहकों पर डालना आसान नहीं होगा।

ग्राहकों को आकर्षित करने का मल्टीप्लेक्स के पास कोई वैकल्पिक जरिया नहीं है, ऐसे में उनकी रिकवरी काफी सुस्त रह सकती है। आईनॉक्स लीजर के मुख्य कार्याधिकारी आलोक टंडन ने कहा, लॉकडाउन के बाद सबसे बड़ी चुनौती ग्राहकों का भरोसा जीतने और उन्हें इस तरह की अंतर्निहित चिंता से बाहर निकलने में मदद करने की होगी।

अप्रैल के आखिर में एमके रिसर्च की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि राजस्व के अहम क्षेत्र (टिकट और खाद्य व बेवरिजेज से संग्रह : जो राजस्व का 80 फीसदी से ज्यादा होता है) में गिरावट वित्त वर्ष 2021 में 55 फीसदी से ज्यादा घटेगी। देसी ब्रोकरेज (जिसने पीवीआर व आईनॉक्स लीजर के शेयरों को डाउनग्रेड कर निवेशित बने रहने को कहा है) ग्राहकों की आवक और विज्ञापन राजस्व वित्त वर्ष 2022 में कोविड के पूर्व वाले स्तर पर पहुंचने की संभावना जताई है क्योंकि उनकी रिकवरी में देर होगी। क्षमता के कम इस्तेमाल से भी आय को झटका लग सकता है।

प्रभुदास लीलाधर के विश्लेषक जिनेश जोशी ने कहा, सोशल डिस्टेंसिंग के बीच कम ऑक्युपेंसी इस्तेमाल के कुल स्तर को नीचे रखेगा। आईनॉक्स के प्रबंधन ने भी इस पर सहमति जताई है कि जब भी परिचालन शुरू होगा तब सोशल डिस्टेंसिंग की दरकार होगी और यह ऑक्युपेंसी को प्रभावित करेगा। ऐसे में जोशी को लग रहा है कि अल्पावधि में क्षमता इस्तेमाल में 20 से 25 फीसदी की कमी आएगी। हालांकि उनका यह भी कहना है कि लंबी अवधि के लिहाज से मल्टीप्लेक्स के ढांचागत बढ़त की कहानी पहले की तरह बनी हुई है।

इसके अतिरिक्त कंटेंट की संभावित कमी (लॉकडाउन के कारण मूवी का उत्पादन ठप है) और ओटीटी या डिजिटल चैनल से प्रतिस्पर्धा भी उनके परिदृश्य को प्रभावित करेगा। ओटीटी में कुछ नई मूवी के रिलीज होने की हालिया प्रवृत्ति पर नजर डालें तो लंबी अवधि के परिदृश्य पर भी इसके निहितार्थ हो सकते हैं।

विश्लेषक ने कहा, फिक्स्ड लागत की ज्यादा हिस्सेदारी (किराया, मजदूरी) भी दोनों क्षेत्रों के लिए चिंता का विषय है। कंपनियां हालांकि किराए पर बातचीत कर रही हैं, लेकिन दोनों मल्टीप्लेक्स (पीवीआर व आईनॉक्स) ने इस मोर्चे पर अनुबंध में बदलाव के लिए कहा है, लेकिन जब भी वे अपना परिचालन दोबारा शुरू करेंगे तो उन्हें अपना मुनाफा संरक्षित करना मुश्किल होगा।

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