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जीएसटी मुआवजा देने के लिए बाजार उधारी पर विचार

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली May 24, 2020

राज्यों के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में आई कमी की भरपाई के लिए केंद्र सरकार विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है, जिसमें बाजार से उधारी लेना और उपकर पुनर्भुगतान की अवधि को आगे और बढ़ाने का विकल्प शामिल है।

अगले माह की शुरुआत में प्रस्तावित जीएसटी परिषद की बैठक में जीएसटी दरें बढ़ाने या कर ढांचों को तार्किक बनाने के विकल्प पर भी चर्चा की जा सकती है। मुआवजा कोष में आने वाले उपकर संग्रह में आई कमी के कारण राज्यों को मुआवजा देना मुश्किल हो गया है क्योंकि कोरोनावायरस आपदा के कारण राजस्व में बहुत तेज गिरावट आई है।  मुआवजा उपकर लग्जरी और नुकसानदायक वस्तुओं जैसे एरेटेड ड्रिंक, कोल, पान मसाला, सिगरेट और ऑटोमोबाइल पर लगाया गया है, जिन पर कर की सबसे ज्यादा दर 28 प्रतिशत निर्धारित है।

कानून के तहत अगर राज्यों का जीएसटी राजस्व आधार वर्ष 2014-15 से कम से कम 14 प्रतिशत नहीं बढ़ता है तो केंद्र उस अंतर का भुगतान करती है। यह भुगतान हर दो महीने पर किया जाता है और जीएसटी लागू होने के पहले 5 साल तक ऐसा किया जाना है।

जीएसटी सेस वाले वस्तुओं की संख्या बढ़ाने का विकल्प चुनने पर भी साल में सिर्फ 2,000 से 3,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। ऐसे में यह विचार छोड़ दिया गया। एक और विकल्प पर विचार हो रहा है कि कर के ढांचे में फेरबदल करके कर बढ़ाया जाए। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'कर ढांचे को तार्किक बनाकर जीएसटी दरों में बढ़ोतरी एक विकल्प है। परिशद कोविड-19 महामारी को देखते हुए इस पर चर्चा कर सकती है। बाजार से उधारी लेना एक और विकल्प है, और ऐसी स्थिति में लगने वाला उपकर निर्धारित 5 साल से आगे बढ़ाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल उधार ली गई राशि के भुगतान में हो सकता है।' उन्होंने कहा कि कोई भी फैसला परिषद द्वारा सामूहिक रूप से ही लिया जाएगा। जीएसटी परिषद की पिछली बैठक मार्च में हुई थी, जिसमें इस बात पर चर्चा हुई थी कि अगर मुआवजा उपकर घटता है तो राज्यों की जरूरतें पूरी करने के लिए उधारी का विकल्प अपनाया जा सकता है।

इसे लेकर तमाम कानूनी सवाल भी हैं कि इस उधारी के लिए गारंटी कौन देगा, इसका पुनर्भुगतान कैसे किया जाएगा और कितने ब्याज का भुगतान करना पड़ेगा। साथ ही राजकोषीय दायित्व व बजट प्रबंधन अधिनियम पर इसका क्या असर होगा।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'अगस्त 2019 के आखिर से ही हमने यह महसूस करना शुरू कर दिया था कि राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को जीएसटी मुआवजा का भुगतान प्रभावित हो रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि औसत मासिक उपकर संग्रह की तुलना में मुआवजा उपकर की जरूरत दोगुनी हो गई।'

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