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रिलायंस इंडस्ट्रीज का राइट्स इश्यू : कॉल ऑप्शन पर अनिश्चितता

समी मोडक और अमृता पिल्लई / मुंबई 05 13, 2020

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के 53,125 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू के लिए 'कॉल ऑप्शन' को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। भले ही इस सौदे को भारत की सबसे बड़ी इक्विटी कोष उगाही के तौर पर समझा जा रहा हो, लेकिन आरंभिक कोष उगाही सिर्फ 13,250 करोड़ रुपये ही रहेगी, क्योंकि इस बारे में कोई समय-सीमा तय नहीं है कि शेयरधारकों को कब तक बकाया 40,000 करोड़ रुपये का निवेश करने को कहा जाएगा।

किसी अन्य राइट्स इश्यू के विपरीत, आरआईएल द्वारा जारी 42.26 करोड़ नए शेयर आंशिक रूप से भुगतान से जुड़े होंगे और प्रति शेयर 1,257 रुपये दो या इससे ज्यादा चरण में आएंगे।

कंपनी ने एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कहा है कि शेयरधारकों को 14 मई को शुरू में सिर्फ 314.25 रुपये प्रति शेयर का भुगतान करना होगा और प्रति 2.5 रुपये की फेस वैल्यू के साथ आंशिक भुगतान होगा। शेष 942.75 रुपये प्रति शेयर का भुगतान बाद में एक या दो बार में (बोर्ड या बोर्ड समिति द्वारा निर्धारित) किया जाएगा। कानूनी विश्लेषकों का कहना है कि छोटे राइट्स इश्यू में एक साल में कॉल ऑप्शन पूरा करना होता है। हालांकि बड़े राइट्स इश्यू में इसे अनिश्चित समय तक बनाए रखने की स्वतंत्रता होती है।

इंडसलॉ में पार्टनर विशाल यदुवंशी ने कहा, '100 करोड़ रुपये से कम के राइट्स इश्यू के लिए भुगतान 12 महीने के अंदर किए जाने की जरूरत होती है। हालांकि आरआईएल जैसे बड़े निर्गमों के लिए निर्गम आकार का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही अग्रिम तौर पर चुकाए जाने की जरूरत होगी। साथ ही र्निम से प्राप्त रकम के इस्तेमाल पर नजर रखने के लिए निगरानी एजेंसी की नियुक्ति भी जरूरी है।'

मौजूदा समय में आरआईएल का शेयर राइट्स इश्यू के भाव के मुकाबले 15 प्रतिशत की बढ़त पर कारोबार कर रहा है। कंपनी को राइट्स इश्यू खुलने और बंद होने की तारीख की घोषणा करनी है। बाजार कारोबारियों का कहना है कि निवेशकों की दिलचस्पी राइट्स इश्यू के भाव और सेकंडरी बाजार में भाव के बीच अंतर पर निर्भर करेगी। विश्लेषकों का कहना है कि यदि मौजूदा तेजी बनी रहती है तो राइट्स इश्यू में अच्छी भागीदारी दिखेगी।  आंशिक भुगतान वाले शेयरों के धारकों के पास सेकंडरी बाजार के जरिये बाहर निकलने का विकल्प होगा या उन्हें कंपनी द्वारा कॉल ऑप्शन पर अमल किए जाते वक्त शेष 75 प्रतिशत का भुगतान करना होगा।

मौजूदा समय में, सिर्फ कुछ शेयरों में आंशिक भुगतान वाले हैं और टाटा स्टील इनमें से एक है। राइट इश्यू के दो साल बाद भी कंपनी ने शेयरों को संपूर्ण भुगतान वाली श्रेणी में परिवर्तित नहीं किया है। विश्लेषकों का कहना है कि यह निर्णय प्रवर्तकों के साथ कोष की उपलब्धता पर आधारित है। आरआईएल में प्रवर्तक शेयरधारिता 50 प्रतिशत से थोड़ी ज्यादा है, जिसका मतलब है कि प्रवर्तकों को राइट इश्यू में 26,500 करोड़ रुपये लगाने होंगे और यदि वे अंडरराइटिंग विकल्प पर आगे बढ़ते हैं तो यह आंकड़ा बढ़ जाएगा। कॉल ऑप्शन का समय आरआईएल के कर्ज-मुक्त बनने की यात्रा में महत्वपूर्ण होगा। अगस्त, 2019 में, समूह के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने शेयरधारकों को बताया था कि कंपनी मार्च 2021 तक कर्ज से मुक्त हो जाएगी। हालांकि अप्रैल में कंपनी ने कहा कि उसे 2020 में ही कर्ज-मुक्त होने का भरोसा है।

मार्च 2020 तक आरआईएल का सकल ऋण 3.36 लाख करोड़ रुपये और शुद्घ कर्ज 1.61 लाख करोड़ रुपये पर था।

आरआईएल का शेयर छह फीसदी टूटा
रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर मंगलवार को बीएसई पर 6 फीसदी टूटकर 1,480 रुपये पर बंद हुआ। 23 मार्च के बाद यह एक कारोबारी दिवस की सबसे बड़ी गिरावट है जब शेयर 13.4 फीसदी टूटकर 884 रुपये पर बंद हुआ था। उसके बाद से शेयर 80 फीसदी चढ़ चुका है। प्रतिभागियों ने कहा कि गिरावट की वजह राइट्स इश्यू से पहले हुई मुनाफावसूली हो सकती है। साथ ही राइट्स इश्यू में निवेश को लेकर चिंता और जियो-फेसबुक सौदे पर न्यायमूर्ति बी एन श्रीकृष्णा की तरफ से डेटा की निजता पर जताई गई चिंता का अवधारणा पर असर पड़ा। तकनीकी विश्लेषकों ने कहा कि रोजाना के चार्ट में 'शूटिंग स्टार' पैटर्न बनाया है, जो और कमजोरी का संकेत देता है।   

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