बिजनेस स्टैंडर्ड - कार्यस्थलों पर काम का बदल रहा तरीका
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कार्यस्थलों पर काम का बदल रहा तरीका

सुरजीत दास गुप्ता, अर्णव दत्ता, विवेट सुजन पिंटो और देवाशिष महापात्र /  05 20, 2020

बिजनेस स्टैंडर्ड कार्यस्थलों पर काम का बदल रहा तरीकाकुछ दिन पहले भारती एयरटेल के कर्मचारियों के साथ टाउन हॉल मीटिंग में दूरसंचार कंपनी के शीर्ष प्रबंधन ने कर्मचारियों को यह बताते हुए चिंता जाहिर की कि एक बार ऑफिस खुलने के बाद भी ऑफिस आने का निर्णय पूरी तरह स्वैच्छिक होगा और वे घर से काम करना जारी रख सकेंगे। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमने ग्रीन जोन में अपने कार्यालय खोलने की शुरुआत की है। सरकारों से मिलने वाले दिशानिर्देशों के आधार पर हम अगले महीने से शेष कार्यालय खोलने की योजना पर काम कर रहे हैं। ऑफिस आना स्वैच्छिक होगा और एयरटेल के सभी कर्मचारी घर से काम करना जारी रख सकते हैं।'

भले ही लॉकडाउन 4.0 में केंद्र सरकार ने कंपनियों तथा कर्मचारियों के कार्यालय आने संबंधी नियम राज्य सरकार के हाथ में छोड़ दिए हैं, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली भारतीय कंपनियां धीरे-धीरे अपने कार्य स्थल को खोलने के लिए सतर्कता भरे कदम उठा रही हैं। राज्य सरकारों ने भी अपनी ओर से विभिन्न आदेश जारी किए हैं। जैसे, दिल्ली सरकार ने एक बड़ी राहत देते हुए शत-प्रतिशत कर्मचारियों को कार्यालय में आने की अनुमति दे दी है। हालांकि महाराष्ट्र सरकार ने इसके विपरीत कदम उठाने हुए मई के अंत तक सभी कार्यालय बंद रखने का आदेश दिया है।

कोक (जून से पहले कारोबार शुरू होने की संभावना नहीं), पेप्सिको, उबर (वैश्विक मुख्यालयों से अगले आदेश की प्रतीक्षा), नेस्ले, सीएट, गुजरात अंबुजा (20 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ गुरुग्राम कार्यालय खोला) जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियों के कार्यालय या तो बंद हैं, या वे बहुत कम कर्मचारियों के साथ काम कर रही हैं। नेस्ले इंडिया के चेयरमैन तथा प्रबंध निदेशक सुरेश नारायणन कहते हैं, 'कंपनी के मुखिया के रूप में मेरा दृष्टिकोण बेहद सतर्क, रूढि़वादी होना चाहिए तथा इसे लेकर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता एवं चेन्नई में शाखा कार्यालयों को कम से कम अगले कुछ सप्ताह तक बंद रखा जाएगा।' उन्होंने बताया कि केवल गुरुग्राम स्थित प्रधान कार्यालय खोजा जा रहा है जहां उसकी 600 कर्मियों की क्षमता के मुकाबले केवल एक दर्जन कर्मी आ रहे हैं। नेस्ले इंडिया के मालिक इस बात से खुश हैं कि घर से काम करना सही चल रहा है तथा उत्पादकता में किसी तरह की गिरावट नहीं आई। हालांकि कंपनी कोविड-19 के बाद की स्थिति के बेहतर प्रबंधन के लिए ठोस योजना तैयार कर रही है।

सीएट लिमिटेड जैसी टायर क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों का नियंत्रण रखने वाली मुंबई की आरपीजी एंटरप्राइजेज मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के साथ तैयार है और उम्मीद है कि कंपनी जून के पहले सप्ताह से मुंबई में अपने कारोबारी कार्यालय खोल सकती है। कंपनी ने पहले से ही पूरी योजना तैयार कर ली है। कंपनी शुरुआत में 10-15 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ कार्यालय खोलेगी और फिर धीरे-धीरे इसे 33 प्रतिशत तक बढ़ा दिया जाएगा। समूह के एक प्रवक्ता कहते हैं, 'प्रारंभिक चरण में केवल अपने स्वयं के वाहन या कार्यालय की कारों के साथ आने वाले कर्मी ही आएंगे तथा सावर्जनिक परिवहन या टैक्सियों का उपयोग करने वालों को घर से ही काम करने के लिए कहा जाएगा। लिफ्ट में एक बार में केवल दो लोग ही जा सकते हैं, पानी-चाय कपों में उपलब्ध होगी और अंदर के सभी दरवाजे खुले रहेंगे, जिससे किसी को उन्हें छूना न पड़े।'

