बिजनेस स्टैंडर्ड - तेज वृद्घि के लिए करना होगा दो तिमाही का इंतजार
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तेज वृद्घि के लिए करना होगा दो तिमाही का इंतजार

बीएस संवाददाता /  May 11, 2020

मार्च की भारी गिरावट के बाद, विभिन्न देशों द्वारा मौद्रिक और राजकोषीय प्रोत्साहन और भारत सरकार तथा केंद्रीय बैंक द्वारा राहत दिए जाने की वजह से निफ्टी में 22 प्रतिशत की तेजी दर्ज की जा चुकी है। अभी भी कई आर्थिक संकेतक खतरे के निशान पर दिख रहे हैं और अर्थव्यवस्था में समस्याओं का संकेत दे रहे हैं। इससे यह भी संकेत मिलता है कि निफ्टी अभी भी अपनी 52 सप्ताह की ऊंचाई से 26 प्रतिशत नीचे क्यों बना हुआ है। कृषि से संबंध को छोड़कर, ज्यादातर क्षेत्रों से सुधार वित्त वर्ष 2021 की दूसरी छमाही (त्योहारी सीजन से शुरू) से लेकर आठ तिमाहियों तक के बीच ही देखा जा सकता है। हमने वाहन, वित्तीय सेवाओं, रिटेल और धातु क्षेत्रों में पैदा हुई समस्याओं, संभावित सुधार के समय और चुनौतियों के बीच मजबूती से डटी रहने वाली प्रमुख कंपनियों पर एक नजर :


वाहन एवं वाहन कलपुर्जा

फैक्टरियां बंद होने, आपूर्ति शृंखला प्रभावित होने, और शोरूम बंद रहने की वजह से अप्रैल में वाहन कंपनियों की बिक्री शून्य बनी रही, और जून तिमाही प्रभावित रहेगी। हालांकि कंपनियों ने उत्पादन पुन: चालू कर दिया है, लेकिन सीमित रिटेल नेटवर्क और रोजगार नुकसान तथा आय में कमी की वजह से कमजोर उपभोक्ता धारणा को देखते हुए त्योहारी सीजन (जो सितंबर में शुरू होता है) से पहले किसी बड़े बदलाव का आसार नजर नहीं आ रहे हैं। अगर हालात में सुधार आता है तो भी यह क्षेत्र वित्त वर्ष 2021 में 10-15 प्रतिशत की सालाना बिक्री गिरावट दर्ज कर सकता है, जबकि ज्यादातर खराब स्थिति में यह गिरावट 40 प्रतिशत तक रह सकती है। ट्रकों की बिक्री पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा, वहीं ट्रैक्टर और एंट्री-लेवल की मोटरसाइकलों में ग्रामीण खर्च की वजह से अच्छी रिकवरी दिख सकती है। नियामकीय मानकों (बीएस-6, बीमा) की वजह से वाहन लागत में वृद्घि इस क्षेत्र के लिए चिंता का अन्य कारण है।

ग्रामीण सेगमेंट पर केंद्रित हीरो मोटोकॉर्प, एमऐंडएम, और ऐस्कॉटï्र्स जैसी कंपनियां कम प्रभावित हो सकती हैं। दोपहिया में बजाज ऑटो और टीवीएस मोटर प्रभावित हो सकती है, क्योंकि इनके प्रमुख बाजार अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया हैं जो लॉकडाउन और तेल कीमतों में गिरावट की वजह से आई आर्थिक मंदी की वजह से प्रभावित हुए हैं।

बिक्री के प्रतिशत के तौर पर निर्धारित लागत 7 प्रतिशत (बजाज ऑटो) और 34 प्रतिशत (मदरसन सूमी) के बीच है। कम बिक्री और कमजोर परिचालन को देखते हुए ज्यादा कर्ज और निर्धारित लागत वाली बजाज ऑटो, हीरो मोटोकॉर्प, आयशर मोटर्स, और बालकृष्ण इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां बेहतर स्थिति में हैं। राम प्रसाद साहू


बैंकिंग एवं वित्तीय सेवा

निजी बैंकों में एक दशक लंबी तेजी पर कोविड-19 महामारी की वजह से विराम लग गया है, क्योंकि लॉकडाउन से बाजार बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी इससे अलग नहीं हैं। अप्रत्याशित वृद्घि दबाव को देखते हुए उनमें सुधार की राह चुनौतीपूर्ण दिख रही है। वहीं सकारात्मक बदलाव की स्थिति में विश्लेषकों को वित्त वर्ष 2021 में 7 से 11 प्रतिशत की ऋण वृद्घि का अनुमान है। ऋण वितरण अप्रैल में बंद रहा, इसलिए एक अंक की वृद्घि की संभावना है। अगर सरकार सभी क्षेत्रों, खासकर, छोटे एवं मझोले उद्यमों के लिए बड़ा राहत पैकेज प्रदान करती है तो इन अनुमानों में सुधार संभव है। फिर भी 16 से 20 प्रतिशत की पिछली वृद्घि दर इतिहास के तौर पर बनी रह सकती है।

