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'एमएसएमई का 1,819 करोड़ रु बकाया'

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली 05 18, 2020

सरकार पर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के  बकाये को लेकर हुए विवाद के बीच भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा है कि उसके सदस्यों का 1,819 करोड़ रुपये बकाया है।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, 'सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर एमएसएमई के बकाये के कई अनुमान सामने आ रहे ते। इस बीच सीआईआई ने एमएसएमई के बीच त्वरित सर्वे कराया है। इससे पता चलता है कि करीब 450 फर्मों के 1,819 करोड़ रुपये भुगतान में देरी हो रही है। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र या सरकार सहित राज्य के विभागों की देनदारी 1,709 करोड़ रुपये है, जबकि निजी क्षेत्र पर एमएसएमई का बकाया 110 करोड़ रुपये है।'

पिछले सप्ताह एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने एक टेलीविजन साक्षात्कार में संकेत दिया था कि सभी राज्य व सरकारी विभागों व निजी क्षेत्र की एमएसएमई की देनदारी 5 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है। गडकरी द्वारा दिए गए आंकड़े को सोशल मीडिया में खूब प्रसारित किया गया और इस बात को लेकर आलोचना हुई कि सरकार की बड़ी देनदारी लंबित है। बाद में व्यय सचिव टीवी सोमनाथन ने शुक्रवार को साफ किया था कि 31 मार्च 2020 तक 26 प्रमुख पीएसयू की एमएसएमई को देनदारी 773 करोड़ रुपये थी।

अब सीआईआई के पोल से पता चलता है कि नकदी के भारी संकट से जूझ रहे इस उद्योग का बड़ा बकाया फंसा हुआ है। एमएसएमई के 32 प्रतिशत भुगतान में 2 साल से ज्यादा की देरी हो चुकी है     और 895 करोड़ रुपये विवाद में फंसे हुए हैं। बनर्जी ने कहा कि इसका जल्द समाधान किए जाने की जरूरत है।

आगे की राह

सीआईआई ने सरकार को सुझाव दिया है कि शिकायत पोर्टल के माध्यम से केंद्र की पीएसयू द्वारा भुगतान में की जा रही देरी की निगरानी की जाए और इस मकसद के लिए जरूरी धन मुहैया कराया जाए। इस समय यह एमएसएमई समाधान पोर्टल द्वारा किया जा रहा है, जो भुगतान में देरी से प्रभावित एमएसएमई के विवाद निपटान के प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है। सोमवार तक के आंकड़ों के मुताबिक एमएसएमई को 11,014 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। उद्योग संगठन यह भी चाहता है कि देश भर के पीएसयू और सरकार के विभाग अनिवार्य रूप से ट्रेड रिसीवेबल इलेक्ट्रॉनिक डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) में पंजीकरण कराएं , जिससे भुगतान को लेकर इलेक्ट्रॉनिक संस्थागत व्यवस्था बन सके। सीआईआई ने लंबित जीएसटी के तत्काल भुगतान की मांग की है।

Keyword: PSU, MSME, CII, Survey, एमएसएमई, भारतीय उद्योग परिसंघ, सीआईआई,
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