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एमएसएमई को चाहिए पुनर्गठन का सहारा

नम्रता आचार्य / कोलकाता May 12, 2020

कोविड-19 के मद्देनजर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के समक्ष उपजी समस्याओं का समाधान केवल नकदी समर्थन ही नहीं है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी राजकिरण राय के मुताबिक बहुत सी कंपनियों को गहरे पुनर्गठन की आवश्यकता पड़ सकती है।

भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री के सदस्यों के साथ वेबिनार में बोलते हुए राय ने कहा कि इंडियन बैंक्?स एसोसिएशन (आईबीए) ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के समक्ष पुनर्गठन का मुद्दा उठाया है।  

पिछले वर्ष रिजर्व बैंक ने अधिकतम 25 करोड़ रुपये के ऋण जोखिम के साथ एमएसएमई के लिए एकबारगी पुनर्गठन योजना पेश की थी। पुनर्गठन के दायरे में और अधिक उद्यमों को शामिल करने के लिए इस सीमा को और बढ़ाने की मांगें होती रही हैं।  राय ने कहा, 'इस संकट में सबसे तेज प्रतिक्रिया एमएसएमई को अस्थायी नकदी समर्थन देना है। आगे चलकर बहुत से नीतिगत हस्तक्षेपों की आवश्यकता होगी... हमें देखने की जरूरत है कि एमएसएमई के पास किस तरह का नकद प्रवाह उपलब्ध है। उसके आधार पर कुछ प्रकार के गहरे पुनर्गठन करने की जरूरत है लेकिन यह नियामक के जरिये होना है। इकाइयों की व्यवहार्यता महज कर्ज पर ही नहीं, बल्कि ज्यादा बड़े मामलों पर निर्भर करेगी।'  इसके साथ ही ब्याज अनुदान योजनाओं से ब्याज दरें कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, 'ब्याज दरें घटाने के संबंध में हमारे हाथ बंधे हैं। हमारे लिए पैसों का स्रोत जमा हैं और जब तक जमा पर ब्याज दरें ऊंची हैं उधारी की दरें भी ऊंची रहेंगी। बहरहाल, एमएसएमई को उधारी देने में ऋण की लागत अधिक है।'

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