कर्जदारों के लिए ऋण ईएमआई पर मई के अंत तक रोक लगी हुई है। अब तक इस नियामकीय छूट पर बहुत ज्यादा लोगों ने ध्यान नहीं दिया है। एक बार जब इस सुविधा को आगे बढ़ा दिया जाएगा तो यह निश्चित नहीं है कि मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए ग्राहकों से बकाया वसूली कितनी आसान होगी। बड़े आर्थिक प्रोत्साहन के अभाव के साथ साथ नियामक द्वारा ऋण स्थगन सुविधा में वृद्घि, और इसमें निजी बैंकों की 30-35 प्रतिशत की को देखते हुए बैंकों के लिए फंसे ऋण बढ़ सकते हैं। इसलिए, क्या यह क्षेत्र वित्त वर्ष 2022 में सुधार के लिए तैयार है, इसे लेकर स्थिति इस पर निर्भर करेगी कि वित्त वर्ष में बैंकों की वित्तीय गुणवत्ता कैसी रहती है उनके पूंजी पर्याप्तता अनुपात पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए हालात ज्यादा खराब हैं, क्योंकि उन्हें सितंबर 2018 के मुकाबले ज्यादा गंभीर नकदी संकट का सामना करना पड़ा है। 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारियों के साथ नकदी प्रवाह की स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। हंसिनी कार्तिक


रिटेल एवं क्यूएसआर

रिटेलरों और क्विक सर्विस रेस्टोरेंट्स (क्यूएसआर) कंपनियों का न सिर्फ व्यवसाय प्रभावित होगा बल्कि उन्हें घटते उपभोक्ता खर्च की आशंका से भी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

कुछ कंपनियों को छोड़कर, ज्यादातर को मार्च तिमाही में मुनाफे में नुकसान या गिरावट का सामना करना पड़ा है। विश्लेषकों को वित्त वर्ष 2021 की वृद्घि दरों में भारी गिरावट का अनुमान है क्योंकि सुधार सिर्फ दिसंबर के बाद से ही संभव है।

रिटेलरों के लिए, प्रभाव उत्पाद एवं वितरण मिश्रण पर निर्भर करेगा। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवायजरी सर्विसेज के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम का कहना है, 'गैर-जरूरी उत्पादों के रिटेलरों पर ज्यादा दबाव दिखेगा क्योंकि लॉकडाउन हटने के बाद डिस्क्रेशनरी यानी उपभोक्ताओं के अतिरिक्त खर्च में सुधार आने में कम से कम 6 महीने लगेंगे।'

इसे देखते हुए एडलवाइस सिक्योरिटीज ने खाद्य एवं किराना रिटेलरों (एसेंशियल) एवेन्यू सुपरमाटï्र्स और फ्यूचर रिटेल के लिए वित्त वर्ष 2021 के राजस्व अनुमानों में 4-7 प्रतिशत तक और अन्य कंपनियों के लिए 16-24 प्रतिशत की भारी कटौती की है। क्यूएसआर को ऑनलाइन वितरण और अपेक्षाकृत बेहतर सुधार से मदद मिल सकती है। लेकिन ऊंची लागत को देखते हुए रिटेलरों और क्यूएसआर की आय पर प्रभाव काफी ज्यादा हो सकता है। जहां विश्लेषकों का मानना है कि बड़ी कंपनियां किराया पट्टïों पर पुनर्विचार कर सकती हैं, हालांकि इससे कितना लाभ होगा, अभी यह तय नहीं है। ऋण और प्रवर्तक गिरवी (फ्यूचर रिटेल और फ्यूचर लाइफस्टाइल) अन्य चिंताएं हैं।  श्रीपाद ऑटे


धातु एवं खनन

लॉकडाउन के दौरान लौह और अलौह धातुओं, दोनों के लिए मांग प्रभावित हुई है। जहां लॉन्ग श्रेणी के इस्पात उत्पादों के लिए मांग धीमी बनी हुई है, क्योंकि ज्यादातर निर्माण गतिविधियां अभी बंद हैं, वहीं फ्लैट इस्पात (ऑटोमोबाइल और व्हाइट गुड निर्माताओं द्वारा इस्तेमाल) की मांग भी ठप है, क्योंकि उपभोक्ता उद्योग अभी बंद पड़े हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि इस्पात कीमतें लॉकडाउन शुरू होने से पहले मार्च में 15,00 रुपये प्रति टन तक गिर गई थीं और अब इनमें 1,000-1,500 रुपये तक की अन्य गिरावट आने की आशंका है। फ्लैट श्रेणी के इस्पात उत्पादों के लिए मांग में सुधार वाहनों की बिक्री पर निर्भर है, जिसमें मॉनसून के बाद त्योहारी सीजन से पहले ज्यादा सुधार के आसार नहीं दिख रहे हैं। निर्माण गतिविधियां पहली छमाही में सुस्त बने रहने की आशंका है, जिससे लॉन्ग इस्पात उत्पादों के लिए मांग पर दबाव बना रहेगा। अलौह क्षेत्र के लिए चुनौतियां ज्यादा बड़ी हैं। लॉकडाउन से न सिर्फ मांग प्रभावित हुई है बल्कि प्राप्तियां भी प्रभावित हुई हैं। इस क्षेत्र की प्राप्तियों में बड़ी कमी आई है। एल्युमीनियम, जस्ता, सीसा और तांबा की अंतरराष्ट्रीय कीमतें मार्च तिमाही में 9 से 21 प्रतिशत के बीच नीचे आ गई थीं और मौजूदा तिमाही में इनमें 7 से13 प्रतिशत की अन्य गिरावट आई है। विश्लेषकों का कहना है कि इसलिए इस क्षेत्र की कंपनियों के लिए मुनाफे में सुधार की राह लंबी होगी। उज्ज्वल जौहरी

