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निजी क्षेत्र को खदान देने के आए नियम

श्रेया जय / नई दिल्ली May 21, 2020

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज निजी कंपनियों द्वारा कोयले के वाणिज्यिक खनन और बिक्री के लिए खदान नीलामी के नए तरीके को मंजूरी दे दी। इसमें बोली के लिए राजस्व हिस्सेदारी मॉडल, बोलीकर्ताओं के लिए पात्रता मानदंडों में छूट और कोयले के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शन से जुड़े प्रोत्साहन शामिल हैं।

मौजूदा महामारी को देखते हुए कोयला क्षेत्र में निवेश की धारणा में सुधार के लिए नीलामी के नए तरीके में पहले भुगतान की जाने वाली राशि घटा दी गई है। कोयला मंत्रालय ने पहले उत्पादन के लिए प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया है। कोयला मंत्रालय ने कहा, 'अगर खदान मालिक पहले उत्पादन शुरू कर देते हैं तो वे जो धनराशि राज्यों के  साथ साझा करेंगे, उसमें 50 प्रतिशत छूट मिलेगी।'

नए तरीके में यह कहा गया है कि बोली का मानदंड राजस्व हिस्सेदारी मॉडल होगा। बोलीकर्ता को राजस्व की प्रतिशत हिस्सेदारी के आधार पर बोली लगानी होगी, जिसका भुगतान वह सरकार को करेंगे।

कोयला मंत्रालय ने एक बयान में कहा है, 'यह तरीका जल्द से जल्द बाजार में अधिकतम कोयला मुहैया कराने पर केंद्रित है और इसमें पर्याप्त प्रतिस्पर्धा की भी व्यवस्था की गई है, जिससे ब्लॉकों के बाजार मूल्य की तलाश में मदद मिलेगी और कोयला ब्लॉकों का तेजी से विकास होगा। ज्यादा निवेश आने से कोयला वाले इलाकों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होगा और खासकर इन इलाकों के आर्थिक विकास में कोयला क्षेत्र की अहम भूमिका होगी।' रुपये प्रति टन की जगह खदानों का आवंटन राजस्व हिस्सेदारी मॉडल पर होगा। कोयला मंत्रालय के इस तरीके में कहा गया है, 'न्यूनतम मूल्य राजस्व में 4 प्रतिशत हिस्सेदारी का होगा। बोलियां 10 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी तक 0.5 प्रतिशत के गुणक में स्वीकार की जाएगी। उसके बाद बोलियां 0.25 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी के गुणक में स्वीकार की जाएंगी।'

इसमें आगे कहा गया है कि सफल बोलीकर्ता को राजस्व के हिस्से का भुगतान सरकार को हर महीने करना होगा। कोयला मंत्रालय ने कहा है कि कोयले का मूल्य बाजार संचालित होगा, जिसके लिए नया राष्ट्रीय कोयला सूचकांक (एनसीआई) बनाया जाएगा। इसके माध्यम से इन खदानों के कोयले को खुले बाजार में बेचने का मूल्य तय किया जाएगा और इस राजस्व को खदान धारक राज्यों को दिया जाएगा।

सरकार ने खननकर्ताओं द्वारा पहले भुगतान की जाने वाली राशि को भी घटा दी है, जो वह खदान वाले राज्यों को देते हैं। यह अनुमानित भौगोलिक भंडार के मूल्य का 0.25 प्रतिशत होगा, जिसे 4 समान किस्तों में चुकाना होगा। खदान के लि पहले भुगतान की जाने वाली राशि की ऊपरी सीमा 500 करोड़ रुपये तय की गई है, जिनमें भंडा 20 करोड़ टन से ज्यादा है और उन खदानों के लिए 100 करोड़ रुपये तय की गई है, जिनमें 20 करोड़ टन तक भंडार है। इसके पहले खननकर्ता को पूरी राशि का भुगतान करना पड़ता था, जिसकी वजह से यह राशि बहुत ज्यादा हो जाती थी।

