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बड़े प्रोत्साहन पैकेज की तैयारी में सरकार

अरूप रॉयचौधरी / नई दिल्ली May 12, 2020

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस सप्ताह के आखिर तक बड़े प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा कर सकती हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक सीतारमण का अगला पैकेज कुल 3 लाख करोड़ रुपये या इससे ज्यादा का हो सकता है। सरकार ने मार्च के आखिर में 1.7 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी।

साथ ही यह अकेला पैकेज नहीं होगा। इसके अलावा जल्द ही तमाम और कदमों की घोषणा हो सकती है। सिर्फ वित्त मंत्री ही नहीं बल्कि संबंधित अन्य क्षेत्रों के मंत्रियों व भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से भी विभिन्न घोषणाएं हो सकती हैैं।

इन घोषणाओं का कुल आकार जी-20 के अन्य देशों की ओर से जीडीपी के प्रतिशत के रूप में की गई घोषणआ के बराबर हो सकता है। इसके पहले केंद्र सरकार का मानना था कि वह बड़े पैकेज की घोषणा नहीं करेगी जबकि उद्योग संगठनों व हिस्सेदारों की ओर से इसकी मांग की जा रही थी। सरकार अपने पहले के रुख से हट रही है।

सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि सोच में इस बदलाव की 3 वजहें हैं। पहला- वित्त वर्ष 2021 के लिए बाजार से उधारी की योजना 7.8 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये कर दी गई है और इसकी वजह से सरकार को  खर्च करने का ज्यादा अवसर मिल गया है। दूसरा- केंद्र सरकार को अब स्थिति कुछ ज्यादा साफ हो गई है कि कितना गहरा आर्थिक झटका है और आगे क्या होगा। और तीसरा- अर्थव्यवस्था धीरे धीरे खोली जा रही है, उद्योगों खासकर छोटे उद्यमों को मदद की जरूरत है, जो उन्हें मिल सकेगी।

प्रोत्साहन पैकेज को लेकर हो रही चर्चाओं में शामिल रहे एक अधिकारी ने कहा, 'स्वास्थ्य और आर्थिक असर के हिसाब से देखें तो जब लॉकडाउन की घोषणा की गई थी तब हमें लगा था कि यह कम समय के लिए है। हम यह नहीं जानते थे कि यह मैराथन है या मध्यम दूरी की दौड़ है। अब स्थिति थोड़ी साफ हुई है और हमें बेहतर समझ हुई है। हम जानते हैं कि इसके मामलों व मौतों के हिसाब से हमारी स्थिति इटली या अमेरिका की तरह खराब नहीं है। ' उन्होंन कहा, 'अगली घोषणाएं निश्चित रूप से पहले के प्रोत्साहन पैकेज में की गई घोषणाओं से बहुत बड़ी होगी।'

अगली घोषणाओं में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों की कार्यशील पूंजी के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम शामिल होने की उम्मीद की जा रही है। विस्थापित श्रमिकों के हजारों की संख्या में शहर छोड़कर जाने की स्थिति को देखते हुए  केंद्र सरकार अपना कार्यबल बरकरार रखने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहन दे सकती है।

आम लोगों के लिए योजना का विस्तार प्रत्यक्ष नकदी अंतरण के माद्यम से किए जाने की उम्मदी है। मनरेगा के भुगतान और पीएम किसान योजना में एक और बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। इसके पहले सीतारमण की ओर से नकदी अंतरण को लेकर मार्च के आखिर में की गई घोषणा को भी विस्तार दिया जा सकता है।

केंद्र व राज्य सरकारें धीरे धीरे लॉकडाउन खत्म कर रही हैं और खासकर ग्रीन और ऑरेंज जोन में आर्थिक गतिविधियों को अनुमति दे रही हैं।  रेल सेवा भी मंगलवार से बहाल होने जा रही है और उड़ानें भी जल्द शुरू होने की संभावना है। कार्यस्थल एक बार फिर खुल गए हैं, ऐसे में अधिकारियों का कहना है कि ध्यान उन क्षेत्रों पर होगा, जो इस महामारी और लॉकडाउन बढऩे से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इनमें सेवा, उड्डयन, पर्यटन, आतिथ्य सत्कार, ऑटो व अन्य क्षेत्र शामिल हैं।  वित्त मंत्री के बाद आगे के कदम के लिए अन्य संबंधित मंत्रालय सामने आ सकते हैं।

वित्त मंत्रालय के 26 मार्च के पैकेज के अलावा भारतीय रिजर्व बैंक ने भी कई घोषणाएं की हैं, जिनमें म्युचुअल फंड व एनबीएफसी से जुड़े फैसले शामिल हैं। ब्याज दरें कम की गई हैं, रिफाइनैंस विंडो खोला गया है और अन्य कई कदम उठाए गए हैं, जिससे नकदी का प्रवाह चालू हो सके।

वित्त मंत्री का पहला पैकेज जीडीपी का करीब 0.8 प्रतिशत था। यह जी-20 देशों की तुलना में बहुत कम था। संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रोत्साहन पैकेज उसके जीडीपी के 11 प्रतिशत के बराबर पहुंच गया है। स्टैटिस्टिका के आंकड़ों के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया ने अपने जीडीपी के 9.7 प्रतिशत, ब्राजील ने 3.5 प्रतिशत  के बराबर प्रोत्साहन पैकेज दिया है।

भारत के  उद्योग संगठन जैसे एसोचैम और फिक्की ने 9 लाख करोड़ रुपये से लेकर 23 लाख करोड़ रुपये तक के बड़े पैकेज की मांग की है।

फिक्की की अध्यक्ष संगीता रेड्डी ने वित्त मंत्री को सोमवार को लिखे पत्र में 9 से 10 लाख करोड़ रुपये (जीडीपी के 4-5 प्रतिशत के बराबर) पैकेज की मांग की है। फिक्की ने एक बयान में कहा, 'इस धन को अर्थव्यवस्था के सभी स्तरों पर राहत में लगाया जाना चाहिए, जिसमें पिरामिड के निचले हिस्से पर स्थित अनौपचारिक श्रमिक, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम से लेकर बड़े कॉर्पोरेट तक शामिल हैं।'

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