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वित्त मंत्री ने गैर रणनीतिक सार्वजनिक उपक्रमों को निजी क्षेत्र के लिए खोला

ज्योति मुकुल और अरूप रॉयचौधरी / नई दिल्ली May 17, 2020

केंद्र सरकार ने रणनीतिक क्षेत्रों की नई सूची लाने की योजना बनाई है, जिसमें अब सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों(पीएसई) की संख्या 4 से ज्यादा नहीं रहेगी। इससे अब मालिकाना में बदलाव होगा और कारोबार का फिर से संगठन होगा।  हालांकि सिर्फ परमाणु ऊ र्जा और रेलवे ऑपरेशन को इस समय रणनीतिक क्षेत्रों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, लेकिन इनमें भी निजी क्षेत्र का हस्तक्षेप देखा जा रहा है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि सरकार एक नई नीति ला रही है, जिसमें रणनीतिक क्षेत्रों को चिह्नित किया जाएगा। कोविड-19 सहित लॉकडाउन के आर्थिक असर से निपटने के लिए प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा के आखिरी चरण में वित्त मंत्री ने कहा, 'परिभाषित क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अहम भूमिका अदा करते हैं। हम एक सुसंगत नीति पेश करेंगे, जिसमें निजी क्षेत्र को अनुमति होगी, लेकिन पीएसई की अहम भूमिका जारी रहेगी।'

अधिसूचित रणनीतिक क्षेत्रों में कम से कम एक पीएसई मौजूद होगी। उन्होंने कहा, 'बहरहाल यह चार रणनीतिक क्षेत्रों में महज एक होगा। या तो उनका एक साथ विलय कर दिया जाएगा, या उन्हें साथ लाया जाएगा, जिससे सार्वजनिक क्षेत्रों की बहुतायत न रह जाए।' उन्होंने कहा कि रणनीतिक क्षेत्र में निजी क्षेत्र भी आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि विचार यह है कि प्रशासनिक लागत की बर्बादी को कम किया जाए, इसलिए पीएई का निजीकरण होगा, विलय होगा या होल्डिंग कंपनी के तहत लाया जाएगा।

रणनीतिक क्षेत्रों की संख्या मौजूदा दो से ऊपर तभी जा सकती हैं, जब नए अधिसूचित क्षेत्रों तो अधिसूचित किया जाएगा और सरकारी कंपनियों की संख्या 4 से ज्यादा नहीं होगी। इससे सरकार की विनिवेश योजना को बल मिलेगा। यह सरकार की होल्डिंग की बाजार में या निजी इकाई को या अन्य पीएसयू को बिक्री के माध्यम से होगा। अधिकारियों ने कहा कि विनिवेश के लिए कंपनियोंं की सूची लाने के बजाय नीति आयोग 'रणनीतिक क्षेत्रों' की सूची तैयार करेगा। यह विभिन्न मंत्रालयों के साथ बातचीत और कैबिनेट की मंजूरी के बाद किया जाएगा। इस सूची में 6 से 7 क्षेत्रों से ज्यादा नहीं होंगे।

प्रस्तावित कदम से सरकार की मौजूदा रणनीतिक बिक्री की योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जिसमें एयर इंडिया शामिल है। व्यय सचिव टीवी सोमनाथन ने कहा, 'इस नीति से एयर इंडिया के निजीकरण पर कोई असर नहीं पड़ेगा।' एक अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि वित्त मंत्री का बयान और ज्यादा निजीकरण किए जाने के पक्ष में है और यह केंद्र सरकार की निजीकरण की योजना को आगे बढ़ाएगा। दूसरे अधिकारी ने कहा, 'याद रखें, यह पहला मौका है, जब सरकार रणनीतिक बिक्री की जगह निजीकरण शब्द का इस्तेमाल कर रही है। यह किसी तरह से निजीकरण के खिलाफ कदम नहीं है।'

पीडब्ल्यूसी में इकनॉमिक एडवाइजरी के लीडर रानेन बनर्जी ने कहा कि पीएसई की संख्या कम करने से अक्षमता कम हो सकती है, जबकि बड़ी पीएसई बनाने से घरेलू बाजार में मात्रा का लाभ मिलेगा और इससे देश की वैश्विक रूप से रणनीतिक क्षमता बढ़ेगी।

31 मार्च 2019 तक के आंकड़ों के मुताबिक  देश में कुल 339 केंद्रीय पीएसई हैं, जिनमें कुल निवेश 16,40,628 करोड़ रुपये है।

सरकार ने गैर रणनीतिक क्षेत्रों का पूरा मालिकाना छोडऩे की योजना बनाई है। लेकिन अब तक साफ नहीं हो पाया है कि ऐसा कब तक किया जाएगा। निजी क्षेत्र को आमंत्रित करने का इस समय कोई बहुत मतलब नहीं है। अर्थव्यवस्था के करीब सभी क्षेत्रों में पहले ही विदेशी कंपनियों सहित निजी क्षेत्र के बड़े कारोबारी मौजूद हैं। भारतीय रेलवे ने भी सैद्धांतिक तौर पर कुछ ट्रेनों को निजी कंपनियों द्वारा चलाए जाने को सहमति दे दी है और इसकी घोषणा पिछले बजट में की गई थी। मौजूदा संकट सरकार को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और एयर इंडिया जैसी कंपनियों के निजीकरण की योजना टालने पर मजबूर कर रहा है।

अप्रैल 2018 में सार्वजनिक उपक्रम विभाग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने विजन 2022 प्रस्तुत किया था, जिसकी झलक रविवार को वित्त मंत्री की घोषणा में नजर आती है।

इसके पहले रणनीतिक क्षेत्रों को औद्योगिक नीति के तहत परिभाषित किया गया था, जिसमें बाद के वर्षों में कई बदलाव किए गए। केंद्र के सार्वजनिक उपक्रमों (सीपीएसई) को रणनीतिक और गैर रणनीतिक के रूप में वर्गीकृत किया गया है। रणनीतिक सीपीएसई में पहले हथियार व आयुध व रक्षा क्षेत्र से जुड़ी सामग्री, रक्षा एयरक्राफ्ट व वारशिप, परमाणु ऊर्जा शामिल है। परमाणु ऊर्जा में परमाणु बिजली और रेडिएशन व रेडियो आइसोटोप, चिकित्सा को रणनीतिक क्षेत्र से बाहर रखा गया था। रेलवे को रणनीतिक क्षेत्र में रखा गया। इसके अलावा शेष सीपीएसई को गैर रणनीतिक माना गया है।

Keyword: Economic Package, Nirmala Sitharaman, PSE, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, पीएसई, रणनीतिक क्षेत्र,
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