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आरबीआई की सख्ती से एआईएफ की चिंता बढ़ी

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई May 16, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने यह सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक निवेश फंडों (एआईएफ) पर सख्ती बढ़ा दी है कि क्या उनके ताजा लेनदेन नए प्रेस नोट 3 (पीएन3) के अनुरूप थे। इस घटनाक्रम से जुड़े दो लोगों ने आरबीआई के इस कदम की जानकारी दी है।

विदेशी निवेश प्राप्त करने वाले एआईएफ को यूनिट जारी करने की तारीख से 30 दिन के अंदर फॉर्म इनवी सौंपने की जरूरत है। आरबीआई ने देर से मिलने वाले ऐसे फॉर्म को ठुकरा दिया है और यह स्पष्टीकरण मांगा है कि ये सौदे ताजा अधिसूचना के अनुरूप हैं।

इससे इसे लेकर चिंता बढ़ गई है कि पीएन2 का दायरा (जो अब तक सिर्फ एफडीआई के लिए लागू है) एआईएफ (घरेलू और विदेशी दोनों) के लिए भी बढ़ सकता है  और इससे फॉलो-ऑन या ताजा निवेश के लिए चीन के लिमिटेड पार्टनरों (एलपी) से कोष को आकर्षित करने से बचाया जा सकता है।

चूंकि एआईएफ अपनी पूंजी 3-5 साल के लिए हासिल करते हैं, इसलिए नए निवेशक तलाशना उनके लिए बड़ी चुनौती हो सकती है और चीनी एलपी आगामी निवेश से निकाल सकते हैं। खेतान ऐंड कंपनी में कॉरपोरेट एवं एमऐंडए पार्टनर अतुल पांडे ने कहा, 'यह स्पष्ट नहीं है कि क्या आरबीआई एआईएफ से सामान्य स्पष्टीकरण मांग रहा है या वह यह सुनिश्चित लगाने के लिए लाभार्थी स्वामित्व जानकारी चाहता है तो क्या फंड को मंजूरी मार्ग से गुजरने की जरूरत होगी।'

उन्होंने कहा, 'फेमा अधिसूचना की भाषा के संदर्भ में और जब तक कोई स्पष्टीकरण जारी नहीं हो जाता, विदेशी निवेश की विभिन्न श्रेणियां (एआईएफ, एफवीसीआई, एफपीआई और डेट निवेश शामिल) प्रेस नोट 3 के दायरे में नहीं आनी चाहिए।'

कानूनी तौर पर, एआईएफ को नॉन-डेट इंस्ट्रूमेंट नियमों के अलग 'शेड्यूल 8' के तहत शामिल किया ग या है और इसलिए कोई प्रत्यक्ष निवेश पीएन3 के दायरे से बाहर है।

निशीथ देसाई एसोसिएट्स में पार्टनर प्रतिभा जैन के अनुसार, आरबीआई से विपरीत रुख की वजह से खासकर घरेलू फंडों को कम्पाउंडिंग या ट्रांजेक्शन को समाप्त करने को कहा जा सकता है। एआईएफ द्वारा घरेलू स्वामित्व और नियंत्रित निवेश को विदेशी निवेश के तौर पर नहीं समझा गया है, भले ही रकम विदेश से प्राप्त हुई हो।

गेटवे हाउस थिंकटैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार चीन के प्रौद्योगिकी निवेशकों ने भारतीय स्टार्ट-अपों में लगभग 4 अरब डॉलर की पूंजी लगाई है, जिसमें ज्यादातर निवेश अलीबाबा और टेनसेंट जैसी वीसी या टेक फर्मों द्वारा किया गया है। स्टार्ट-अपों और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी में निवेश के लिए उनके बढ़ते रुझान को देखते हुए, वीसी या नए एआईएफ आरबीआई के कदम से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। कई भारतीय वीसी फाइनैंसर अमीर व्यक्ति या पारिवारिक व्यावसायिक घराने हैं और वे स्टार्ट-अप के वित्त पोषण के लिए जरूरी 10 करोड़ डॉलर की प्रतिबद्घता नहीं कर सकते।

विश्लेषकों का मानना है कि मंजूरी लेने की प्रक्रिया में 3 महीने से एक साल का समय लग सकता है। थिंकिंग लीगल की संस्थापक वनीसा अग्रवाल ने कहा, 'भले ही ऐसे एआईएफ के पास सीमावर्ती देश से एक निवेशक हो, उन्हें भारतीय कंपनियों में निवेश से पहले मंजूरी लेने की जरूरत होगी।'

मौजूदा निवेश के स्वामित्व को लेकर भी अनिश्चितता है। 10 करोड़ डॉलर की पूंजी प्रतिबद्घता के लिए, सामान्य भागीदार (जीपी) शुरू में 2 करोड़ डॉलर का निवेश करना चाहेगा। यदि पांच निवेशक हों तो जीपी प्रत्येक से 40 लाख डॉलर हासिल करेगा। ऐसे में क्या प्रत्येक रकम प्राप्ति को नया निवेश समझा जाएगा या फिर पूरी पूंजी प्रतिबद्घता नए नियम से छूट के दायरे में होगी?

एआईएफ द्वारा निवेश दिसंबर 2019 तिमाही तक बढ़कर 1.4 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले की अवधि के मुकाबले परिसंपत्तियों में 53 प्रतिशत की वृद्घि है।

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