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भारत समेत उभरते बाजारों को लेकर सतर्क हैं विदेशी निवेशक

पुनीत वाधवा /  May 11, 2020

बीएस बातचीत

चूंकि भारतीय उद्योग जगत ने मार्च 2020 में समाप्त तिमाही एवं वर्ष के लिए अपने वित्तीय परिणामों की घोषणा शुरू कर दी है, लेकिन बीएनपी पारिबा में एशिया पैसिफिक इक्विटी रिसर्च के प्रमुख मनीषी रायचौधरी ने पुनीत वाधवा के दिए साक्षात्कार में कहा कि पूरे एशिया के बाजारों में लॉकडाउन की वजह से आई उपभोक्ता मांग में कमजोरी, रोजगार के संभावित नुकसान आदि का पूरा असर नहीं दिखा है। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:


सेंसेक्स और निफ्टी के बारे में आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

अगले एक साल के दौरान हमें सेंसेक्स और निफ्टी का प्रतिफल उनकी आय वृद्घि के अनुरूप रहने की संभावना है। हालांकि कॉरपोरेट राजस्व और आय को लेकर अनिश्चितता है जिससे बाजार परिदृश्य में भी अनिश्चितता को बढ़ावा मिल रहा है। मूल्यांकन को देखें तो ऐसा नहीं लगता कि दबाव का पूरी तरह से असर दिखा है। मार्च के तीसरे सप्ताह से आई ताजा तेजी के बाद सेंसेक्स और प्रमुख भारतीय सूचकांक अपने जनवरी के स्तरों से 20-25 प्रतिशत नीचे हैं। हालांकि 2020 और 2021 के लिए आय अनुमान लगभग 15 प्रतिशत घटाए गए हैं जिसका मतलब है कि मूल्यांकन अपने ऊंचे स्तरों से सिर्फ लगभग 5-10 प्रतिशत कम है। पूरे एशिया के इक्विटी बाजारों में लॉकडाउन की वजह से उपभोक्ता मांग पर पड़े दबाव, रोजगार के संभावित नुकसान का पूरी तरह से असर नहीं दिखा है।


क्या बाजार में ताजा अति उत्साह की स्थिति उचित है?

सभी विकसित और उभरते बाजारों में इक्विटी तेजी को केंद्रीय बैंकों और सरकारों के बड़े राजकोषीय और मौद्रिक प्रोत्साहनों से मदद मिली है। शायद कोविड-19 संक्रमण का दूसरा लहर हमारा आधार मामला नहीं होगा और इससे लॉकडाउन को पुन: आगे बढ़ाया जा सकेगा और मांग पर और ज्यादा दबाव पड़ेगा।

निवेश बाजार के तौर पर विदेशी निवेशक भारत को किस नजरिये से देख रहे हैं?

विदेशी निवेशक भारत समेत सभी उभरते बाजारों (ईएम) पर सतर्कता बरत रहे हैं। फरवरी के मध्य से हमने एशियाई बाजारों से विदेशी निवेशकों से लगभग 52 अरब डॉलर की निकासी दर्ज की, जिसमें से 9 अरब डॉलर की निकासी भारत से हुई। जहां एशिया (जापान को छोड़कर) से जुड़े निवेशक भारत को लेकर उत्साहित हैं, वहीं वैश्विक उभरते बाजारों (जीईएम) के संदर्भ में निवेशक काफी हद तक नकारात्मक हैं और उन्होंने पिछले 6 महीनों के दौरान भारतीय इक्विटी में बिकवाली की है। विदेशी निवेशक आय अनुमानों में कटौती के सिलसिले को लेकर चिंतित दिख रहे हैं, वहीं बैंकों में परिसंपत्ति गुणवत्ता की समस्याएं और खपत तथा निवेश में सुधार में संभावित विलंब बरकरार रहने की आशंका है।


आपके हिसाब से कौन से क्षेत्र और शेयर बढिय़ा हैं?

भारत में, हम आईटी, दूरसंचार, निजी रिटेल-उधारी बैंकों, बीमा और कुछ कंज्यूमर स्टैपल्स (खासकर वे, जो स्वच्छता और साफ-सफाई पर उपभोक्ताओं द्वारा ज्यादा जोर दिए जाने से लाभ उठाने की स्थिति में हैं) पर सकारात्मक हैं। ऊर्जा क्षेत्र में, कुछ तेल रिफाइनिंग एवं वितरण कंपनियां (ओएमसी) और मजबूत व्यावसायिक घराने हमारे एशियाई मॉडल पोर्टफोलियो में भारत के लिए आवंटन में शामिल हैं। हमारा कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी, मैटेरियल और इंडस्ट्रियल में निवेश नहीं है। दीर्घावधि के दौरान खपत आदतों, कार्य प्रणालियों और उत्पादकों की आपूर्ति शृंखला के निर्णय बड़ा बदलाव ला सकेंगे। भारतीय कॉरपोरेट उधारी से जुड़े बैंक, आईटी और उद्योगपति लाभान्वित हो सकते हैं, हालांकि हमारा मानना है कि इन निवेश थीम के कारगर साबित होने में समय लगेगा।


क्या यह मझोले और छोटे शेयरों पर ध्यान देने के लिए अच्छा समय है?

दीर्घावधि निवेशक अब कुछ खासियतों वाले मिड-कैप और स्मॉल-कैप पर विचार कर सकते हैं। हमें सभी छोटे एवं मझोले शेयरों के संदर्भ में एक जैसी रणनीति नहीं अपनानी होगी। मझोले और छोटे शेयरों से चयन की हमारी रणनीति लार्ज-कैप श्रेणी के समान है। भारत में हेल्थकेयर, बीमा, वित्तीय सेवा और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी क्षेत्रों में बड़ी तादाद में शेयर उपयुक्त हैं।


वित्त वर्ष 2021 और वित्त वर्ष 2022 के लिए आपके अनुमान क्या हैं?

मौजूदा समय में एमएससीआई इंडिया के लिए प्रति शेयर आय (ईपीएस) वृद्घि अनुमान 2020 में 7 प्रतिशत और 2021 में 21 प्रतिशत है। हमारा मानना है कि वृद्घि अनुमानों में और कमी आ सकती है, खासकर कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी, फाइनैंशियल, इंडस्ट्रियल और मैटेरियल में। आईटी और दूरसंचार आय गिरावट के दबाव से काफी हद तक अलग दिख रहे हैं, हालांकि इन क्षेत्रों में भी चिंताएं स्पष्टï रूप से दूर नहीं हुई हैं।


वस्तु एवं सेवा के लिए मांग और भारतीय उद्योग जगत की स्थिति कब सामान्य होगी?

मांग में सुधार इस पर निर्भर करेगा कि कोविड-19 महामारी किस तरह से और कब तक नियंत्रित होगी और लॉकडाउन कितनी जल्द हटाया जा सकेगा, तथा फैक्टरियों को पुन: खोला जा सकेगा, जिससे कि श्रमिक काम पर लौट सकें। चीन और अन्य उत्तरी एशियाई देश लॉकडाउन हटाने और धीरे धीरे परिचालन सामान्य बनाने की प्रक्रिया में हैं। उनके अनुभव हमें बताते हैं कि हालात सामान्य बनाने की प्रक्रिया लंबी हो सकती है।

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