बिजनेस स्टैंडर्ड - 'कोविड-19 में इजाफे से निपटने की अच्छी तैयारी'
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'कोविड-19 में इजाफे से निपटने की अच्छी तैयारी'

नम्रता आचार्य /  May 20, 2020

बीएस बातचीत

देश की प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजना - आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी निभाने वाला शीर्ष संगठन - राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) कोविड-19 संकट से निपटने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नम्रता आचार्य के साथ ई-मेल पर एक साक्षात्कार में एबी-पीएमजेएवाई और एनएचए के मुख्य कार्याधिकारी इंदु भूषण ने इस विश्वव्यापी महामारी से लडऩे के लिए सरकार की योजनाओं के बारे में बताया। संपादित अंश :

एनएचए कोविड-19 से कैसे निपटा है?

एनएचए सरकार की प्रतिक्रिया के रूप में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सक्रिय रूप से मदद कर रहा है। पश्चिम अफ्रीका में इबोला महामारी के अनुभव से पता चला है कि इस तरह के संकट पर पूरे समाज की प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है। एनएचए ने इस बात पर ध्यान केंद्रित किया है कि इस प्रतिक्रिया में निजी क्षेत्र को और अधिक सक्रिय रूप से कैसे शामिल किया जाए। हमें कोविड-19 और गैर-कोविड-19 स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के लिए निजी क्षेत्र के अस्पतालों की तरफ से अधिक से अधिक भागीदारी की जरूरत है। चूंकि कई अस्पताल कोविड-19 के लिए समर्पित केंद्र के रूप में तब्दील कर दिए गए हैं, इसलिए गैर-कोविड-19 के गंभीर स्वास्थ्य संबंधी हालात पर ध्यान देने की जरूरत और भी ज्यादा खास हो जाती है जैसे हेमोडायलिसिस, हृदय संबंधी प्रक्रियाएं और कीमोथेरेपी। एनएचए ने इन जरूरतों को पूरा करने के लिए और ज्यादा अस्पतालों को सूचि में शामिल करने के अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। 1 अप्रैल, 2020 के बाद से हमने 1,000 से अधिक नए अस्पतालों को सूचीबद्ध किया है जिनमें ज्यादातर निजी अस्पताल हैं। हमने एबी-पीएमजेएवाई के तहत निजी अस्पतालों को सूचीबद्ध करने की तीव्र प्रक्रिया भी शुरू की है। अस्पतालों को अस्थायी रूप से सूचीबद्ध करने के लिए ज्यादा आसान और कम कठोर मानदंडों के तहत तीव्र सूचीबद्धीकरण के लिए हेम लाइट नामक नई प्रणाली स्थापित की गई थी। हमने कोविड-19 के परीक्षण और उपचार के लिए पैकेज तैयार तथा अधिसूचित किए हैं। मु त सेवाओं वाले सभी 53 करोड़ लाभार्थी इनकी जद में आएंगे। चूंकि राज्य इस महामारी की प्रतिक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं, इसलिए एनएचए ने कीमत तय करने में उन्हें छूट दी हुई है। कुछ राज्यों ने गैर-पीएमजेएवाई वाले मरीजों समेत सभी मरीजों को मुफ्त में ये सेवाएं प्रदान करने का फैसला किया है।


कोविड-19 की प्रतिक्रिया में मदद के लिए आप आईटी का लाभ कैसे उठा रहे हैं?

