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मोबाइल निर्यात बाजार में भारत देगा चीन-वियतनाम को चुनौती!

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली May 11, 2020

भारत वैश्विक मोबाइल उपकरण निर्यात बाजार में अपनी धाक जमाने वाला अगला देश बन सकता है। इस बाजार में फिलहाल चीन और वियतनाम जैसे देशों की तूती बोलती है, लेकिन भारत उन्हें कड़ी चुनौती पेश कर सकता है। सरकार मोबाइल उपकरण निर्यात के लिए एक नई प्रोत्साहन नीति पर काम कर रही है और अगर मामला निष्कर्ष तक पहुंच गया तो भारत 2025 तक दुनिया में 369 अरब डॉलर के मोबाइल उपकरण निर्यात बाजार में 7 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी अपनी झोली में डाल सकता है।

ऐपल, दक्षिण कोरिया की सैमसंग, वीवो और दुनिया में विभिन्न ब्रांडों के लिए फोन बनाने वाले वेंडर भारत की हिस्सेदारी ऊपर पहुंचा सकते हैं। निर्यात प्रोत्साहन नीति पर सरकार और वैश्विक मोबाइल उपकरण विनिर्माताओं के बीच चल रही बातचीत की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने कहा कि उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (प्रॉडेक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव स्कीम, पीएलआई) के दम पर ये कंपनियां भारत से 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक  मूल्य के मोबाइल उपकरणों का निर्यात कर सकती हैं। पीएलआई के तहत इन कंपनियों को भारत को अपने मोबाइल फोन उपकरण के निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए सरकार की ओर से आकर्षक पेशकश की जा रही है।

इस समय वैश्विक मोबाइल उपकरण निर्यात बाजार में भारत की हिस्सेदारी 0.5 प्रतिशत (2 अरब डॉलर) है। इस बाजार में चीन और वियतनाम का दबदबा है, जिनकी हिस्सेदारी 85 प्रतिशत है। ऐपल, सैमसंग और हुआवे इन तीन कंपनियों के उत्पादों की कुल निर्यात उत्पाद में हिस्सेदारी 75 प्रतिशत तक है। भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक 110 अरब डॉलर मूल्य के मोबाइल उपकरणों का निर्यात करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। भारत में मौजूद वैश्विक कंपनियां इसमें एक चौथाई योगदान दे सकती है। सूत्रों का कहना है कि ऐपल पीएलई के क्रियान्वयन के बाद चीन से कुल निर्यात (मूल्य) का 7 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भारत अपने  पाले में कर सकता है और चौथे वर्ष तक यह आंकड़ा बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक हो सकता है। ऐपल का रुख जानने के लिए उसे भेजे गए ई-मेल का जवाब नहीं आया।

पीएलआई योजना के तहत वैश्विक कंपनियां केवल 200 डॉलर उत्पादन लागत मूल्य के मोबाइल फोन का निर्यात कर सकती हैं। यह रकम देश में बिकने वाले सभी मोबाइल उपकरण का करीब 33 प्रतिशत है। इसके साथ ही इसे शुरू में 1,000 करोड़ रुपये निवेश करना है। पीएलआई योजना के लिए 40,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हालांकि कंपनियों को इन महंगे फोन का निर्यात करने के लिए सरकार से चरणबद्ध तरीके से प्रोत्साहन मिलता है। पहले दो वर्षों में यह प्रोत्साहन उत्पादन मूल्य का 6 प्रतिशत और पांचवें या अंतिम वर्ष में यह कम होकर 4 प्रतिशत हो जाता है। यह प्रोत्साहन हरेक वर्ष दिया जाता है, लेकिन इसका लाभ लेने के लिए कंपनी को न्यूतनम मूल्य के उत्पाद का निर्यात करना होता है। हालांकि बिक्री की एक सीमा भी तय की गई है, जिसे पार करने पर किसी तरह का प्रोत्साहन नहीं दिया जाता है।  सरकार ने पांच बड़ी वैश्विक कंपनियों को ध्यान में रखकर यह योजना तैयार की जा रही है, हालांकि इसके लिए इन कंपनियों को कुछ तय शर्तें पूरी करनी होंगी।

सूत्रों के अनुसार चीन में ऐपल के निर्यात का उत्पादन मूल्य सालाना 60-62 अरब डॉलर है। सैमसंग चीन से बाहर निकल गई है और वियतनाम पर दांव खेल रही है। कंपनी ने 5,000 करोड़ रुपये निवेश के साथ भारत में एक मोबाइल संयंत्र स्थापित किया है। इससे उम्मीद है कि 12 करोड़ फोन विनिर्माण क्षमता के 30 प्रतिशत हिस्से का इस्तेमाल यह निर्यात के लिए कर पाएगी।

मोबाइल विनिर्माता कंपनियां इससे सहमत हैं कि प्रोत्साहन योजना से लागत में करीब 9-10 प्रतिशत तक नुकसान कम करने में उन्हें बहुत मदद मिलेगी।

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