बिजनेस स्टैंडर्ड - नमक के निर्यात में गिरावट के आसार
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नमक के निर्यात में गिरावट के आसार

राजेश भयानी / मुंबई May 11, 2020

लॉकडाउन के बाद मई के पिछले सप्ताह से इस सत्र में नमक की मांग को बड़ा झटका लगा है। पिछले डेढ़ महीने से रेस्तरां और भोजनालय बंद रहने तथा गत एक वर्ष से औद्योगिक और आर्थिक मंदी के बाद नमक के इस सत्र के दौरान निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत तक गिरावट आने की संभावना है। कम क्षमता पर चलने वाली कास्टिक और सोडा ऐश कंपनियों को भी मिला लें तो इसके परिणामस्वरूप देश की मांग में तकरीबन 20 प्रतिशत गिरावट आने के आसार हैं। भारत का नमक सत्र मध्य अक्टूबर से लेकर जून तक चलता है। मॉनसून के विस्तार की वजह से इस साल यह सत्र छह से आठ सप्ताह के विलंब से शुरू हुआ था। मॉनसून के इस विस्तार की वजह से आम तौर पर अप्रैल के आखिर में होने वाले उत्पादन को नुकसान पहुंचा था।

सत्र की शुरुआत में देर होने के कारण कुल उत्पादन भी कम रहने की संभावना है। भारतीय नमक विनिर्माता संघ के अध्यक्ष भरत रावल ने कहा कि नमक का उत्पादन सत्र अक्टूबर के मध्य से शुरू होता है जो इस बार मॉनसून के विस्तार के कारण देर से शुरू हुआ है जिसकी वजह से पिछले साल की इस अवधि की तुलना में उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि नमक विनिर्माण उद्योग के पास अब भी पिछले सीजन का तकरीबन 10 लाख टन का स्टॉक है। अगर जून के अंत तक गुजरात में बारिश नहीं होती है जैसा कि सामान्य होता है, तो उत्पादन में नुकसान की भरपाई की जा सकती है।

भारत हर साल तीन करोड़ टन नमक उत्पादन करता है और एक करोड़ टन से अधिक निर्यात किया जाता है। प्रति वर्ष औद्योगिक उपयोग और उपभोग 90 लाख टन से एक करोड़ टन तक (प्रत्येक) रहता है। निर्यात मांग के लिहाज से यह साल खराब है। निर्यात में पहले ही 40 लाख टन तक गिरावट आ चुकी है।

गुजरात में एक बड़े सोडा ऐश विनिर्माता के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि लॉकडाउन के शुरुआती चरण के दौरान पूरे उद्योग में अधिकांश संयंत्र या तो कम क्षमता पर चल रहे थे या फिर बंद कर दिए गए थे। इस करण नमक प्रसंस्करण गतिविधि पर असर पड़ा था। नमक से निर्मित उत्पादों की मांग में कमी है। उन्होंने कहा कि सत्र के शुरुआती हिस्से में नजर आई उत्पादन में गिरावट से उद्योगों को नुकसान होने की संभावना नहीं है। भारत में उत्पादित नमक का लगभग 80 प्रतिशत उत्पादन गुजरात करता है। गुजरात के कुल उत्पादन में से केवल कच्छ जिले का उत्पादन ही 80 प्रतिशत रहता है, जबकि बाकी का उत्पादन सौराष्ट्र और राज्य के अन्य स्थानों में होता है। देश के सबसे बड़े नमक निर्यातकों में से एक और कच्छ स्मॉल साल्ट एसोसिएशन के मानद सचिव शामजी कंगड़ ने कहा कि इस सत्र के दौरान नमक निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत या 40 लाख टन की गिरावट चीन और अन्य आयातकों की कम मांग के कारण आई है। इसकी शुरुआत इस साल संपूर्ण आर्थिक मंदी के साथ हुई थी।

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