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बैंक अपना फंसा कर्ज नई एआरसी को देंगे!

अभिजित लेले / मुंबई May 11, 2020

भारत के बैंक करीब 60,000 करोड़ रुपये से अधिक के फंसे हुए कर्ज को प्रस्तावित परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनी (एआरसी)/ परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी)/ वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) में हस्तांतरित कर सकते हैं। एएमसी/एआईएफ/एआरसी का गठन गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) की वसूली और मूल्यवर्धन के लिए किया जाना प्रस्तावित है। प्रस्तावित एआरसी में सरकार की हिस्सेदारी 50 फीसदी तक होगी और इसका प्रबंधन परिसंपत्ति प्रबंधन के तहत किया जाएगा।

इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आइबीए) बैंकों से फंसे हुए कर्ज (बैड बैंक) को लेने के लिए परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनी (एआरसी), एएमसी और एआईएफ गठित करने के सशक्त समिति के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इसमें सरकार ककरीब 9,000 से 10,000 करोड़ रुपये का योगदान देगी। आईबीए इस हफ्ते सरकार के पास इस बारे में प्रस्ताव कर सकता है। बैंकरों का कहना है कि पुराने के साथ नए मामले भी एआरसी में लिए जाएंगे।

इस व्यवस्था में तीन इकाइयां शामिल होंगी। पहली परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनी जो परिसंपत्ति का अधिग्रहण करेगी। एएमसी परिसंपत्ति का प्रबंधन करेगी और एआईएफ कोष जुटाएगी और एआरसी द्वारा जारी प्रतिभूतियों में निवेश करेगी। प्रस्तावित एआरसी को सरकार का समर्थन हासिल होगा। इसी तरह की व्यवस्था आईडीबीआई बैंक के मामले में की गई थी और दबाव वली संपत्तियों के प्रबंधन का कोष बनाया गया था।

खुदरा ऋणों के भुगतान के लिए 90 दिन की मोहलत और कार्यशील पूंजी वित्तपोषण नियमों में ढील के बावजूद कोरोना संकट की वजह से बैंकों की गैर-निष्पिादित आस्तियां (एनपीए) बढ़ सकती हैं।

जुलाई 2018 में सुनील मेहता (अब येस बैंक के चेयरमैन) की अध्यक्षता वाली समिति ने दबाव वाली संपत्तियों के समाधान पर अपनी रिपोर्ट (अब सशक्त पैनल) में फंसे कर्ज के अधिग्रहण के लिए स्वतंत्र एएमसी गठित करने की सिफारिश की थी।

500 करोड़ रुपये से अधिक के फंसे कर्ज जिसकी वसूली की संभावना है, उसे एएमसी देख सकती है। इसके अलावा एक वैकल्पिक निवेश कोष की भी सिफारिश की गई थी। इस तरह के बैड बैंक को गठित करने के लिए भारतीय नियामकीय माहौल और वित्तीय क्षेत्र की स्थिति को ध्यान में रखते हुए जमीनी स्तर पर काम किया जा चुका है। इससे प्रतिक्रिया समय को घटाने में मदद मिलेगी।

केयर रेटिंग्स के वित्त वर्ष 2020 की तीसरी तिमाही के विश्लेषण के अनुसार वाणिज्यिक बैंकों का सकल एनपीए दिसंबर 2018 के 9.7 लाख करोड़ रुपये से घटकर दिसंबर 2019 में करीब 9 लाख करोड़ रुपये रह गया। कुल एनपीए में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा (दिसंबर 2019 तक करीब 7.2 लाख करोड़ रुपये) है।

2020 की तीसरी तिमाही में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए अनुपात 11.3 फीसदी रहा जो वित्त वर्ष 2019 की तीसरी तिमाही में 12.8 फीसदी था। इससे फंसे कर्ज के लिए ज्यादा प्रावधान करने का संकेत मिलता है।

भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने पिछले हफ्ते कहा था कि बैड बैंक का ढांचा तैयार करने का यह सही समय है क्योंकि मौजूदा एनपीए प्रावधान के कारण अधिकांश बैंकों का प्रावधान स्तर काफी ज्यादा हो गया है। बैंकों को फंसे कर्ज के लिए काफी रकम अलग रखनी होती है।

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