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ट्रेन में बैठकर मिली राहत की सांस

शाइन जैकब /  05 12, 2020

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के भीतर खड़े ग्रेटर नोएडा के आईईसी कॉलेज में फार्मेसी के अंतिम वर्ष के छात्र सुधांशु सिंह ने कहा, 'अगर आरोग्य सेतु ऐप में कोई खामी नहीं है तो हम जोखिम में हैं। यह दिखाता है कि 500 मीटर के दायरे में इस ऐप को इस्तेमाल कर रहे 3,068 लोगों में से चार कोरोना पॉजिटिव हैं।'

सिंह और उनके दोस्त अमरीश कश्यप को भारतीय रेलवे के फिर से यात्री सेवाएं शुरू करने से राहत मिली है, जो 22 मार्च को बंद हो गई थीं। वह पिछले 50 दिन से मैगी नूडल्स और दूध पर जिंदा हैं। कश्यप और उनका दोस्त कहते हैं कि वे अपने इस खान-पान से राहत पाने के लिए अपने फोन पर कोई भी ऐप्लीकेशन डाउनलोड करने को तैयार हैं। इस बारे में अब भी भ्रम है कि यात्रियों के लिए यह सरकारी ऐप जरूरी है या नहीं।

रेल मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि सभी यात्रियों को यह ऐप डाउनलोड करने की सलाह दी जाती है। मंत्रालय के मंगलवार को दोपहर 12 बजकर 27 मिनट के एक ट्वीट में कहा गया कि यात्रियों के लिए अपने मोबाइल फोनों में आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करना अनिवार्य है। इसके बावजूद नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर सभी अधिकारियों या यात्रियों ने ऐप डाउनलोड नहीं किया था।

डिब्रूगढ़ जा रहे एक अन्य छात्र सूर्य प्रकाश ने कहा, 'केवल पहाडग़ंज की तरफ के प्रवेश द्वार पर थर्मल स्कैनिंग हो रही थी, जिसमें हमारे शरीर के तापमान की जांच की गई। ऐप्लीकेशन को तो भूल जाएं, ऑनलाइन टिकट लेना ही मुश्किल काम था। हमें यह टिकट भी एक एजेंट को 1,000 रुपये अतिरिक्त देने के बाद मिला है।' मंगलवार को कुल 3,461 यात्री नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से तीन विशेष ट्रेन रवाना हुईं, जो नई दिल्ली-बिलासपुर के लिए 1177, नई दिल्ली-डिब्रूगढ़ के लिए 1122 और नई दिल्ली-बेंगलूरु के लिए 1162 थीं।

चरणबद्ध तरीके से सेवाएं शुरू करने के लिए नई दिल्ली, मुंबई, हावड़ा, अहमदाबाद, पटना और बेंगलूरु से कुल आठ ट्रेन शुरू हुईं।

ज्यादातर यात्रियों के लिए स्टेशन पर पहुंचना आसान नहीं था। बिहार के रक्सौल के प्रमोद कुमार नारायण को समय पर स्टेशन पर पहुंचने के लिए पांच घंटे पैदल चलना पड़ा। इसके बाद थर्मल स्कैनिंग के लिए तीन घंटे कतार में लगना पड़ा। वह द्वारका में पोचनपुर के नजदीक एक छोटा फूड स्टॉल चलाते हैं। वह बी2 कोच में सफर कर रहे थे। नारायण ने कहा, 'पिछले 50 दिनों से अधिक समय से मैं कोई कारोबार नहीं कर पाया। मैं शहर में केवल तभी टिक पाया, जब घर से मुझे कुछ पैसा भेजा गया। कारोबार के नुकसान और बढ़ते खर्चों से गुजारा करना भी मुश्किल हो गया था।'

भारतीय रेलवे ने 1 मई से देश के विभिन्न हिस्सों से फंसे प्रवासी कामगारों को ले जाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें शुरू की थीं। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने बिलासपुर जाने वाली ट्रेन के चलने से पहले प्लेटफार्म नंबर 1 पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा,  'हमारा ध्यान फंसे यात्रियों को ले जाने पर है। अब तक 6,50,000 से अधिक प्रवासियों को श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के जरिये घर भेजा गया है। अब सामान्य यात्रियों और प्रवासी मजदूरों दोनों को ले जाने के लिए ज्यादा ट्रेनों की सेवाएं दी जाएंगी।'

मंगलवार को देश भर के विभिन्न राज्यों से कुल 575 'श्रमिक स्पेशल' ट्रेनों का संचालन किया गया, जिनमें 680,000 लोगों ने यात्रा की। यादव ने बताया कि भारतीय रेलवे ने इन स्पेशल ट्रेनों को चलाने के लिए सभी सामाजिक दूरी और स्वच्छता मानकों का पालन किया गया है। उन्होंने कहा, 'हमने लोगों से अपना चादर और खाने-पीने की चीजें लाने के लिए कहा है।'

अधिकांश यात्रियों के लिए एक बड़ी चिंता ट्रेन में खाने के सामान की कमी से जुड़ी थी। आजादपुर सब्जी मंडी में काम करने वाले और बिहार के दानापुर की यात्रा पर जा रहे रणधीर कुमार ने कहा, 'भोजन की कमी एक बड़ा मुद्दा है। हमने पिछले 50 दिन काफी मुश्किल से काटे हैं। हमारे पास खाने की कमी तो थी ही साथ ही कोई काम भी नहीं था। मैं सिर्फ कुछ ही घंटों में टिकट पाने में कामयाब रहा। मैं नहीं जानता कि आरोग्य सेतु क्या है और स्टेशन पर किसी ने मुझसे पूछा नहीं।' रेलवे के अनुसार, ट्रेन में लोगों को पैकेज्ड पानी और खाने के लिए तैयार भोजन दिया जाएगा लेकिन ट्रेन में कोई खाने-पीने की चीज तैयार नहीं होंगी।

तसलीम मोहम्मद बिहार के कटिहार जिले के एक दिहाड़ी मजदूर हैं और उनका कहना है कि अगर वह दिल्ली सरकार के मुफ्त भोजन के लिए ठहरते तो उन्हें मरना पड़ता। दिल्ली में 50 दिनों से फंसे एक कपड़ा कारोबारी मोहम्मद शमसाद कहते हैं, 'मुझे लगता है कि सरकार ने इन ट्रेनों को देर से शुरू किया। अगर इन्होंने ये सेवाएं पहले शुरू की होती तो कोरोनावायरस की वजह से लगाए गए लॉकडाउन से नुकसान कम हो गया होता।' 

डिब्रूगढ़ के कुंदन कुमार मिश्रा ने कहा, 'बहुत से लोग बिना नौकरी या पैसे की कमी की वजह से फंस गए थे। मेरे लिए यह सफर मेरी जिंदगी का सफर है। मेरी पत्नी नौ माह की गर्भवती है। मैं कई दिनों से चिंतित था और यह ट्रेन वरदान के रूप में आई है।'

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