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भुगतान में छूट से बिगड़ सकता है अनुशासन

अभिजित लेले / मुंबई May 24, 2020

किस्तों के भुगतान में मई 2020 के बाद 3 महीने की छूट और बढ़ाने से कर्जदाताओं को कुछ उन कर्जदारों से जोखिम हो सकता है, जो चुकाने की स्थिति में तो हैं, लेकिन पुनर्भुगतान न करने का विकल्प चुन सकते हैं।

इस कदम से कुछ वित्तीय कंपनियों जैसे उधारी लेने वालों का बोझ भी कर्जदाताओं पर पड़ सकता है, जो पहले लाभार्थी नहीं थे।

भारतीय स्टेट बैंक के एक अधिकारी ने कहा कि छोटे और मझोले उद्यमों के लिए 3 महीने की अतिरिक्त छूट उचित है। लेकिन यह खुदरा कर्ज लेने वालों (जिनमें ज्यादातर वेतनभोगी हैं) के मामले में सही नहीं है। उनका नकदी प्रवाह प्रभावित नहीं हुआ है। उनमें से कुछ की नौकरियां गई हैं और कुछ के वेतन कटे हैं, लेकिन ऐसे लोगों की संख्या कम है। यह क्षेत्र सामान्य भुगतान को लेकर चुनौती बन सकता है। इसकी वजह से बैंकों पर कठिन दौर में दबाव बढ़ सकता है।

स्टेट बैंक के अधिकारी से सहमति जताते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि कर्ज लेने वाले सक्षम लोग भी भुगतान करना रोक सकते हैं और इसके लिए आवेदन आएंगे। छूट के दौरान जो ब्याज लिया जाएगा, वह पुनर्भुगतान पर बोझ बनेगा। उन्होंने कहा, 'कर्जदाता ऐसी स्थिति देख रहे हैं, जिसकी वजह से खराब कर्ज बढ़ सकता है।'

क्रिसिल रेटिंग में वरिष्ठ निदेशक कृष्णन सीतारमण ने कहा कि कर्जदाता को उधारी लेने वाले के व्यवहार पर नजर रखनी होगी, जिससे भुगतान का अनुशासन बना रहे। उन्होंने कहा कि लगातार 6 महीने तक कर्ज का भुगतान न करने से कर्ज को लेकर अनुशासन बिगड़ सकता है।

अगस्त 2020 तक एनपीए चिह्नित करने के प्रावधानों को स्थिर करने से कर्जदाताओं को एनपीए की रिपोर्ट करने को लेकर आंतरिक राहत मिलेगी। क्रिसिल ने कहा है कि इस वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के सामने जो व्यापक चुनौतियां हैं, इससे बुनियादी कर्ज गुणत्ता प्रभावित हो सकती है और कर्ज भुगतान न करने की छूट खत्म होने पर बैंकों व एनबीएफसी दोनों में एनपीए का स्तर संपत्ति के सभी वर्गों में बढ़ सकता है।  घरेलू ब्रोकरेज एमके ने एक समीक्षा में कहा कि बैंकों को दूसरी बार भुगतान में छूट बढ़ाने के मामले में चुनिंदा रुख अपनाना होगा क्योंकि कारोबारी गतिविधियां धीरे धीरे बहाल हो रही हैं और लंबे समय तक भुगतान न करने की छूट देने से संपत्ति की गुणवत्ता का जोखिम बढ़ेगा। कारोबारी गतिविधियां धीरे धीरे बहाल होने के साथ कर्ज के भुगतान में 3 महीने की छूट के बजाय संपत्ति के वर्गीकरण पर फॉरबियरेंस या चुनिंदा पुनर्गठन (खासकर एसएमई के लिए) बेहतर समाधान रहा होता। बैंकरों ने कहा कि लंबी अवधि के ऋण जैसे मॉर्गेज के मामले में लंबे समय तक भुगतान में छूट स्वीकार्य है, लेकिन छोटी अवधि के कर्ज में नहीं, साथ ही इससे बेहतर ग्राहकों के कर्ज का अनुशासन भी बिगड़ सकता है।

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