बिजनेस स्टैंडर्ड - प्रवासी श्रमिकों को और मदद की जरूरत
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प्रवासी श्रमिकों को और मदद की जरूरत

सोमेश झा / नई दिल्ली May 15, 2020

केंद्र सरकार ने गुरुवार को प्रवासी श्रमिकों के लिए कुछ उपायों की घोषणा की, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को प्रवासी श्रमिकों का ख्याल रखने के लिए और अधिक कदम उठाने चाहिए।

विशेषज्ञों ने कहा कि अधिक सहायता की आवश्यकता वाले प्रवासी श्रमिक दो प्रकार के हैं, पहला वे जो अपने गृह राज्य वापस लौट गए हैं तथा नौकरियां तलाश रहे हैं और दूसरे वे, जो अभी भी आय तथा संसाधनों की कमी के साथ शहरों में फंसे हुए हैं।

वकील तथा सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने कहा, 'कोविड-19 संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाया गया कदम एक मामूली मदद होगी। प्रवासी श्रमिकों को तत्काल राहत की जरूरत है। सरकार ने न्यूनतम बुनियादी आय की गारंटी देने की कोई घोषणा नहीं की, जो समय की जरूरत है।' मार्च में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही भारद्वाज प्रवासी श्रमिकों की मदद कर रही हैं और हाल ही में उन्होंने  सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर के साथ मिलकर उच्चतम न्यायालय में गुहार लगाई है कि सभी प्रवासी श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी भुगतान के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारों को निर्देश जारी किए जाएं।

भारद्वाज ने सुझाव दिया कि सरकार को जरूरतमंदों को लक्षित आधार के बजाय खाद्यान्न के वितरण को सार्वभौमिक बनाना चाहिए क्योंकि हालिया मॉडल से समाज का एक हिस्सा इससे दूर रह सकता है।

ऐसे प्रवासी जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के दायरे में नहीं आते हैं या किसी भी राज्य सरकार की योजनाओं के लाभार्थी नहीं हैं, उन्हें एक महीने में पांच किलोग्राम अनाज और एक किलो चना प्रति परिवार प्रदान किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को एक संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की कि यह लाभ 8 करोड़ प्रवासियों को दिया जाएगा और वे दो महीने तक इसका लाभ उठा सकते हैं। भारद्वाज ने कहा, 'केंद्र 8 करोड़ के आंकड़े पर कैसे पहुंच गया? इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए प्रवासी के रूप में किसे माना जाएगा? हमें अधिक स्पष्टता आने तक इंतजार करना होगा।'

सीतारमण ने कहा कि सरकार विनिर्माण इकाइयों, उद्योगों, संस्थानों और संघों को अपनी निजी भूमि पर किफायती किराये के आवास परिसर विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। यह प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से किया जाएगा।

एक्सएलआरआई जमशेदपुर में प्रोफेसर तथा श्रम-अर्थशास्त्री केआर श्याम सुंदर ने बताया कि 1979 के अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिक अधिनियम में पहले से ही एक प्रावधान है, जिसके तहत प्रत्येक ठेकेदार को प्रवासी श्रमिकों के लिए उपयुक्त आवासीय सुविधा प्रदान करनी होगी। लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों में घर का किराया देना तथा उनके रहने के लिए उचित सुविधाएं न होना थीं।

 
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