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संक्रमण की दर घटी पर मामले बढ़े

रुचिका चित्रवंशी /  05 17, 2020

देश में लॉकडाउन का चौथा चरण शुरू होने जा रहा है और कोविड-19 मामले दोगुने होने की दर में सुधार देखा जा रहा है और अब 13 दिन में मामले दोगुने हो रहे हैं। हालांकि मामले कम होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं और महामारी विशेषज्ञों को आशंका है कि आने वाले दिनों में मामलों की तादाद में काफी तेजी देखी जा सकती है।

मई में हर दिन नए मामले सामने आते रहे और इनकी तादाद अप्रैल की तुलना में काफी अधिक रही है और आलम यह है कि संक्रमितों की कुल तादाद अब चीन से भी ज्यादा हो गई है। विशेषज्ञ इसके लिए लॉकडाउन में ढील देने, प्रवासी कामगारों की आवाजाही, जांच की तादाद ज्यादा बढऩे और ज्यादा मामले दर्ज किए जाने को जिम्मेदार ठहराते हैं ।

अप्रैल के अंतिम हफ्ते में नए मामलों की वृद्धि 1,400 से 1,900 के दायरे में थी। एक दिन में सबसे ज्यादा नए मामले दर्ज करने की तादाद मई में दर्ज की गई जो 4,000 से अधिक रही और रोजाना 3,000 से अधिक नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं। कई महामारी विशेषज्ञ संक्रमितों की बढ़ती संख्या की वजह से महामारी के जोखिमपूर्ण स्तर पर पहुंचने की वजह से आश्चर्यचकित हैं। विषाणु विज्ञानी और आईसीएमआर के पूर्व अध्यक्ष जैकब जॉन का कहना है, 'हमने पहले जो देखा है उसके मुकाबले महामारी काफी तेजी से बढ़ रही है। मामलों की तादाद में अतिरिक्त वृद्धि नहीं होगी लेकिन यह हर कुछ दिनों के अंतराल में दोगुना होगा। जब तक लोग रहेंगे उन्हें वायरस संक्रमित करता रहेगा।'

देश में इस वक्त मामले दोगुने होने की दर 13 दिन के आसपास है। विशेषज्ञों का कहना है कि मामलों के कम होने के लिए यह दर दो सप्ताह के करीब होनी चाहिए। कई लोगों को लगता है कि मौजूदा स्तर पर भारत में मामले कुछ कम हो सकते हैं लेकिन कुछ वैश्विक विशेषज्ञों यहां की संख्या को लेकर काफी चकित हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार दर गणना दोगुनी करने से यह माना जा रहा है कि मामले की वृद्धि दर स्थिर है। मिशिगन विश्वविद्यालय के महामारी विज्ञान की प्रोफेसर भ्रमर मुखर्जी ने कहा, 'भारत के आंकड़े मेरे अनुमान को मात दे रहे हैं। अप्रैल में वृद्धि दर धीमी हो रही थी लेकिन कर्व सपाट नहीं था और दर धीमी थी। मई की शुरुआत से ही यह थोड़ा तेजी से बढ़ रहा है।'

उनका कहना है कि मामले दोगुने होने के समय में बढ़ोतरी से यह संकेत भी मिलता है कि संक्रमण के प्रसार में कमी आ रही है अगर मामले दर्ज होने की दर में कोई बदलाव न आ रहा हो। वह कहती हैं, 'यह अंतिम वाक्यांश ही अहम है। मुझे लगता है कि यह भारत में बिल्कुल अलग है क्योंकि जांच और मामले के दर्ज कराने की प्रक्रिया में बदलाव के कारण विभिन्न अंतराल में मामले के दर्ज किए जाने की दर बिल्कुल समान नहीं है।' 

मिसाल के तौर पर 5 मई को जब एक ही दिन में भारत में 3,597 नए मामले सामने आए और 194 लोगों की मौत हो गई तब से मामले में तेजी के लिए पश्चिम बंगाल जैसे कुछ राज्यों में गलत रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।

देश भर में कोविड-19 का प्रसार एक समान नहीं है और कुछ राज्यों में बेहद गंभीर स्थिति दिख रही है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 30,000 मामले हैं, वहीं पिछले कुछ दिनों में तमिलनाडु में संक्रमण के मामलों में तेज वृद्धि देखी जा रही है, जहां एक सप्ताह से भी कम समय में संक्रमण के मामले दोगुने हो रहे हैं जो राष्ट्रीय औसत की तुलना में अधिक है। यह दक्षिणी राज्य जल्द ही कुल मामलों की तादाद के लिहाज से देश में कोविड-19 के मामले के पायदान में गुजरात को जल्द ही दूसरे स्थान के लिए पीछे छोड़ सकता है। देश में संक्रमण के कुल मामले 90,000 के आंकड़े को पार कर चुके हैं जो चीन से अधिक है। कोविड-19 के कारण देश में मरने वालों की कुल तादाद 2,872 हो गई है। ज्यादा जांच की वजह से भी संक्रमण के मामले बढ़ते नजर आ रहे हैं। देश में 17 मई तक 22 लाख से अधिक जांच की गई। सरकार ने जांच की क्षमता रोजाना 100,000 जांच तक बढ़ाई है।

राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी के मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी ई श्रीकुमार ने कहा, 'यह कोई अप्रत्याशित वृद्धि नहीं है। विभिन्न राज्यों के बीच काफी भिन्नता है लेकिन आखिरकार उन राज्यों में (जहां कम मामले हैं) भी मामले बढ़ेंगे लेकिन देरी होगी। इस  लॉकडाउन के समय का इस्तेमाल आगे की तैयारी में लगाना था।' 

हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी बात यह है कि ऐसे राज्यों में बड़े पैमाने पर संक्रमण का प्रसार नहीं होगा बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में छोटे समूहों में इसका प्रसार होने की संभावना है।

फिर भी, आने वाले दिनों में संक्रमितों की तादाद में ज्यादा वृद्धि होने की संभावना है और जुलाई-अगस्त में संक्रमण के मामले ज्यादा होंगे।

जॉन का कहना है, 'लॉकडाउन का तत्काल परिणाम यह रहा कि मामले में कमी आई। हालांकि देर से ही सही इसका फायदा मामले को सपाट करने में मिलना चाहिए। लेकिन पहला परिणाम मिले बिना आप दूसरे मामले पर विचार नहीं कर सकते हैं।'

उन्होंने कहा कि महामारी में वृद्धि इसके लिए उपलब्ध लोगों की संख्या के आनुपातिक है। जॉन ने कहा, 'हालात कैसे भी हों लेकिन एक हफ्ते से पहले इसका ज्यादा असर नहीं दिखेगा।'

जॉन ने कहा, 'इसे रोकने के लिए क्या किया जा सकता है? हम प्रक्रिया पर ध्यान देने के बजाय परिणाम पर ध्यान देना चाहिए। पहले के लॉकडाउन के वक्त ज्यादा सख्ती नहीं बरती गई और मास्क पहनना अनिवार्य नहीं किया गया था।'

महामारी विज्ञानी एक और पेचीदा सवाल के साथ जूझ रहे हैं आगामी मॉनसून के मौसम के लिए कोविड मामलों की भविष्यवाणी किस तरह की जाए?

यदि गर्मी की वजह से संक्रमण फैलने की दर में कमी आने की उम्मीद थी, तो मॉनसून में इसका उलटा होना चाहिए जब मौसम आद्र्र होगा और जब संक्रामक वायरस सतह पर ज्यादा समय तक बना रहेगा। श्रीकुमार ने कहा, 'हम नहीं जानते कि मॉनसून की शुरुआत के साथ कैसे जटिलता बढ़ेगी। अस्पताल में आमतौर पर मॉनसून के मौसम में बड़ी संख्या में मरीज आते हैं और डॉक्टर उनमें कोविड मरीजों को अलग करने के लिए जूझते रहेंगे।' उम्मीद है कि लॉकडाउन की अवधि में इस वायरस के बारे में मिली जानकारी और स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में बढ़ोतरी करने से संभवत: इस संकट से उबरने में मदद मिले।


24 घंटे में करीब 5 हजार मामले

देश में कोविड-19 के कारण बीते 24 घंटे में और 120 लोगों की मौत के साथ मरने वालों की तादाद बढ़कर 2,872 हो गई। इसी दौरान संक्रमण के 4,987 नए मामले सामने आए जिसके बाद रविवार सुबह कुल मामले बढ़कर 90,927 हो गए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि ये आंकड़े शनिवार सुबह आठ बजे से सामने आए हैं। मंत्रालय ने बताया कि देश में 53,946 मरीजों का इलाज चल रहा है और 34,108 मरीज ठीक हो चुके हैं और एक मरीज देश से बाहर चला गया। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'अब तक करीब 37.51 फीसदी मरीज ठीक हो चुके हैं।' तीन राज्यों में संक्रमण के 10,000 से अधिक मामले हैं जिनमें सर्वाधिक 30,706 मामले महाराष्ट्र में हैं। गुजरात में 10,988 मामले और तमिलनाडु में संक्रमण के 10,585 मामले हैं। संक्रमण के कुल मामलों में वे विदेशी नागरिक भी शामिल हैं जिनकी भारत में जांच हुई।

शनिवार सुबह आठ बजे से जिन 120 लोगों की मौत हुई है उनमें से 67 महाराष्ट्र में, 19 गुजरात में, 9 उत्तर प्रदेश में, 7 पश्चिम बंगाल में, छह दिल्ली में, चार मध्य प्रदेश में, तीन तमिलनाडु में, दो हरियाणा में और एक-एक मरीज की मौत आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान में हुई। कुल 2,872 मरीजों की देशभर में मौत हुई है जिनमें सर्वाधिक 1,135 लोगों की मौत महाराष्ट्र में हुई। गुजरात में 625 लोगों की, मध्य प्रदेश में 243 लोगों की, पश्चिम बंगाल में 232 लोगों की, दिल्ली में 129 लोगों की, राजस्थान में 126 मरीजों की, उत्तर प्रदेश में 104 लोगों की, तमिलनाडु में 74 मरीजों की और आंध्र प्रदेश में 49 लोगों की मौत हुई। संक्रमण से कर्नाटक में 36 लोगों की मौत हो चुकी है, तेलंगाना में 34 की, पंजाब में 32 की, हरियाणा में 13 की, जम्मू-कश्मीर में 12 लोगों की, बिहार में सात लोगों की और केरल में चार लोगों की मौत संक्रमण के कारण हुई। झारखंड, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा में तीन-तीन लोगों की मौत हुई है तथा असम में दो मरीजों की मौत हुई। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक मेघालय, उत्तराखंड और पुडुचेरी में कोविड-19 के एक-एक मरीज की मौत हुई। मंत्रालय के मुताबिक संक्रमण से मौत के 70 फीसदी  से अधिक मामलों में मरीज अन्य गंभीर बीमारियों से भी ग्रस्त से थे।  रविवार सुबह अपडेट किए गए डेटा के मुताबिक देश में संक्रमण के सर्वाधिक 30,706 मामले महाराष्ट्र में, 10,988 मामले गुजरात में, 10,585 मामले तमिलनाडु में, 9,333 मामले दिल्ली में, 4,960 मामले हैं।     भाषा

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