कोयला मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इससे छोटे कारोबारियों को भी नीलामी में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

कोयला मंत्रालय ने कहा है, 'नीलामी/आवंटन से मिलने वाले पूरे राजस्व का भुगतान कोयला वाले राज्य को किया जाएगा। इस तरीके से उन्हें राजस्व बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और वे इसका इस्तेमाल पिछड़े इलाकों के विकास के लिए कर सकेंगे, जहां आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं। इससे देश के पूर्वी इलाकों के राज्यों को लाभ होगा।'

राजस्व हिस्सेदारी का फॉर्मूला नैशनल कोल इंडेक्स (एनसीआई) पर आधारित होगा। कोयला मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एनसीआई में घरेलू कोयला बाजार में कोयले के दाम में बदलाव नजर आएगा। एनसीआई में विभिन्न चैनलों जैसे अधिसूचित मूल्य, ई नीलामी मूल्य और आयात मूल्य के मासिक भाव के आधार पर मूल्य तय होगा।


एमएसएमई को ऋण सुविधा की मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिये 9.25 प्रतिशत की रियायती दर पर तीन लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराने की योजना को मंजूरी दे दी। कोरोना वायरस महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित एमएसएमई क्षेत्र को यह ऋण, आपात ऋण सुविधा गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के तहत उपलब्ध कराया जाएगा। एमएसएमई क्षेत्र के लिए मंजूर की गई तीन लाख करोड़ रुपये की यह आपात ऋण सुविधा केंद्र सरकार द्वारा घोषित 21 लाख करोड़ रुपये के पैकेज में शामिल दूसरी बड़ी घोषणा है।  एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि योजना के तहत तीन लाख रुपये तक का कर्ज दिया जाएगा जिसपर नैशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (एनसीजीटीसी) 100 प्रतिशत गारंटी कवर देगी। यह कर्ज पात्र एमएसएमई और मुद्रा योजना के तहत कर्ज लेने वालों को दिया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार 41,600 करोड़ रुपये का कोष उपलब्ध कराएगी। यह कोष चालू वित्त वर्ष के साथ अगले 3 वित्त वर्षों के लिए होगा।


खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की योजना को मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देशभर में दो लाख सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को ऋण से जुड़ी सब्सिडी उपलब्ध कराने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की एक नई केंद्रीय योजना को मंजूरी दे दी है।  कोविड-19 की वजह से प्रभावित अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपये के 'आत्म-निर्भर' पैकेज की घोषणा की थी। इसी पैकेज के तहत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उपक्रमों को औपचारिकताएं पूरी कर संगठित हो कर काम करने में मदद की योजना की घोषणा की गई थी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि असंगठित क्षेत्र के लिए इस योजना के तहत खर्च का बोझ केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा 60:40 के अनुपात में वहन किया जाएगा।   भाषा


राहत पैकेज में तात्कालिक प्रोत्साहन का अभाव : रिपोर्ट

क्रेडिट सुइस वेल्थ मैनेजमेंट ने एक रिपोर्ट में कहा है कि सरकार के 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज में अर्थव्यवस्था के लिए तात्कालिक प्रोत्साहन का अभाव है और हो सकता है कि यह देश की वृद्धि को बहाल करने के लिए पर्याप्त न हो। क्रेडिट सुइस वेल्थ मैनेजमेंट के प्रमुख (भारत इक्विटी शोध) जितेंद्र गोहिल ने 'भारतीय बाजार परिदृश्य एवं रणनीति' रिपोर्ट में कहा, 'कोविड-19 संकट को लेकर भारत की प्रतिक्रिया में निकट भविष्य के लिए किसी बड़े या खास राजकोषीय प्रोत्साहन का अभाव है, और ये विकास को बढ़ावा देने तथा आर्थिक वृद्धि में तेजी लाने में असफल है।' भाषा

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