एनएचए भारत में कोविड-19 के प्रकोप पर सक्रिय रूप से नजर रखे हुए है। हम दैनिक आधार पर गंभीर घातक श्वसन रोगों (एसएआरआई) और नजले-जुकाम जैसी बीमारियों (आईएलआई) से संबंधित रुख का विश्लेषण करते हैं। इन मामलों में कोई भी इजाफा कोविड-19 के प्रसार का प्रमुख संकेत हो सकता है। हम देश भर में फैली अपनी प्रणाली के जरिये ऐसे मामलों के किसी भी इजाफे की सूचना संबंधित राज्य, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और आईसीएमआर को देते हैं ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके। एनएचए के पास ज्यादा जोखिम वाले व्यक्तियों का एक डेटाबेस है। हमने एबी-पीएमजेएवाई के उन लाभार्थियों को एहतियाती सलाह देने के लिए फोन कॉल की हैं जो कोविड-19 के कारण अधिक जोखिम में हैं। जैसे 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग और हाल ही में पीएमएवाई के तहत उपचार पाने वाले लोग। एकत्र किए गए इन आंकड़ों का उपयोग ऐसे संभावित मामलों की पहचान करने तथा जांच सुविधा और संसाधनों का सर्वाधिक उपयोग सुनिश्चित करने के लिए सरकार के प्रयासों को मजबूत करने में भी किया जाएगा। हम नियमित रूप से टेलीफोन के माध्यम से उनके संपर्क में रहते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे ठीक हैं और उनमें कोविड-19 जैसे लक्षण नहीं है। हम उन्हें महामारी से निपटने के तरीके के बारे में भी सलाह देते हैं। हमने ऐसी तीन करोड़  से भी अधिक कॉल की हैं। एनएचए के अत्याधुनिक कॉल सेंटर का उपयोग कोविड-19 की हेल्पलाइन के रूप में भी किया जा रहा है। 600-700 से भी अधिक समर्पित कर्मी चौबीसों घंटे नागरिकों द्वारा की गई कॉल के जवाब दे रहे हैं।


आरोग्य सेतु ऐप से संबंधित गोपनीयता के मसले पर आशंकाओं के बारे में आपका क्या विचार है?

आरोग्य सेतु ऐप को कोविड-19 के संभावित मरीजों की पहचान करने के लिए, अपने नागरिकों के जोखिम के आकलन में मदद के लिए और कोविड-19 मामलों के संपर्कों का पता लगाकर अपनी प्रभावशीलता में सुधार करने के लिए तैयार किया गया है। मेरा मानना ​​है इस ऐप ने उस दिशा में प्रभावी भूमिका निभाई है। इसने नागरिकों को जांच और उपचार केंद्रों तथा अपनी हालत और जोखिम की निगरानी संबंधी जानकारी प्राप्त करने में भी मदद की है। मेरे विचार से इस ऐप में पुख्ता सुरक्षा और गोपनीयता की खूबी है। एनएचए यह सुनिश्चित करने में भी आरोग्य सेतु ऐप का समर्थन कर रहा है कि नागरिक अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं। एनएचए अपने कॉल सेंटर के माध्यम से उन लोगों को कॉल कर रहा है जिन्होंने अपने आकलन में कोविड-19 जैसे लक्षणों की सूचना दी है। एनएचए ने 6,00,000 से अधिक नागरिकों से संपर्क किया है और डॉक्टर के साथ 15,000 से अधिक टेली-परामर्श सुविधा प्रदान की है।


पीएमजेएवाई के तहत कोविड-19 के लिए कोई स्पष्ट पैकेज नहीं हैं जिससे फीस को लेकर अस्पतालों के बीच दुविधा हो रही है। आपका क्या विचार है? अब तक कितने राज्य इस तरह के पैकेज लेकर आए हैं और कुछ राज्य अब भी इसे तैयार करने में इतने पीछे क्यों हैं?

यह सही नहीं है। इस महामारी के प्रकोप के राष्ट्रीय रुख के आधार पर और भारत सरकार की प्रतिक्रिया के अनुरूप इस साल मार्च में हमने कोविड-19 की जांच और इलाज के लिए आयुष्मान भारत पीएमजेएवाई के तहत पैकेज तैयार और अधिसूचित किए हैं और राज्यों को दरें निर्धारित करने के लिए छूट दी है। इसके अलावा हमने उन पैकेजों की भी पहचान की है जो पहले से ही एबी-पीएमजेएवाई के एचबीपी में मौजूद हैं और जिनका इस्तेमाल कोविड-19 के किसी मामले में उपचार की बुकिंग के लिए किया जा सकता है। विभिन्न राज्य इस उपचार में निजी क्षेत्र को शामिल करने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। महाराष्ट्र और झारखंड समेत ज्यादातर राज्यों ने अपनी कीमतें तय कर दी हैं। इस पैकेज को अंतिम रूप देने के लिए अन्य राज्यों के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है। कई राज्य अब भी नि:शुल्क जांच और उपचार उपलब्ध कराने के लिए विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के अस्पतालों पर निर्भर हैं और इनके लिए अपने संसाधनों पर निर्भर रहते हैं। हालांकि जैसे हालात बन रहे हैं और कोविड-19 के उपचार की मांग ज्यादा है, इसलिए राज्यों को अपनी क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता होगी और मरीजों का निरंतर समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए निजी क्षेत्र को कदम बढ़ाना होगा।


