बिजनेस स्टैंडर्ड - केंद्रीय बैंकों पर सोना बेचने का दबाव
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केंद्रीय बैंकों पर सोना बेचने का दबाव

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली 05 16, 2020

कोविड-19 संक्रमण के बाद दुनिया सहित भारत की अर्थव्यवस्था का गणित भी बिगड़ गया है। मौजदा हालात के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ऊपर सोना बेचने का दबाव बढ़ सकता है। जेफरीज में ग्लोबल हेड, इक्विटी स्ट्रैटेजी, क्रिस्टोफर वुड ने निवेशकों के नाम लिखी साप्ताहिक टिप्पणी 'ग्रीड ऐंड फियर' में यह आशंका जताई है।

वुड ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के कारण दुनिया के तमाम देशों की वित्तीय हालत काफी तंग हो गई है, जिसके बाद हालात संभालने के लिए इन देशोंं के केंद्रीय बैंकों को सोना बेचने का विकल्प आजमाना पड़ सकता है। वुड के अनुसार भारत में सोने का विशाल भंडार है और इस वजह से इसकी बिकवाली का जोखिम अधिक है। उन्होंने कहा,'सऊदी अरब में भी बड़े पैमाने पर सोने की बिकवाली की जा सकती है। वहां वित्तीय दबाव बढऩे से मूल्य वद्र्धित कर (वैट) तीन गुना बढ़कर 15 प्रतिशत तक पहुंच गया है और जीवन यापन लागत से जुड़ा अनुदान निलंबित कर दिया गया है।'

वुड का मानना है कि सोने की कीमतें तत्काल 1800-1900 डॉलर का स्तर पार नहीं करेंगी। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में मार्च 202 0 के अंत में सोने का आधिकारिक भंडार 653 टन था। सऊदी अरब में अनुमानित 323 टन सोने का अनुमानित भंडार है। 

बैंकिंग शेयरों से नहीं उम्मीदें

आर्थिक गतिविधियां थमने के बीच नकदी की उपलब्धता बढ़ाने का दबाव भारत सहित दुनिया के लगभग सभी देशों की बैंकिंग प्रणाली पर बढ़ गया है। भारत के संदर्भ में देखें तो आरबीआई ने सभी बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों को सावधि ऋणों की किस्तें 31 मई तक टालने का निर्देश दिया है और माना जा रहा है कि यह समय सीमा और बढ़ाई जा सकती है। वुड के अनुसार इन हालात में बैंकों पर दबाव बढ़ गया है और इसकी इनके शेयरों में भी दिखने लगा है। वुड ने कहा कि इससे बैंकिंग क्षेत्र के शेयर आने वाले समय में दबाव में रह सकते हैं। अपने एशिया-प्रशांत पोर्टफोलियो (जापान को छोड़कर) में वुड ने कोटक बैंक के शेयर से निकासी की और उसकी जगह मारुति सुजूकी में निवेश किया।

वुड ने कहा, 'ऋण भुगतान पर अस्थायी रोक से बैंकों पर दबाव भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में बैंकिंग शेयरों की हालत खराब रह सकती है।' हालांकि वुड तेल क्षेत्र के शेयरों को लेकर खासे उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र अत्यंत गंभीर परिस्थितियों को पीछे छोड़ चुका है और उनके अनुसार वाहन शेयरों पर भी दांव खेला जा सकता है।

तेल एवं वाहन छोड़कर वह भारतीय रियल एस्टेट को लेकर भी उत्साहित हैं। वुड के अनुसार गोदरेज प्रॉपर्टीज और डीएलएफ इस क्षेत्र के सूचीबद्ध शेयरों में सबसे अच्छे दांव साबित हो सकते हैं। उन्होंने लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखने की क्षमता रखने वाले निवेशकों को इन दोनों शेयरों में निवेश बरकरार रखने की सलाह दी।

वुड ने कहा, भारतीय आवासीय परिसंपत्ति बाजार में गिरावट एक तरह का ग्रिड ऐंड फियर है, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया था और यह कुछ अलग बयां कर रहा है क्योंकि इसे कई नीतिगत झटके लगे हैं और उसका ताजा उदाहरण लॉकडाउन है। अभी आवासीय परिसंपत्तियों में सात वर्षीय गिरावट देखने को मिली है, वहीं अफोर्डेबिलिटी 20 साल के स्तर पर है। मॉर्गेज भुगतान और सालाना आय का अनुपात वित्त वर्ष 2012 के 49 फीसदी से घटकर इस वित्त वर्ष में अनुमानित तौर पर 26 फीसदी रह गया है। साथ ही मॉर्गेज की दर भी इस अवधि में 350 आधार अंक घटकर 7.5 फीसदी रह गई है। डीएलएफ अब ग्रिड ऐंड फियर के एशिया (जापान को छोड़कर) लॉन्ग पोर्टफोलियो का हिस्सा है, वहीं गोदरेज प्रॉपर्टीज दिसंबर 2019 में हटाए जाने तक तीन साल तक पोर्टफोलियो का हिस्सा रहा था।

 

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