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नकद अंतरण कागज पर सरल, हकीकत में नहीं

अरूप रॉयचौधरी /  May 20, 2020

बीएस बातचीत

प्रोत्साहन पैकेज 'आत्मनिर्भर भारत'  बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले व्यय सचिव टीवी सोमनाथन ने कहा कि सरकार की कार्रवाई रेटिंग कम होने के किसी डर के आधार पर तय नहीं की गई है। अरूप रॉयचौधरी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि विस्थापितों को नकद अंतरण से ज्यादा मुफ्त खाद्यान्न की जरूरत थी, जो केंद्र ने मुहैया कराया है। प्रमुख अंश


गरीबों व विस्थापितों के लिए नकद अंतरण न करने व कोविड-19 को देखते हुए उद्योगों के लिए तात्कालिक कदम न उठाए जाने को लेकर सरकार की आलोचना हो रही है। आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

यह सिर्फ कोविड पैकेज नहीं था। यह नए व आत्मनिर्भर भारत का पैकेज है। मुझे लगता है कि गरीबों व विस्थापितों को नकदी से ज्यादा भोजन की जरूरत थी। और केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा भोजन मुहैया कराया गया है। हाल की घोषणाओं के बहुत पहले राज्य सरकारों ने विस्थापितों को खाद्यान्न दिया है। कोई जरूरी नहीं है कि नकदी की तत्काल जरूरत हो, जब कोई घर पहुंचने की कवायद कर रहा है। दूसरा बिंदु यह है कि आप कितनी नकदी देंगे, जो पर्याप्त होगी? जैसा कि वित्त मंत्री ने बार बार कहा है कि असली आंकड़े बाद में ही आ सकेंगे। साथ ही यह भी समस्या है कि लोगों का जो समूह जा रहा है उनकी पहचान व बैंक खाते नहीं पता है।

नकद अंतरण हकीकत की तुलना में कागजों में आसान है, जब आप विस्थापितों को नकद अंतरण की बात कर रहे हैं।  ऐसे में हम मुफ्त खाद्यान्न को लेक र बहुत उदार रहे हैं। हमने राज्यों से कहा है कि वह अनाज लें और विस्थापितों को खिलाएं। हमने राज्यों को न सिर्फ खाने के लिए पैसे दिए हैं, बल्कि कैंप बनाने के लिए भी धन दिया गया है।


अब आपदा के असर के बारे में केंद्र को कुछ बेहतर अनुमान है, ऐसे में क्या आपको लगता है कि नकद अंतरण और जनकल्याण के लिए ज्यादा कदम उठाने की जरूरत है?

किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इस समय मुझे किसी नई योजना के बारे में जानकारी नहीं है। अभी महामारी के आर्थिक असर के बारे में भी कहना मुश्किल है, क्योंकि देशबंदी जारी है। उम्मीद है कि 31 मई के बाद स्थिति सामान्य होगी। लेकिन हमें यह भी देखना है कि उपभोक्ताओं और उत्पादकों के व्यवहार में इस दौरान क्या बदलाव आए हैं। स्वास्थ्य को लेकर चिंता खत्म नहीं होगी। अभी वित्त वर्ष का दूसरा महीना चल रहा है और 10 महीने बचे हुए हैं। 


रेटिंग नीचे जाने का डर है?

रेटिंग एजेंसियां क्या करती हैं, यह उनका काम है। हमारा फैसला उनसे प्रभावित नहीं होता, क्योंकि हमारा वृहद आर्थिक परिदृश्य और वित्तीय स्थिति मजबूत है। हम वैश्विक मानकों के मुताबिक कर्ज जीडीपी अनुपात में सुधार करेंगे। हमारे पास बेहतर विदेशी मुद्रा भंडार है। मंदी के बावजूद हमारी विकास दर की क्षमता बेहतर है। एजेंसियों को बाहरी कारकों का डर होता है, लेकिन मैं आपसे साफ कहना चाहता हूं कि इससे हमारी कार्रवाई पर असर नहीं पड़ता है। भारत में निवेश करने वाले रेटिंग एजेंसियों के आधार पर निवेश नहीं करते।

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