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मदद चाहें खुदरा कपड़ा विक्रेता व कारोबारी

टीई नरसिम्हन / चेन्नई May 18, 2020

कपड़ा उद्योग ने सरकार से विनिर्माण क्षेत्र में एमएसएमई के लिए किए गए उपायों का दायरा खुदरा कपड़ा विक्रेताओं और कारोबारियों के लिए भी बढ़ाने का अनुरोध किया है। भारतीय कपड़ा विनिर्माता संघ (सीएमएआई) ने कहा है कि एमएसएमई को मिलने वाली राहत के तहत विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने के लिए इस क्षेत्र की अधिकतम सीमा में इजाफा, विनिर्माण व सेवा क्षेत्रों के विलय और कुल कारोबार पर आधारित मानदंडों के विस्तार से उद्यमों को सक्षम बनने में लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा।

एमएसएमई की गारंटी या गिरवी के बिना और सरकारी गारंटी द्वारा समर्थित अतिरिक्त ऋण से इसके कई सदस्यों को अति आवश्यक कार्यशील पूंजी की मदद मिल जाएगी जो लॉकडाउन समाप्त होने के बाद उद्योग की शुरुआत के लिए जरूरी है। हालांकि खास बात यह है कि बैंक इन उपायों पर प्रतिक्रिया दिखाएं और देश के आर्थिक विकास में मदद के लिए परिचालन शुरू करवाने की खातिर चार से पांच सप्ताह के भीतर ऋण योजना लागू करें।

सीएमएआई का कहना है कि चूंकि कपड़ा विनिर्माण करने वाली इकाइयों का अधिकांश हिस्सा एमएसएमई के मानदंडों के अंतर्गत आएगा इसलिए हमारा मानना ​​है कि इन उपायों से हमारे क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। खुदरा कपड़ा विक्रेताओं और व्यापारियों के लिए भी इसी प्रकार की मदद की जरूरत है। फिलहाल वे एमएसएमई पंजीकरण के अंतर्गत नहीं आते हैं। मांग सृजित करने और एमएसएमई विनिर्माताओं को दिया जाने वाला ऋण फंसने से बचाने के लिए खुदरा विक्रेताओं का वजूद खास मायने रखता है।

सीएमएआई ने लॉकडाउन और सितंबर तक की अवधि के लिए मजदूरी भुगतान के वास्ते प्रत्यक्ष अनुदान के जरिये छोटे विनिर्माताओं के लिए भी सरकारी सहायता की मांग की है। छोटे विनिर्माता लॉकडाउन और इसके परिणामस्वरूप मांग में कमी से होने वाला नुकसान नहीं झेल पाएंगे। इस तरह की मदद के बिना 30 फीसदी इकाइयों को स्थायी रूप से बंद होना पड़ेगा जिससे कपड़ा और परिधान की मूल्य शृंखला में एक करोड़ नौकरियां जा सकती हैं।

सीएमएआई के मुख्य संरक्षक राहुल मेहता ने कहा कि नियमित उत्पादन के लिए बहुत कम कारखाने खुले हैं। कर्नाटक, तिरुपुर और लुधियाना उन कुछ क्षेत्रों में शामिल हैं जहां कुछ उत्पादन शुरू हो सकता है। स्वाभाविक रूप से चुनौती यह है कि वे किसके लिए उत्पादन करें और क्या उत्पादन करें? चूंकि अधिकांश खुदरा दुकानें अब तक नहीं खुली हैं, इसलिए उनके पास ऑर्डर नहीं हैं। अगले तीन महीनों में खुदरा बिक्री आधी रहने की संभावना है, इसलिए 40 से 50 फीसदी कारोबार के साथ कई कारखानों के लिए काम करना मुश्किल होगा। देश भर में लगभग 75,000 से 80,000 इकाइयां हैं।

भारत के सबसे बड़े परिधान निर्यातक गोकलदास के प्रबंध निदेशक शिवरामकृष्णन गणपति ने कहा कि मांग पूरा करने के लिए उत्पादन को बढ़ावा देने की खातिर पर्याप्त श्रमशक्ति प्राप्त करना कपड़ा उद्योग के सामने बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि हमारे पास जो ऑर्डर हैं, अब उनके लिए हमें मशक्कत करनी पड़ रही है। हमें श्रमिक हासिल करने में दिक्कत हो रही है क्योंकि सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं है। अगर हम ये ऑडर्र पूरे नहीं कर पाते हैं, तो वे लोग इंडोनेशिया या वियतनाम, जहां भी क्षमता हो, वापस जा सकते हैं। हम और अधिक काम शुरू करना चाहते हैं तथ सामान्य उत्पादन में वापस आना चाहते हैं।

पहली तिमाही के दौरान कंपनी अप्रैल में काम नहीं कर सकी थी और यह आधी या इससे भी कम क्षमता पर चल रही है क्योंकि केवल 40 फीसदी कर्मचारी ही आ रहे हैं।

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