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लॉकडाउन लंबा चलने के भय से पलायन कर रहे प्रवासी

सुशील मिश्र /  May 11, 2020

मुंबई और आसपास के शहरों से बाहर जाने वाली सड़कों पर प्रवासी मजदूर और मजबूर प्रवासियों की भीड़ दिल दहला देने वाली है। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं जवान सब भागे जा रहे हैं। साइकिल, बाइक, ऑटो, टैक्सी, कार, बस, ट्रक, टेंपो जिसे जो मिल रहा है उसमें सवार होकर भाग रहा है, कोई सिर पर अपना सामान लेकर पैदल ही बिना रोकटोक के चला जा रहा है।

हालांकि सरकार की तरफ से पैदल न जाने की अपील की जा रही है।  लेकिन उसकी अपील और व्यवस्था पूरी तरह से नाकाम नजर आ रही है। इस बात को सरकार भी स्वीकार कर रही है। महाराष्टï्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि यह सच है कि प्रवासी मजदूर जो सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित अपने घरों के लिए पैदल निकल गए हैं वे लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं लेकिन हम उन्हें मानवीय आधार पर जाने दे रहे हैं। पिछले महीने सैकड़ों प्रवासी मजदूर बांद्रा स्टेशन पर इक_े हो गए थे और घर जाने के लिए व्यवस्था किए जाने की मांग कर रहे थे, तब पुलिस ने लाठी चार्ज कर उन्हें तितर-बितर किया था। देशमुख ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले सख्ती दिखाने की कोशिश की थी लेकिन लॉकडाउन बढ़ाए जाने से मजदूरों का सब्र अब जवाब दे चुका है। वे घर जाने को इतने बेचैन हैं कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई झेलने को भी तैयार हैं। इसलिए हमने सख्ती ना करने का फैसला किया है। सरकार उनकी मदद करने की कोशिश कर रही है।

देशमुख ने कहा कि सरकार और मजदूरों के बीच संवाद की कमी थी जिसे पहले ही दूर किया जा सकता था। हमने कभी नहीं सोचा था कि लॉकडाउन इतने लंबे समय तक चलेगा। हमने मजदूरों से बात करने की कोशिश भी की। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी कई बार अपील की लेकिन प्रवासी मजदूरों ने अपने घर लौटने का फैसला कर लिया है। देशमुख ने कहा कि सरकार ने प्रवासी मजदूरों को समझाने की कोशिश की कि राज्य में कुछ उद्योग शुरू हो गए हैं और आगे भी कुछ ढील दी जाएगी, वे यहां से ना जाएं। मंत्री ने बताया कि अस्थायी आश्रय गृहों के दौरे के दौरान मजदूरों ने मुझसे कहा था कि वे दीवाली के बाद वापस आ सकते हैं लेकिन अभी वे घर जाना चाहते हैं। वे पैदल घर लौटने का फैसला कर बड़ा जोखिम उठा रहे हैं क्योंकि यात्रा पूरी करने के लिए ना उनके पास पैसे हैं और ना ही पूर्ण संसाधन।

लॉकडाउन के बीच प्रवासी श्रमिकों के लिए 'मुंबई ड्रीम्स' का सपना टूटता जा रहा है और उनमें से टैक्सी और ऑटोरिक्शा चलाने वाले कई लोग अपने वाहनों से अपने घरों को लौट रहे हैं। यूनियन के अधिकारियों ने कहा कि कोरोनावायरस के कारण जारी लॉकडाउन की बढ़ती संभावना को देखते हुए कई ऑटो और टैक्सी चालक अपनी काली-पीली टैक्सी और ऑटोरिक्शा में अपने घरों को लौट रहे हैं। मुंबई टैक्सीमेन्स यूनियन के ए. एल. क्वाड्रोस ने कहा कि काली-पीली टैक्सी में एक हजार से अधिक लोगों और पांच हजार से अधिक ऑटोरिक्शा ने मुंबई महानगर क्षेत्र को छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि मुंबई महानगर में करीब पांच लाख ऑटोरिक्शे और करीब 45 हजार काली-पीली टैक्सियां हैं। उन्होंने कहा कि करीब दो महीने तक लॉकडाउन के कारण कैब चालकों और ऑटो चालकों के पास कोई धन नहीं बचा है। इसलिए यहां भूखे मरने के बजाय वे अपने गृह स्थानों की तरफ जाने को तवज्जो दे रहे हैं।

संगठन के अधिकारियों के मुताबिक कैब और ऑटोरिक्शा चालक 20 से 50 के समूह में मुंबई क्षेत्र से बाहर जा रहे हैं। वे उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश और झारखंड की तरफ रवाना हो रहे हैं जबकि कुछ कैब चालक कर्नाटक भी जा रहे हैं। स्वाभिमान टैक्सी-रिक्शा संघ के नेता के. के. तिवारी के मुताबिक लॉकडाउन में एक और विस्तार के बाद और प्रवासियों के प्रतिबंध में ढील देने के बाद ऑटोचालक पिछले महीने से अपने गृह स्थानों की ओर जाने लगे हैं। मुंबई ऑटोरिक्शा यूनियन के नेता शशांक राव ने कहा कि चूंकि बस और ट्रक चालक बहुत ज्यादा भाड़ा मांग रहे थे इसलिए चालक अपने वाहन से ही घरों को लौट रहे हैं। अपना सामान पैक कर कुछ चालक अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं जबकि कई चालक अन्य चालकों एवं दोस्तों के साथ रवाना हो रहे हैं। संगठन के नेताओं के मुताबिक टैक्सी और ऑटोचालक पुलिस की तरफ से जारी ई-पास के बगैर ही यात्रा कर रहे हैं क्योंकि वे इसे समय एवं धन की बरबादी मानते हैं।

आरटीओ अधिकारियों ने बताया कि ऑनलाइन अस्थायी पास हासिल कर ऑटो एवं टैक्सी चालक यात्रा कर रहे हैं जो कुछ महीने के लिए वैध होता है।  पैदल ही अपने गांवों की तरफ पलायन कर लोगों का कहना है कि लॉकडाउन अभी खत्म होने वाला नहीं है। भूखे मरने से अच्छा है पैदल चला जाए। मुंबई से उत्तर प्रदेश पैदल ही निकले कुछ मजदूरों का कहना है कि मुंबई से रेल नहीं चलेगी, नाशिक से गाड़ी मिल जाएगी यह बात उनको स्थानीय नेताओं ने बताई है इसलिए हम लोग फिलहाल नाशिक तक जा रहे हैं।

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