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अब सरकारी बैंकों में जमा हो रहा ज्यादा धन

कृष्णकांत और अभिजित लेले / मुंबई May 21, 2020

धन जमा होने के मामले में निजी क्षेत्र के बैंकों के हाथों बड़ा बाजार गंवाने के बाद पिछले कुछ महीनों के दौरान सरकारी बैंकों (पीएसबी) में जमा बहुत तेजी से बढ़ा है। धन जमा करने वाले बहुत से लोग येस बैंक के घोटाले और फ्रैंकलिन टेंपलटन बॉन्ड फंड में गड़बडिय़ों के बाद जोखिम से बचना चाहते हैं।

जनवरी  से मार्च 2020 के दौरान और अप्रैल 2020 में सरकारी बैंकों में जमा तेजी से बढ़ा है। बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता के माहौल के बीच लोगों को सरकारी बैंक सुरक्षित नजर आ रहे हैं।

दक्षिण भारत के एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि उनके बैंक में कोविड के हमले के बाद से 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा हुआ है। सामान्य स्थितियों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में जमा का बड़ा हिस्सा जाता है।

पिछले सप्ताह भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा था कि वित्त वर्ष 20 की चौथी तिमाही में बैंक के जमा का आधार करीब एक लाख करोड़ रुपये बढ़ा है क्योंकि वित्तीय उठापटक के बीच तमाम ग्राहक सरकारी बैंकों को सुरक्षित समझ रहे हैं।

पिछले वित्त वर्ष में कई बैंक असफल हुए, जिसकी शुरुआत पंजाब ऐंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक से हुई और देश का पांचवां सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का बैंक येस बैंक डूबते-डूबते बचा। वहीं दीवान हाउसिंह फाइनैंस लिमिटेड ने चूक की और दीवालिया हुई, उसके बाद अल्टिको कैपिटल का यही हस्र हुआ। 23 मार्च 2020 को फ्रैंकलिन टैंपलटन नकदी के संकट के कारण अपने 6 डेच फंड को बंद करने की घोषणा की, जिसमें निवेशकों के करीब 30,000 करोड़ रुपये फंस गए।

बैंक अधिकारियों का कहना है कि इन घटनाओं की वजह से तमाम बैंक ग्राहकों को प्राइवेट बैंकों व कोऑपरेटिव बैंकों में जमा धन और डेट म्युचुअल फंड में निवेश की सुरक्षा को लेकर चिंता होने लगी।

दिल्ली के एक प्रमुख पीएसबी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'अपना धन जमा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग सरकारी बैंकों की ओर आ रहे हैं और हजारों करोड़ रुपये जमा कर रहे हैं। 2019-20 की अंतिम तिमाही में निजी बैंकों की विफलता के बाद ऐसी स्थिति बनी है।'

सॉवरिन गोल्ड बॉन्डों की बिक्री में तेज बढ़ोतरी एक और आश्चर्यजनक बात है।

इससे दो दशक से चली आ रही धारणा उलटी पड़ गई है। पिछले 2 दशक से जमा में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी घट रही थी और नए निजी बैंकों जैसै एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, ऐक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और इंडसइंड बैंक को जगह मिल रही थी।  भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी बैंकों सहित अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों में हुए कुल जमा में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी मार्च 2019 के आखिर में 65.8 प्रतिशत थी। यह मार्च 2014 के 77.2 प्रतिशत और मार्च 2005 के 78.2 प्रतिशत की तुलना में कम है।

वहीं इसी अवधि के दौरान निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी मार्च 2019 के अंत तक मार्च 2014 के 18.7 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर 29.6 प्रतिशत हो गई। वहीं मार्च 2005 के अंत में इनकी हिस्सेदारी 17.1 प्रतिशत थी।

कुल संयुक्त जमा में सूचीबद्ध पीएसबी की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 20 की तीसरी तिमाही में 70.2 प्रतिशत थी, जो मार्च 2019 के 69.5 प्रतिशत से ज्यादा है।

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