बिजनेस स्टैंडर्ड - सरकार के दावे के उलट कर रिफंड गया घट
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सरकार के दावे के उलट कर रिफंड गया घट

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 05 24, 2020

बिजनेस स्टैंडर्ड सरकार के दावे के उलट कर रिफंड गया घटकोरोनावायरस महामारी के बीच सरकार ने कर रिफंड में तेजी लाने का दावा किया है लेकिन हकीकत इससे उलट है। इस वित्त वर्ष में अप्रैल से अब तक प्रत्यक्ष कर रिफंड में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 67 फीसदी की गिरावट आई है।

1 अप्रैल से 21 मई के दौरान वास्तविक रिफंड 16,242 करोड़ रुपये का रहा जबकि पिछले वित्त वर्ष में इस दौरान 48,900 करोड़ रुपये का रिफंड किया गया था।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने शुक्रवार को एक बयान में कहा था कि चालू वित्त वर्ष में अब तक 17 लाख करदाताओं को 26,242 करोड़ रुपये के कर रिफंड जारी किए जा चुके हैं। मामले के जानकार दो सरकारी अधिकारियों के अनुसार इस रकम में दूसरे वर्षों की बकाया मांग के समायोजन को भी शामिल किया गया है। पिछले वर्षों के करीब 10,000 करोड़ रुपये बकाया कर के तौर पर समायोजित किए गए हैं। ऐसे में सरकार को तत्काल नकदी नहीं देनी पड़ी है।

एक अधिकारी ने कहा कि हालांकि मौजूदा मांग में समायोजित किए गए मामलों को लेकर एक बार फिर विवाद हो सकता है, अगर इसका निर्णय करदाताओं के पक्ष में आता है।

कोविड के कारण अर्थव्यवस्था पर पडऩे वाले प्रभाव का कम करने के लिए सरकार की ओर से 5 लाख रुपये तक के कर रिफंड में तेजी लाने की घोषणा की गई थी। 21 मई तक करीब 40,000 मामलों में कम से कम 52,491 करोड़ रुपये का रिफंड किया गया है। लेकिन ये मामले जांच के अधीन हैं या कर अधिकारी के पास मंजूरी के लिए लंबित हैं।

इनमें से करीब 36,155 करोड़ रुपये का रिफंड जांच के लिए भेजे गए मामले में अटके हैं। इसी तरह करीब 20,500 मामलों में करीब 16,336 करोड़ रुपये का रिफंड करर अधिकारी की मंजूरी के इंतजार वाले मामलों में अटके हैं। एक अधिकारी ने कहा, 'जांच के लिए लिए गए मामलों या कर अधिकारी की मंजूरी के लिए लंबित मामलों के रिफंड को मंजूर करने का प्रशासनिक निर्देश नहीं दिए गए हैं।' पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इस साल कम रिफंड मिलने का मतलब है कि शुद्घ प्रत्यक्ष कर संग्रह बढ़ा है जबकि सकल संग्रह में कमी आई है।

चालू वित्त वर्ष में अप्रैल में 6,772 करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया गया जो 2019-20 में इसी महीने में जारी 18,474 करोड़ रुपये के रिफंड का करीब एक-तिहाई है। इसकी वजह से प्रत्यक्ष कर संग्रह का शुद्घ रिफंड 36.5 फीसदी बढ़ा है जबकि सकल संग्रह अप्रैल में 5.4 फीसदी घटा है। एकेएम ग्लोबल में पार्टनर अमित माहेश्वरी ने कहा कि काफी संख्या में करदाताओं को रिफंड जारी करना चाहिए क्योंकि इससे उनके पास नकदी की उपलब्धता बढ़ेगी जिसकी सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा, 'सरकार को उन मामलों में भी तेजी से रिफंड जारी करने चाहिए जिसकी जांच चल रही है।'

एक कर विशेषज्ञ ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि कुछ मामलों में रिफंड पिछले वर्षों के कर मांग के बकाये में समायोजित किया गया है जबकि इसे लेकर विवाद है और मामले उच्चतर अपील प्राधिकरण के पास लंबित हैं। इसके साथ ही जांच लंबित वाले मामलों में भी रिफंड जारी नहीं किए जा रहे हैं।

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