बिजनेस स्टैंडर्ड - बिजली वितरण में आएगी जान
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बिजली वितरण में आएगी जान

श्रेया जय / नई दिल्ली May 14, 2020

वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए अपने 15 सूत्री कार्यक्रम में बीमार चल रहे बिजली वितरण क्षेत्र के लिए एक विशेष नकदी प्रवाह योजना की घोषणा की है। केंद्र को सरकारी स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) में करीब 90,000 करोड़ रुपये डाले जाने की उमीद है। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस ऋण योजना में कई प्रावधान-शर्तें भी शामिल रहेंगी।

वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में कहा है कि पावर फाइनैंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी) डिस्कॉम में दो बराबर किस्तों में 90,000 करोड़ रुपये तक की नकदी डालेंगे। डिस्कॉम द्वारा इस राशि का उपयोग पारेषण और बिजली तैयार करने वाली कंपनियों को उनके बकाया भुगतान के लिए किया जाएगा।

पीएफसी और आरईसी बिजली क्षेत्र के गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान (एनबीएफसी) हैं। दिसंबर 2019 तक डिस्कॉम का कुल राष्ट्रीय तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान (एटीऐंडसी) या (अक्षम प्रणाली के कारण बिजली आपूर्ति में घाटा) 20.8 प्रतिशत था और इसका वित्तीय घाटा 18,316 करोड़ रुपये था। इससे डिस्कॉम की बिजली तैयार करने और पारेषण करने वाली कंपनियों की भुगतान क्षमता प्रभावित हुई है।

इस साल फरवरी में डिस्कॉम का बिजली तैयार करने वाली कंपनियों का बकाया 92,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इस अखबार ने हाल ही में रिपोर्ट दी थी कि केंद्र अपनी बकाया राशि का निपटान करने के लिए डिस्कॉम के वास्ते एक योजना तैयार कर रहा है। हालांकि इस योजना में कई प्रावधान और शर्तें शामिल रहेंगी।

वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने कहा कि डिस्कॉम के पिछले सुधारात्मक उपायों से उलट यह योजना स्वैच्छिक है। एक अधिकारी ने कहा कि यह एक विशेष ऋण है, किसी प्रकार का अंशदान नहीं है। जिन डिस्कॉम के पास उधारी के ऐवज में सरकारी गारंटी है और वे मानदंडों को पूरा कर रही हैं तो उनका ऋण बढ़ा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना की रूपरेखा अब भी तैयार की जा रही है।

अंतिम डिस्कॉम सुधार योजना - उदय वर्ष 2017 में शुरू की गई थी जो पिछले वित्त वर्ष में संपन्न हुई है। इसका उद्देश्य डिस्कॉम के वित्तीय और परिचालन का पुनर्गठन करना था। बॉन्ड जारी करके अपनी बैलेंस-शीट से कर्ज खत्म करने के बाद अधिकांश डिस्कॉम फिर से आर्थिक नुकसान उठा रही हैं। ऐसा ज्यादातर लागत मूल्य अनुपात और अकुशल सब्सिडी प्रणाली के कारण है। इसके अलावा कई डिस्कॉम ने अपना परिचालन घाटा कम करने को लेकर सुधार नहीं किया है।

 
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