बिजनेस स्टैंडर्ड - 200 करोड़ रुपये से नीचे का सरकारी टेंडर हुआ स्थानीय
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200 करोड़ रुपये से नीचे का सरकारी टेंडर हुआ स्थानीय

ज्योति मुकुल / नई दिल्ली May 14, 2020

केंद्र सरकार किसी भी विदेशी आपूर्तिकर्ता से 200 करोड़ रुपये से कम मूल्य की वस्तु एवं सेवाओंं की खरीद नहीं करेगी। इसके लिए वैश्विक टेंडर की पूछताछ को रोकने के लिए जनरल फाइनैंशियल रूल्स (जीएफआर) में संशोधन किया जाएगा। यह कवायद सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों की रक्षा के लिए की जा रही है, जिससे कि उनकी वस्तुओं व सेवाओं की मांग पैदा की जा सके।

मई 2019 में संशोधित खरीद के मौजूदा दिशानिर्देशों के मुताबिक सरकारी एजेंसियों को सिर्फ 50 लाख रुपये से कम की वस्तुओं व सेवाओं को खरीदने की जरूरत थी। सरकार के विभागों को ऊपरी सीमा बढ़ाने की छूट दी गई है। छूट केवल उसी स्थिति में मिल सकती है, जब वह गुणवत्ता या विशेष चीज स्थानीय आपूर्तिकर्ता के पास उपलब्ध नहीं है।

राजग सरकार ने भारत के उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए सार्वजनिक खरीद (मेक इन इंडिया को तरजीह) आदेश जारी किया था। खरीद तरजीह नीति के तहत अगर सरकारक अगर गैर भारतीय कंपनी से सरकार को न्यूनतम या बेहतर बोली मिलती है तो कांट्रैक्ट मूल्य का सिर्फ आधा ही आवंटित किया जाएगा। भारत की कंपनियों में सबसे कम बोली लगाने वाले को शेष 50 प्रतिशत ठेका दिया जाएगा।

केंद्र सरकार एक पोर्टल भी चलाती है, जिसे गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस नाम दिया गया है। इसमें सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों खासकर अनुसूचित जाति व जनजाति के उद्यमियों को अपने उत्पाद बेचने की अनुमति दी है। इसमें सरकार के विभागों को 25 प्रतिशत माल एमएसएमईज्ञ् से और 4 प्रतिशत वस्तु एवं सेवाएं एससी और एसटी समुदाय के एमएसएमई से लेने का अनिवार्य लक्ष्य है।

जीईएम वेबसाइट के मुताबिक करीब 3,19,000 विक्रेताओं ने जीईएम में पंजीकरण किया है। कुल 38,905 करोड़ रुपये के सकल कारोबार  मूल्य में से 68,286 एमएसएमई विक्रेताओं ने 20,263 करोड़ रुपये का माल जीईएम के माध्यम से बेचा है। जीएफआर 1963 में लाया गया था, जिसमें 2005 में और 2017 में वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने संशोधन किया।

Keyword: GFR, Tender, Economic Package, Mini Budget, प्रोत्साहन पैकेज, मिनी बजट, सरकारी टेंडर, विदेशी आपूर्तिकर्ता,
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