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क्षेत्र विशेष के लिए कदम उठाना जरूरी: उद्योग

बीएस संवाददाता / मुंबई/बेंगलूरु May 18, 2020

नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के विशेष आर्थिक पैकेज से अर्थव्यवस्था में सुधार को बल मिलेगा लेकिन शीर्ष भारतीय कंपनियों के मुख्य कार्याधिकारियों (सीईओ) ने क्षेत्र विशेष के लिए कदम न उठाए जाने के कारण निराशा जताई है।

मुख्य कार्याधिकारियों ने कहा कि सरकार को उन उपायों की घोषणा करनी चाहिए जिनसे मांग को रफ्तार मिल सके। गरीबों को प्रत्यक्ष नकदी हस्तांतरण और मध्य वर्ग को कर लाभ देकर मांग पैदा की जा सकती है। देश भर के 25 प्रमुख कारोबारियों के बीच रविवार को किए गए एक सर्वेक्षण में 64 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि पिछले पांच दिनों के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित विशेष आर्थिक पैकेज से कमजोर हो रही अर्थव्यवस्था को दम मिलेगा। लेकिन 88 फीसदी सीईओ ने कहा कि वे क्षेत्र विशेष के लिए पैकेज की उम्मीद कर रहे थे।

विमानन, आतिथ्य सेवा, यात्रा एवं पर्यटन और वाहन जैसे कुछ क्षेत्रों में लॉकडाउन शुरू होने के बाद से ही नकदी प्रवाह शून्य रहा है। इन क्षेत्रों की कई कंपनियां लोगों की छंटनी कर रही हैं अथवा कर्मचारियों के वेतन में बड़ी कटौती की घोषणा की है।

बजाज ऑटो के प्रबंध निदेश राजीव बजाज ने कहा, 'वस्तु एवं सेवा कर में कटौती और लोगों/कंपनियों को निचले स्तर से मदद जैसे मांग सृजित करने वाले प्रत्यक्ष उपायों से अर्थव्यवस्था को कहीं अधिक रफ्तार मिल सकती थी।'

आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने कहा, 'निस्संदेह इस पैकेज में आपूर्ति पक्ष को संतुलित करने के लिहाज से काफी विवेकपूर्ण और संवेदनशील उपाय किए गए हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि मांग कैसे सृजित होगी।' सर्वेक्षण में शामिल 44 फीसदी सीईओ ने कहा कि इस पैकेज से कारोबारी सुगमता में सुधार होगा लेकिन जमीनी स्तर पर इसे लागू करना सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है।

आईआईएफएल के चेयरमैन निर्मल जैन ने कहा, 'कुल मिलाकर यह पैकेज दमदार है और सरकार की मंशा भी सही है। लेकिन हमें केवल यह देखने की जरूरत है कि इसे लागू किस प्रकार किया जाएगा और जिन लोगों को राहत देने की मंशा है, वास्तव में रकम उन कारोबारी श्रेणियों और अर्थव्यवस्था तक रकम पहुंच रही है अथवा नहीं।'

सर्वेक्षण में शामिल 72 फीसदी सीईओ ने कहा कि सरकार इस संकट से अच्छी तरह निपट रही है और इतने ही प्रतिभागियों ने कहा कि आवश्यक सेवा अधिनियम में बदलाव के कारण किसानों की आय में सुधार होगा। इस संशोधन के कारण मंडी अथवा बिचौलिये की बिना किसी दखल के बाजारों तक किसानों की पहुंच सुनिश्चित होगी। इससे उन्हें अपनी उपज के लिए अच्छी कीमत मिल सकेगी।

करीब 40 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि सरकार ने गरीबों के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए हैं जबकि 20 फीसदी प्रतिभागियों ने इस मुद्दे पर अपनी राय जाहिर नहीं की। मेट्रो कैश ऐंड कैरी के सीईओ अरविंद मेदिरत्ता ने कहा, 'सरकार को प्रत्यक्ष हस्तांतरण योजना के तहत हरेक परिवार को 5,000 रुपये हस्तांतरित करने चाहिए। पिछले तीन महीनों से तमाम कर्मचारियों और श्रमिकों को वेतन नहीं मिले हैं। उन्हें अपना अस्तित्व बचाने के लिए नकदी की दरकार है और मांग को रफ्तार देने के लिए सरकार को करों में कटौती करनी चाहिए।' उद्योग जगत कि मुख्य कार्याधिकारियों ने प्रवासी मजदूरों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। बड़ी तादाद में मजदूर सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलते हुए अपने गांव पहुंचने के लिए निकल पड़े हैं।

एक बड़ी बुनियादी ढांचा कंपनी के प्रमुख ने कहा, 'सरकार प्रवासी मजदूरों के लिए बेहतर व्यवस्था कर सकती थी। मार्च के मध्य तक वे कमाई करने वाले नागरिक थे लेकिन अब उनके पास न तो कोई काम है और न ही कोई आमदनी।'

महानगरों से प्रवासी मजदूरों के पलायन के बावजूद 80 फीसदी सीईओ ने कहा कि उनके पास कामकाज सुचारु करने के लिए पर्याप्त श्रमबल मौजूद है। सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए 3 लाख करोड़ रुपये के पैकेज के बारे में 68 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि इससे एमएसएमई क्षेत्र में उनके आपूर्तिकर्ताओं अथवा ग्राहकों को फायदा होगा।

करीब 50 फीसदी सीईओ ने कहा कि ं बैंकों और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा कंपनियों को प्रोत्साहित किए जाने के कारण आने वाले समय में वे और निवेश करेंगे।

(साथ में देव चटर्जी, राजेश भयानी, राघवेंद्र कामत, शैली सेठ मोहिले, हंसिनी कार्तिक, श्रीपाद ऑटे, अमृता पिल्लई, पवन लाल, समरीन अहमद और पीरजादा अबरार)

Keyword: Economic Package, Mini Budget, Lockdown, CEO, आत्मनिर्भर भारत, आर्थिक पैकेज, विमानन, आतिथ्य सेवा, यात्रा, पर्यटन,
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