रिपोर्ट बताती हैं कि कोविड-19 के लॉकडाउन के दौरान पीएमजेएवाई के तहत अस्पताल भर्ती होने वालों की दैनिक औसत संख्या  में 70 प्रतिशत से अधिक तक की गिरावट आई है जिसका अर्थ यह है कि उपचार करवाना चाह रहे गैर-कोविड रोगियों को बहुत कठिनाई हो रही है। इस समस्या से कैसे निपटा जा सकता है?

यह बात सही है। अस्पताल में भर्ती होने वालों का दैनिक औसत अब गिरकर करीब 12,000 से 13,000 रह गया है, जबकि लॉकडाउन से पहले यह लगभग 25,000 था। हम इस रुख का विश्लेषण कर रहे हैं तथा नॉन-क्रिटिकल और नॉन-इलेक्टिव उपचारों में बड़ी गिरावट आई है। गंभीर उपचार में केवल 20 प्रतिशत की कमी आई है। इस गिरावट का कारण गतिशीलता की कमी और संक्रमण का डर है। अस्पताल सेवाओं की आपूर्ति कम हो गई है क्योंकि कई अस्पताल अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं या उन्होंने अपनी सेवाओं में कमी कर दी है। हम निजी अस्पतालों को उनका परिचालन शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इनकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। पिछले दो सप्ताह के दौरान अस्पताल में भर्ती होने की दर में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।


भारत में कोविड-19 के बढ़ते ग्राफ के मद्देनजर देश में स्वास्थ्य सेवा का ढंाचा कितना तैयार है, विशेष रूप से ग्रामीण ढांचा। खास तौर पर लॉकडाउन के बाद वाले चरण में कोविड-19 के सर्वाधिक उच्च स्तर को संभालने के लिहाज से?

मेरा मानना ​​है कि हम कोविड-19 मामलों में किसी भी संभावित उछाल से निपटने के लिए भली-भांति तैयार हैं। राज्यों ने कोविड-19 के लिए देखभाल केंद्रों के निर्धारण और उन्हें बढिय़ा ढंग से सुसज्जित करने का जबरदस्त काम किया है। उन्होंने कोविड-19 के मामलों में देखभाल और आईसीयू सेवाओं की पर्याप्त क्षमता तैयार की है जिसमें वेंटिलेटर और ऑक्सीजन आपूर्ति भी शामिल है। लॉकडाउन ने हमें इन सेवाओं को मजबूत करने और भविष्य में किसी भी संभावित उछाल के लिए तैयार रहने का पर्याप्त समय दिया है।


हालांकि कोविड-19 की अवधि का पूर्वानुमान लगाना कठिन है, लेकिन आपके विचार से भारत को वैक्सीन का कब तक इंतजार करना होगा?

हालात में अब भी इजाफा हो रहा है। बहुत-से वैज्ञानिक और प्रमुख अनुसंधान प्रयोगशालाएं वैक्सीन विकसित करने का प्रयास कर रही हैं। भारत सरकार भी पीएम केयर्स फंड के जरिये इन प्रयासों में मदद कर रही है। वैक्सीन विकास के बाद सभी लोगों को आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता तैयार करने में भी कुछ समय लग सकता है। इस बीच हमें वायरस के साथ रहना सीखना होगा।

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