मुंबई में बहुत सी कंपनियां तथा उद्यमी अपनी एसओपी यानी संचालन प्रक्रिया तैयार कर रहे हैं तथा उन्हें उम्मीद है कि सरकार से जून के पहले सप्ताह में कार्यालय खोलने की अनुमति मिल जाएगी। बजाज कंज्यूमर के प्रबंध निदेशक सुमित मल्होत्रा का कहना है कि शुरुआत में लगभग 20-25 प्रतिशत स्टाफ को काम करने की अनुमति होगी। इसमें ज्यादातर लोग बिक्री, विपणन, आपूर्ति शृंखला तथा परिचालन जैसे अहम काम से जुड़े होंगे। इस प्रोटोकॉल को अगले तीन महीने तक जारी रखा जाएगा।

पारले प्रोडक्ट्स ने 55 साल से ऊपर के वरिष्ठ कर्मचारियों और 10 साल से कम उम्र के बच्चों वाले कर्मचारियों को कार्यालय खुलने के बाद (संभवता जून माह में) भी ऑफिस नहीं आने के लिए कहा है। ऐसा कम से कम तीन महीने तक होगा। पारले प्रोडक्ट्स जब कारोबार दोबारा शुरू करेगी तो केवल 25-30 प्रतिशत कर्मचारियों को ही कार्यालय में आने की अनुमति होगी और काम पर आने वालों के लिए रोटेशन प्रणाली अपनाई जाएगी।

बड़ी कंपनियां भी छोटे-छोटे लेकिन अहम कदम उठा रही हैं। सूत्रों के अनुसार रिलायंस जियो के दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में शत-प्रतिशत कर्मियों को आने की अनुमति है लेकिन वहां 10-15 फीसदी कर्मचारी ही आ रहे हैं। कंपनी ने अपने ग्राहक सेवा से जुड़े कर्मचारियों को भी घर से काम करने की सुविधा दी है और वे कॉल सेंटर के बजाय घर पर रहकर ही जियो ग्राहकों के सवालों का जबाव देते हैं। हालांकि इनसे जुड़े सवालों का जियो प्रवक्ता ने कोई जवाब नहीं दिया।

आईटी सेवाओं, बीएफएसआई, विनिर्माण, वित्तीय सेवाओं तथा आतिथ्य क्षेत्र की कंपनियों के लिए किराये पर सीट उपलब्ध कराने वाली, कोवर्किंग स्पेस कंपनी स्मार्टवक्र्स के ग्राहकों के कर्मचारियों की संख्या भी कम देखने में आ रही है।

स्मार्टवर्क के संस्थापक नीतीश शारदा कहते हैं, 'लॉकडाउन की शुरुआत होने पर हमारे ग्राहकों के कर्मचारियों में से केवल 5 प्रतिशत ही हमारे केंद्रों पर आ रहे थे। बाद में दिल्ली-एनसीआर, बेंगलूरु,  हैदराबाद, चेन्नई जैसे शहरों में यह आंकड़ा 20-25 प्रतिशत तक बढ़ गया। लॉकडाउन 4.0 की घोषणा के बाद अधिक छूट दिए जाने से दिल्ली तथा बेंगलूरु में यह आंकड़ा लगभग 33-35 प्रतिशत हो गया है और हमें उम्मीद है कि जून माह तक यह 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।' शारदा का कहना है कि ग्राहक कंपनियों से मिले फीडबैक के आधार पर आईटी कंपनियां जून अंत तक वापसी की उम्मीद कर रही हैं तो वहीं विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियां जुलाई अंत की योजनाओं पर काम कर रही हैं।

कुछ क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जैसे सैमसंग को 25 फीसदी कर्मचारी गुरुग्राम स्थित कार्यालय में आ रहे हैं। हालांकि कंपनी के कई कर्मी नोएडा, दिल्ली में रहते हैं और अंतरराज्यीय आवाजाही पर प्रतिबंध के चलते उन्हें कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि आईटी कंपनियां बहुत जल्दबाजी में नहीं हैं। इन्फोसिस अभी भी अपने 5 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम करना जारी रख रही है और वरिष्ठ प्रबंधन ने ही कंपनी मुख्यालय से काम करना शुरू किया है। इन्फोसिस की योजना है कि अगले 2-3 महीनों में 15 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ कार्यालय शुरू किए जाएंगे तथा छह महीने की अवधि में यह क्षमता बढ़ाकर 50 फीसदी की जीएगी। वहीं, आईबीएम इंडिया में 99 प्रतिशत कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं और शेष 1 प्रतिशत लोग अतिमहत्त्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

Keyword: Work From Home, Workplace, Office Culture, Lockdown, लॉकडाउन, सूचना प्रौद्योगिकी, कार्यस्थल, मीटिंग, दूरसंचार,
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