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बढ़ सकता है बॉन्ड प्रतिफल

अनूप रॉय / मुंबई May 11, 2020

सरकार की ओर से उधारी कार्यक्रम में भारी तेजी के प्रबंधन में मदद करने के लिए अगर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) किसी ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) समर्थन की घोषणा नहीं करता है तो सोमवार को बाजार खुलने पर बॉन्ड प्रतिफल में 15 से 20 आधार अंक की तेजी आने की संभावना है।

शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद सरकार ने कहा कि वह पूरे वित्त वर्ष के दौरान 12 लाख करोड़ रुपये उधारी लेगी, जबकि मूल रूप से 7.88 लाख करोड़ रुपये उधारी लेने की योजना बनी थी। कोविड-19 के संकट की वजह से सरकार को उधारी बढ़ानी पड़ रही है। इत्तेफाक से उसी दिन इसके पहले 10 साल के बॉन्ड का प्रतिफल फरवरी 2009 के बाद पहली बार गिरकर 6 प्रतिशत से नीचे आ गया था। सरकार ने10 साल का नया  पेपर प्रस्तुत किया था, जिसका कट ऑफ 5.79 प्रतिशत था।

फस्र्ट रैंड बैंक के कोषागार के प्रमुख हरिहर कृष्णमूर्ति ने कहा कि 12 लाख करोड़ रुपये की उधारी 'बाजार की किसी भी उम्मीद से ऊपर' था। इसकी वजह से 10 साल के नए पेपर का प्रतिफल 6 प्रतिशत से कुछ ऊपर या उससे ज्यादा हो सकता है।

लेकिन बैंकिंग व्यवस्था की अतिरिक्त नकदी भी भारी उधारी की वजह से कम हो जाएगी। सरकार ने हर सप्ताह 30,000 करोड़ रुपये उधारी लेने की योजना बनाई है, जबकि मूल रूप से 20,000 करोड़ रुपये से कम उधारी की योजना बनी थी। जोखिम से बचने के लिए बैंक 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा अतिरिक्त नकदी को इन बॉन्डों को खरीदने में लगा सकते हैं। कृष्णमूर्ति ने कहा कि लेकिन कम अवधि की दरें भी बढ़ेंगी और प्रतिफल में तेज बदलाव होगा। उन्होंने कहा कि नीतिगत दर में कटौती हो सकती है क्योंकि पिछली महंगाई दर करीब 6 प्रतिशत थी।

राजकोषीय घाटे में चूक के संकेतक अप्रत्याशित नहीं थे। ऐक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री सौगात भट्टाचार्य ने राजकोषीय अंतर को कम करने के लिए बाजार उधारी के प्रस्ताव की इतनी बड़ी मात्रा को लेकर आश्चर्य जताया है। भट्टाचार्य ने एक रिपोर्ट में लिखा है, 'वैकल्पिक स्रोतों जैसे टी-बिल, राष्ट्रीय लघु बचत आदि जैसी वैकल्पिक क्षमताओं के बावजूद इस अतिरिक्त उधारी से संकेत मिलता है कि अधिकारियों का यह मानना है कि वित्त वर्ष 21 में राजकोषीय अंतर इस बार 7-8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है, जिस पर हम लोग काम कर रहे हैं और इसका अनुमान लगाया गया है।'

एयू एसएफबी में संपत्ति देनदारी प्रबंधन के प्रमुख देवेंद्र दास ने कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा ओएमओ पर स्थिति साफ नहीं की गई है, ऐसे में उधारी की खबर से बॉन्ड प्रतिफल में कम से कम 10 से 15 आधार अंक बढ़ोतरी की संभावना है।

एचडीएफसी लाइफ के फिक्स्ड इनकम के प्रमुख बद्रीश कुलहल्ली ने कहा कि दर मेंं कटौती अभी हो सकती है, 'लेकिन दीर्घावधि बॉन्डों से फायदा नहीं होगा।' उन्होंने कहा, 'सिर्फ ओएमओ या ऑपरेशन ट्विस्ट से मदद मिलेगी। बाजार करीब इन सभी अतिरिक्त उधारी के मामले में रिजïर्व बैंक के समर्थन को देखेगा।'

रिजर्व बैंक अन्य विकल्प भी देख रहा है जैसे कि कितने बैंक रिवर्स रीपो जमा कर सकते हैं और उनको इसके बदले बॉन्ड खरीदने को बाध्य किया जा सकता है। इसके अलावा स्टैंडिंग डिपॉजिट सुविधा (एसडीएफ) भी है, जिसमें रिजर्व बैंक अतिरिक्त नकदी से निपटने के लिए बगैर किसी कोलेटरल के रिवर्स रीपो से कम दर पर अतिरिक्त नकदी प्राप्त करता है। लेकिन संभवत: इसकी जरूरत पडऩे की उम्मीद नहीं है क्योंकि बैंक अब अपनी अतिरिक्त नकदी का इस्तेमाल सरकार के बॉन्ड खरीदने में करेंगे।

Keyword: Bond, Share Market, Investment, NBFC, बॉन्ड बाजार, निवेशक, एनबीएफसी, सेबी,
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