 

एलटीपी लाभ की तुलना में नुकसान है, नुकसान से कंपनी द्वारा दर्ज किए गए या वित्त वर्ष 2020 के साथ साथ वित्त वर्ष 2021 में दर्ज किए जाने वाले नुकसान का संकेत मिलता है। स्रोत: ब्लूमबर्ग, आंकड़े: बीएस रिसर्च ब्यूरो द्वारा एकत्रित


बाजार हलचल

बैंकिंग शेयरों पर बढ़ रहा दबाव

बैंकिंग शेयरों में कमजोरी से भविष्य में बाजारों पर दबाव पडऩे का अनुमान है। मौजूदा समय में, बैंक निफ्टी का हाजिर भाव मई के बैंक निफ्टी वायदा अनुबंध के मुकाबले ऊपर बना हुआ है। एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे प्रमुख बैंकिंग शेयरों में कमजोरी है। विश्लेषकों का कहना है कि यह बैंकिंग शेयरों में मंदी की धारणा का संकेत है। वायदा की कीमतें कुछ ऊपर हैं। एक विश्लेषक ने कहा, 'बाजार को कुछ एफएमसीजी शेयरों और रिलायंस इंडस्ट्रीज में खरीदारी की वजह से मदद मिल रही है। बैंकों से स्पष्टï रूप से दबाव बढ़ रहा है।' सुंदर सेतुरामन


बड़े सौदों से बदल रहा एफपीआई का गणित

पिछले सप्ताह हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) जैसे बड़े सौदों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए आंकड़ों में बदलाव आ सकता है। पिछले गुरुवार के आंकड़े से पता चलता है कि एफपीआई ने घरेलू शेयरों में 19,056 करोड़ रुपये (2.5 अरब डॉलर) का निवेश किया था। इसमें ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन पीएलसी द्वारा एचयूएल में की गई भारत की सबसे बड़ी सेकंडरी बिक्री का बड़ा योगदान था। बाजार विश्लेषकों के अनुसार इसी तरह, शुक्रवार को एफपीआई ने 1,725 करोड़ रुपये की खरीदारी की जो लॉरस लैब्स में बड़े सौदे से संबंधित थी। बढ़ते एफपीआई प्रवाह से भारत में इस साल अब तक एफपीआई निवेश आंकड़े में सुधार लाने में मदद मिली है जो 4.5 अरब डॉलर की निकासी के मुकाबले अब 2 अरब डॉलर की निकासी से नीचे रह गया है। एक विश्लेषक ने कहा, 'ऐसा लगता है कि बड़े शेयरों में कुछ और बड़े सौदे हो सकते हैं। इसका मतलब होगा कि एफपीआई आंकड़ों में अच्छी तेजी आएगी, लेकिन इससे वास्तविक तस्वीर पर असर नहीं दिख सकता है।' मयंक पटवर्द्धन


एक लय में बढ़ रहे निफ्टी और निफ्टी फार्मा

निफ्टी-50 और निफ्टी फार्मा सूचकांंक पिछले सप्ताह लगभग 9,300 के स्तरों के करीब पहुंचे। हालांकि यह महज प्रतीकात्मक है, क्योंकि दोनों सूचकांक इस साल विपरीत राह पर आगे बढ़े थे। भारत की बड़ी 50 कंपनियों की शेयर कीमतों पर नजर रखने वाले निफ्टी ने वर्ष की शुरुआत 12,000 के स्तरों के साथ की थी। दूसरी तरफ, हेल्थकेयर शेयरों के प्रदर्शन का मापक निफ्टी फार्मा वर्ष के शुरू में 8,000 पर था। एक विश्लेषक ने कहा, 'वर्ष के शुरू के दौरान, फार्मा शेयर मुश्किल से ही किसी के पसंदीदा था। पिछले एक महीने में इनकी लोकप्रियता बढ़ी है।' मौजूदा समय में ये दोनों सूचकांक समान स्तरों पर हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि 2020 के अंत में कौन किस स्तर पर बंद होता है। समी मोडक

 

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