बिजनेस स?टैंडर?ड - स्वास्थ्य सुविधाओं पर बढ़ रहा दबाव
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स्वास्थ्य सुविधाओं पर बढ़ रहा दबाव

रुचिका चित्रवंशी और सोहिनी दास / नई दिल्ली/मुंबई 05 22, 2020

बिजनेस स?टैंडर?ड स्वास्थ्य सुविधाओं पर बढ़ रहा दबावदेश में कोविड-19 के लगातार बढ़ते मामलों के बीच देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की कमियां भी उजागर हो रही हैं। पिछले कुछ दिनों में संक्रमित लोगों की तादाद बढऩे से महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी खलने लगी है और अस्पतालों में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की कमी से जुड़ीं चिताएं भी माथे पर शिकन ला रही हैं। देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं भी एक समान नहीं हैं और इससे भी कोविड-19 से निपटने में दिक्कतें आ रही हैं।

हालांकि देश में लॉकडाउन के बीच पिछले दो महीनों में स्वास्थ्य उपकरण विनिर्माताओं ने इस महामारी से बचाव और इससे जुड़े संबंधित चिकित्सा उपकरण तैयार करने में करीब 1,000 करोड़ रुपये जरूर झोंके हैं, लेकिन सुविधाएं फिर भी अपर्याप्त हैं। सरकार ने कोविड-19 से बचाव में काम आने वाले रक्षा उपकरणों जैसे फेस मास्क, सैनिटाइजर आदि के उत्पादन पर खासा जोर दिया है, लेकिन इस उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि देश में वेंटिलेटर और सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) सुविधाओं की कमी है। इस बारे में मेदांता अस्पताल के चेयरमैन नरेश त्रेहन ने कहा, 'लॉकडाउन के बीच देश में आवश्यक चिकित्सा उपकरण बनाने में तेजी जरूर आई है, लेकिन यह कितना कारगर होगा, इसका अंदाजा फिलहाल लगाना मुमकिन नहीं हैं। मामले ऐसे ही बढ़ते रहे तो इतने से कोविड-19 संक्रमण से निपट पाना संभव नहीं होगा।'

स्वास्थ्य उपकरण विनिर्माण उद्योग के अनुसार इस समय देश में 20,000 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें 7,000 कारगर नहीं हैं। सरकार ने करीब 15,000 वेंटिलेटर बाहर से खरीदे हैं। देश में वेंटिलेटर का निर्यात करने वाली सबसे बड़ी कंपनी स्कैनरे टेक्नोलॉजी के संस्थापक विश्वप्रसाद अल्वा ने कहा, 'देश में 14,000 आईसीयू बेड के साथ वेंटिलेटर की सुविधा है। सरकार द्वारा वेंटिलेटर खरीदने के बाद इनकी संख्या बढ़कर अब 30,000 हो गई है। हालांकि  अब भी यह पर्याप्त नहीं कही जा सकती।'

इसमें कोई शक नहीं कि पिछले दो महीने के दौरान देश में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन आपूर्ति आदि सेवाओं की क्षमता बढ़ी है, लेकिन इन अति महत्त्वपूर्ण उपकरणों का पूरी दक्षता से इस्तेमाल करने वालों पेशेवरों की कमी भी एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। उदाहरण के लिए वेंटिलेटर सुविधा के साथ लैस आईसीयू के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों और नर्सों की जरूरत होती है।

मणिपाल हॉस्पिटल्स के मुख्य कार्याधिकारी दिलीप जोश ने कहा, 'किसी बड़े अस्पताल में ऐसे चार से पांच विशेषज्ञ डॉक्टर हो सकते हैं, जिनके अंदर कनिष्ठ डॉक्टर की एक टीम काम करती है। गंभीर इलाज की जरूरत वाले मरीजों के देखभाल के लिए भी अति प्रशिक्षित नर्सों की जरूरत होती है। कम से कम अचानक तो ऐसे दक्ष पेशेवर तैयार नहीं हो सकते।' देश में पर्याप्त मात्रा में डॉक्टर भी उपलब्ध नहीं हैं। कोविड-19 संक्रमण के बाद डॉक्टरों को बिना आराम किए कई घंटों तक काम करना होता है। ग्लोबल हॉस्पिटल, मुंबई में डॉक्टर (इंटरनल मेडिसिन) मंजुषा अग्रवाल कहती हैं, 'यह शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही एक मानसिक चुनौती भी है। पीपीई सूट में आठ से दस घंटे काम करना कठिन है और सबसे अव्वल बात कि आम लोगों की तरह ही डॉक्टरों को भी आराम की जरूरत होती है।'भारत में इस समय कोविड-19 के मामले की संख्या 1,18,447 है, जिनमें शुक्रवार सुबह तक 3,583 लोगों की मौत हो चुकी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कुल सक्रिय मामलों में 6.39 प्रतिशत मरीजों के अस्पताल में इलाज की जरूरत होती है। मौजूदा अनुमान के अनुसार इस समय करीब 5,000 मरीजों को वेंटिलेटर, ऑक्सीजन जैसी सेवाओं की जरूरत है। अस्पतालों का कहना है कि प्रत्येक मरीज के लिए प्रति दिन डॉक्टरों और सहायक स्वाथ्यकर्मियों के लिए कम से कम 3 पीपीई की जरूरत होती है। देश के विभिन्न राज्यों में कोविड-19 के मरीजों को बेड मयस्सर नहीं हो पा रहे हैं और इनका इंतजाम करने में राज्य सरकारों की सांसें फूल रही हैं। अगले कुछ दिनों में कोविड-19 के लिए 25,000 बेड उपलब्ध होंगे, लेकिन उन शहरों के लिए ये पर्याप्त नहीं होंगे, जहां स्वास्थ्य सेवाओं पर पहले ही काफी दबाव है।  विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कोविड-19 के संभावित मरीजों का सही अनुमान नहीं लगाया गया है। अस्पतालों में कोविड-19 के लगातार नए मामले आ रहे हैं और इनमें लक्षण भी अलग-अलग हैं। मेडिका ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स में चेयर-फिक्की हेल्थ सर्विसेस कमेटी ऐंड चेयरमैन आलोक रॉय ने कहा, 'जिस वायरस ने इतना आतंक मचा रखा है, उसके बारे में हमें अधिक मालूम नहीं है। अगर आप एक कमरे में 10 लोगों के साथ बैठै हैं तो ऐसा सकता है उनमें 3 कोविड-19 से संक्रमित हों।' इन परिस्थितियों में इस महामारी से निपटने के लिए भारत में एक मजबूत स्वास्थ्य ढांचे की जरूरत होती और यह बात भी अहम होगी संक्रमण किस तरफ्तार से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि देश में मुंबई जैसे कोविड-19 संक्रमण के कई केंद्र सामने आ सकते हैं।

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