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तीसरे प्रोत्साहन में खेती-किसानी पर जोर

संजीव मुखर्जी और इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली May 15, 2020

सरकार ने किसानों के उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए अधिनियम में बदलाव की बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा करने की घोषणा की है। लेकिन इस पहल से राज्यों के साथ विवाद होने का जोखिम है। आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन करने, कृषि उत्पादों की सुगम आवाजाही के लिए अंतरराज्यीय सीमाओं को खत्म करने के लिए नया कानून लाने और अनुबंध कृषि के लिए कानूनी प्रारूप की घोषणा की है। केंद्र को अब इस बदलावों को लागू करने के लिए संसद के मॉनसून सत्र का इंतजार करना होगा या फिर अध्यादेश लाना होगा।

केंद्र ने पहली बार ऐसा कानून बनाने का निर्णय किया है जिससे कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) से बाहर किसानों से सीधे उपज खरीदने की अनुमति होगी। इससे इस तरह की खरीद-बिक्री में राज्य की भूमिका सीमित होगी।

इस मकसद के लिए सरकार संविधान के तहत प्रदत्त अंतर-राज्यीय व्यापार और निर्दिष्ट वस्तुओं का अंतर-राज्यीय व्यापार के लिए संघ की सूची और समवर्ती सूची में मिले अधिकारों का उपयोग किया गया है।

इस अधिनियम की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत किया गया है। इससे व्यापारी देश में कहीं भी सीधे किसानों से उपज खरीदने में सक्षम होंगी। इससे अंतर-राज्यीस व्यापार की सीमा खत्म होगी और सरकार के इलेक्ट्रॉनिक- राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) कार्यक्रम को बढ़ावा मिलेगा।

ई-नाम का अब तक अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा था क्योंकि इस प्लेटफॉर्म के तहत बेची जाने वाली वस्तुओं का मुक्त अंतर-राज्यीय व्यापार की अनुमति नहीं दी गई थी। केंद्र का यह अधिनियम भाजपा शासित मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों द्वारा हाल में एपीएमसी में किए गए संशोधन का सामंजस्य है। इसके तहत बड़े रिटेलरों और कंपनियों को मध्यस्थ के पास गए बिना किसानों से सीधे खरीद की व्यवस्था की गई है। हालिया बदलावों के तहत राज्यों ने निजी मंडियां स्थापित करने, प्रसंस्करणकर्ताओं द्वारा सीधे खरीद करने राज्य भर में कहीं भी एकल लाइसेंस के जरिये व्यापार करने की अनुमति दी गई है।

हालांकि कई आलोचकों का कहना है कि इसके जरिये राज्य के कानूनों को दरकिनार किया गया है जिससे संघीय ढंाचे को लेकर कई समस्याएं खड़ी हो सकती हैं क्योंकि इससे राज्यों का अधिकार केवल मंडियों तक सीमित कर दिया गया है। आईआईएम-अहमदाबाद के सेंटर फॉम मैनेजमेंट ऑफ एग्रीकल्चर के चेयरपर्सन सुकल्प सिंह ने कहा, 'अब तक एपीएमसी अधिसूचित मंडियों को अपने परिसर या निर्दिष्ट इलाके में अधिसूचित उत्पादों को बेचना आवश्यक है। लेकिन केंद्र की नई पहल से एपीएमसी के बाहर होने वाला कारोबार केंद्रीय कानून के तहत आ सकता है।'

उन्होंने कहा कि अगर सुधारों से किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं तो ये अच्छे हैं। मगर निर्धारित एपीएमसी (मंडी) से बाहर होने वाले कारोबार में राज्यों की भूमिका खत्म किए जाने से कानूनी अड़चनें पैदा हो सकती हैं। सिंह ने कहा, 'अगर ऐसे बड़े बदलावों के बारे में विचार किया जा रहा है तो कृषि को राज्यों का विषय रखने की कहां जरूरत है।'

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने साफ किया कि मंडियों में पहले की तरह कामकाज होता रहेगा। मगर नया कानून बनने से कंपनियां मंडियों के बाहर भी खरीदारी कर पाएंगी। इस कानून के तहत उन कंपनियों के लिए खरीद के नियम बनाए जाएंगे और उन्हें नियंत्रित किया जाएगा। इससे किसानों को अपनी उपज की उचित कीमत मिल सकेगी और बिक्री का एक नया विकल्प मिलेगा। सीतारमण ने जिस दूसरे महत्त्वपूर्ण सुधार की घोषणा की, वह आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में संशोधन है ताकि खाद्यान्न, खाद्य तेलों, तिलहनों, दलहनों, प्याज, आलू जैसी खाद्य वस्तुओं को इसके दायरे से पूरी तरह बाहर किया जा सके। वित्त मंत्री ने अपनी प्रस्तुति में कहा, 'भंडारण सीमा जैसे उपायों को राष्ट्रीय आपदा, अकाल जैसे विकट हालात में कीमत बढऩे की स्थिति में ही लागू करने की मंजूरी दी जाएगी।' हालांकि बहुत से वर्षों से वजूद में बना आवश्यक वस्तु अधिनियम खुद की ही छाया मात्र रह गया है क्योंकि अब इसके दायरे में बहुत कम वस्तुएं रह गई हैं। इस घोषणा के बाद बची हुई वस्तुएं भी अधिनियम का हिस्सा नहीं रहेंगी। वित्त मंत्री ने अनुबंधित कृषि के लिए केंद्रीय कानून के रूप में तीसरे सुधार की घोषणा की। इस कानून को राज्यों में लागू किया जा सकेगा। अभी अनुबंध कृषि पर एक मॉडल अधिनियम है, लेकिन बहुत कम राज्यों ने इसे पूरी तरह लागू किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'इस वजह से अनुबंध कृषि के लिए एक केंद्रीय कानून बनाने की जरूरत महसूस की गई क्योंकि राज्य पूरे मनोयोग से मॉडल अधिनियम को लागू नहीं कर रहे थे।' सीतारमण ने कहा कि नया कानूनी ढांचा इसलिए बनाया जाएगा ताकि किसान उचित एवं पारदर्शी तरीके से प्रसंस्करणकर्ताओं, एग्रीगेटरों, बड़े खुदरा विक्रेताओं, निर्यातकों आदि से जुड़ सकें।

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