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विपणन सुधारों से कृषि उद्योग में आएगा भारी निवेश

राजेश भयानी / मुंबई May 16, 2020

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों को अपनी इच्छा के मुताबिक उत्पाद बेचने की छूट देने के लिए केंद्रीय कानून लागू करने की घोषणा की है, जिससे किसान आकर्षक दाम पर अपने उत्पाद बेच सकेंगे और कृषि उत्पादों का एक राज्य से दूसरे राज्य में बाधारहित कारोबार हो सकेगा। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की राह सुनिश्चित हो सकेगी।

इस समय राज्य सरकारों के अधिनियम के मुताबिक एपीएमसी के  माध्यम से कारोबार होता है और यह राजनीतिक नियंत्रण वाला क्षेत्र है।

आईटीसी लिमिटेड के चेयरमैन संजीव पुरी ने कहा, 'आवश्यक जिंस अधिनियम में संधोशन, कृषि विपणन में सुधार और अनुमानित मूल्य के माध्यम से जोखिम कम होने से किसानों को ताकत मिलेगी, खाद्य प्रसंस्करण लिंकेज मजबूत होगा और मांग आधारित मूल्यवर्धित कृषि को बढ़ावा मिलेगा। इन सुधारों से खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और बुनियादी ढांचे पर निवेश बढ़ेगा। इससे प्रतिस्पर्धी कृषि मूल्य शृंखला तैयार होगी, बर्बादी कम होगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी।' 

किसानों को कृषि उत्पाद मंडी समिति के माध्यम से अपने उत्पादों की अनिवार्यता खत्म होने से उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।  उत्पादों को मंडी तक लाना, उन्हें बिचौलियों को कम दाम पर बेचने से केवल उनकी लागत में बढ़ोतरी होती है। अगर यह प्रतिबंध हटा लिए जाते हैं तो प्रसंस्करण उद्योग खराब होने वाले कृषि उत्पादों के भी बेहतर दाम पर खरीदने को तैयार होंगे। बिचौलियों को दोनों को जोडऩे का काम मिलेगा, लेकिन किसान को बेहतर दाम पाने का मौका मिलेगा। अभी राज्य सरकारें एपीएमसी ऐक्ट से श्रेणी के मुताबिक किसानों को कुछ छूट देती हैं।

श्री रेणुका शुगर्स के कार्यकारी चेयरमैन और सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (भारत में तेल कारोबार का शीर्ष संगठन) के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने कहा, 'एपीएमसी की वजह से इस समय एक देश एक कर लागू नहीं किया जा सकता है। इसकी वजह यह है कि एक एपीएमसी का कारोबारी दूसरे एपीएमसी के कारोबारी को माल बेचता है, जहां दोनों राज्य मंडी शुल्क लेते हैं। केंद्र का कानून बाधारहित एक राज्य से दूसरे राज्य में कारोबार सुनिश्चित करेगा। इसकी मांग खाद्य तेल के कारोबारी लंबे समय से कर रहे थे कि वे तेल प्रसंस्करणकर्ताओं को किसानों से सीधे खरीद  की सुविधा दी जाए। यह पूरे कृषि प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए बहुप्रतीक्षित सुधार है।'

बहरहाल इसे लेकर लंबी बहस चल रही है कि क्या केंद्र सरकार कृषि विपणन को नियमित कर सकती है? कृषि कारोबार के जाने माने विशेषज्ञ और वकील विजय सरदाना का कहना है कि 'भारतीय संविधान के अध्याय 13 में केंद्र को कृषि कारोबार के नियमन की स्वंतत्रता दी गई है क्योंकि कृषि राज्य का विषय है, न कि कृषि कारोबार। लेकिन इसकी हमेशा गलत तरीके से व्याख्या की गई।'

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