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बाजार-केंद्रित ऋणपत्रों से एचएनआई को परहेज

ऐश्ली कुटिन्हो / ऐश्ली कुटिन्हो May 15, 2020

अमीर निवेशक (एचएनआई) ऐसे अनिश्चित आर्थिक परिवेश में गैर-तरलता वाले निवेश से परहेज कर रहे हैं, जब नकदी और तरलता मजबूत बनी हुई है।

पिछले दो वर्षों में मजबूत लोकप्रियता हासिल कर चुके बाजार-केंद्रित डिबेंचर (एमएलडी) और क्रेडिट रिस्क फंडों में कोविड-19 महामारी शुरू होने के बाद भारी गिरावट आई है।

एमएलडी क्लोज-एंडेड संरचना वाली योजनाएं हैं और ये डेट या इक्विटी आधारित हैं। ये योजनाएं दो तीन साल की लॉक-इन अवधि से जुड़ी होती हैं। इनमें निवेशकों का भुगतान फिक्स्ड कूपन या भागीदारी दर के स्वरूप में हो सकता है। डेट एमएलडी अक्सर 7-11 प्रतिशत की कूपन दर भुगतान करते हैं।

पिछले साल केयर रेटिंग्स की रिपोर्ट में एमएलडी निर्गमों के वित्त वर्ष 2019 के के 12,246 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़कर 17,000 करोड़ रुपये पर पहुंच जाने की संभावना जताई गई थी। 20 जून, 2019 को प्रिंसिपल प्रोटेक्टेड-एमएलडी के लिए कुल कारोबार बढ़कर 45,000 करोड़ रुपये हो गया जो वित्त वर्ष 2019 के अंत में 37,000 करोड़ रुपये था।

हालांकि इनमें से ज्यादातर योजनाओं को पूंजी संरक्षण के अनुकूल समझा जाता है, लेकिन जारीकर्ता के डिफॉल्ट होने का जोखिम भी पिछले कुछ महीनों में कई गुना बढ़ा है।

क्लाइंट एसोसिएट्स के सह-संस्थापक रोहित सरीन ने कहा, 'निवेशकों को विविधता का लाभ नहीं मिलता है और उन्हें एकल जारीकर्ता के जोखिम का सामना करना पड़ता है। यह मौजूदा परिवेश में चुनौतीपूर्ण हो सकता है।'

इन्हें जारी करने वाली कंपनियों में मुख्य तौर पर एए या इससे कम रेटिंग की एनबीएफसी होती हैं और इससे चूक का ज्यादा जोखिम रहता है। उदाहरण के लिए, एडलवाइस और रिलायंस कैपिटल इक्विटी-आधारित ऋणपत्र जारी करने वाली दो प्रमुख कंपनियां थीं। सूत्रों के अनुसार, जहां एडलवाइस को भुगतान पर चूक का सामना करना पड़ा, वहीं रिलायंस कैपिटल को क्रेडिट वॉच को लेकर सख्ती से जूझना पड़ा। आईसीआरए ने इस महीने एडलवाइस समूह कंपनियों की कई बार रेटिंग में कमी की।

वैलिडस वेल्थ के सीईओ अतुल सिंह का कहना है, 'आपको अच्छी रेटिंग वाली कंपनी के ऋणपत्र में निवेश करने की जरूरत होगी अन्यथा आप संबद्घ कंपनी के दिवालिया होने की स्थिति में अपनी पूंजी गंवा सकते हैं।' सिंह का कहना है कि कुछ अच्छी एनबीएफसी अभी भी डेट एमएलडी जारी कर पैसा जुटाने में सफल हो सकती हैं।

कम रेटिंग के पत्रों में निवेश कर ऊंचा प्रतिफल हासिल करने वाले क्रेडिट-रिक्स फंडों को भी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। फ्रैंकलिन टेम्पलटन द्वारा अपनी 6 डेट योजनाएं बंद किए जाने के बाद इन फंडों ने अप्रैल में 19,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी दर्ज की।

बड़ी तादाद में वैकल्पिक निवेश फंडों (एआईएफ) ने डेट सेगमेंट पर भी ध्यान दिया है और ज्यादा प्रतिफल की उम्मीद में पिछले साल उन्होंने क्रेडिट-आधारित फंडों को भी पेश किया था। जानकारों का कहना है कि इन नई पेशकशों के लिए भी मांग आने वाले समय में धीमी रहने की आशंका है।

लैडरअप वेल्थ के प्रबंध निदेशक राघवेंद्र नाथ ने कहा, 'कुछ एआईएफ ऊंचे प्रतिफल वाले पत्रों पर केंद्रित हैं, वे 15-16 प्रतिशत के आईआरआर का वादा कर रहे हैं और अक्सर मझोले आकार की कंपनियों में निवेश करते हैं। इन्हें अब कम निवेशक मिलेंगे।'

निजी इक्विटी और उद्यम पूंजी फंडों में निवेश अपनी चमक खो चुका है। एलपी, एचएनआई समेत सभी प्रभावित हुई हैं, क्योंकि इक्विटी और निर्धारित आय योजनाओं में निवेश घटा है।

ईवाई इंडिया में प्राइवेट इक्विटी सर्विसेज के पार्टनर एवं नैशनल लीडर विवेक सोनी का कहना है, 'चूंकि वीसी और प्रमुख फंड निवेश लंबी अवधि के होते हैं और वे गैर-तरलता वाले होते हैं, वहीं एचएनआई अपनी शेयरधारिता नहीं घटा सकता है हालांकि इसके बजाय वे नए निवेश को लेकर निर्णय नहीं ले सकते हैं।'

2019 में भारतीय पीई/वीसी निवेश 48 अरब डॉलर की सर्वाधिक ऊंचाई पर पहुंच गया था।

 

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