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कोरोना से देश की आर्थिक राजधानी के बिगड़ते हालात

सोहिनी दास और सचिन मामबटा / मुंबई May 10, 2020

बृहन्मुंबई महानगरपालिका के नए प्रमुख इकबाल चहल ने कार्यभार संभालने के बाद शनिवार को सबसे पहले देश की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी का दौरा किया। यह मुंबई में कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के मुख्य केंद्र से जुड़े मामलों पर भी प्रकाश डालता है।

भारत की आर्थिक राजधानी में प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 20,634 से अधिक लोग रहते हैं और इन क्षेत्रों में कोरोनावायरस संक्रमण की पहचान करना तथा इन पर रोक लगाना प्रशासन के लिए पहले से ही बड़ी चुनौती थी। वल्र्ड पॉपुलेशन रिव्यू वेबसाइट के अनुसार मुंबई की लगभग 41.3 प्रतिशत आबादी झुग्गियों में रहती है, जिनमें करीब 90 लरख लोग शामिल हैं। 535 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले धारावी में 5,000 व्यवसाय (लगभग 15,000 एकल कमरे वाले कारखानों) हो रहे हैं।

एक प्रमुख निजी अस्पताल के चिकित्सा निदेशक ने कहा, 'मुंबई में इस तरह के जनसंख्या घनत्व के साथ कोविड-19 के प्रसार पर लगाम लगाना लगभग असंभव है। यहां ऐसे रोगी भी हैं जो उपचार के बाद ठीक होने पर भी घर नहीं जाना चाहते, क्योंकि उन्हें अपने रहने वाली तंग-छोटी जगह से बेहतर अस्पताल के कमरे लग रहे हैं।'

कुछ अनुमानों के अनुसार मई के अंत तक संक्रमण के मामलों की संख्या 75,000 तक पहुंच सकती है और हालिया स्थिति अस्पताल प्रशासन को अस्पताल प्रवेश नीतियां सख्त बनाने पर मजबूर कर रही है। कोविड-19 रोगियों के संपर्क में आने के जोखिम वाले लोगों को घर पर ही रहने के लिए कहा जा रहा है। उन्हें पहले कोविड केयर सेंटर (सीसीसी) ले जाया गया था।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पूछा, 'मुंबई में कितने लोगों के पास एक बड़े कमरे के साथ संलग्न शौचालय की सुविधा है?' इसीलिए बीएमसी ने ऐसे लोगों को रखने का फैसला किया है जो छोटे घरों (परिवार के कई सदस्यों के साथ साझा करने वाले घरों) में रहते हैं या क्वारंटीन केंद्रों में सामुदायिक शौचालय का उपयोग करते हैं।

शहर में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने का काम भी जोरों से चल रहा है और इस समय लगभग 7,500 बिस्तर तैयार हैं। निजी अस्पतालों में अन्य 5,000 बिस्तरों का प्रबंध किया गया है। मोटे तौर पर अनुमान है कि शहर में कुल 750 आईसीयू बिस्तर हैं।

मुंबई के बड़े खुले स्थानों, जैसे महालक्ष्मी रेसकोर्स, माहिम नेचर पार्क, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स ग्राउंड, अंधेरी स्पोटï्र्स कॉम्प्लेक्स और रिचर्डसन आदि को मेक-शिफ्ट क्वारंटीन केंद्र या सीसीसी में परिवर्तित किया जा रहा है। इसके अलावा लगभग 350 नगरपालिका स्कूल, होटल, छात्रावास, मैरिज हॉल, जिमखाना आदि में पृथकवास बेड बनाए गए हैं।

इन मामलों से करीब से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा, 'लगभग 25,000 पृथकवास बेड तत्काल बनाए जा सकते हैं और शहर प्रशासन ने स्कूल, होटल, हॉस्टल आदि को मिलाकर 35,000 बिस्तरों की पहचान की है। मई के अंत तक लगभग पूरा मुंबई 'कोरोनावायरस शहर' का रूप धारण कर लेगा।'

हालांकि सवाल यह है कि दूसरे शहरों के मुकाबले मुंबई की स्थिति अधिक खराब क्यों हुई? इसमें सबसे पहला दोष जनसंख्या घनत्व का है। हालांकि इसके साथ ही कई स्तर पर सरकारी तंत्र में समन्वय का भी अभाव था।

शहर के चार नगर निगमों, बीएमसी, कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी), नवी मुंबई नगर निगम (एनएमएमसी) और ठाणे नगर निगम (टीएमसी) ने शायद ही आपस में तालमेल बिठाकर काम किया है।

एक प्रमुख कॉर्पोरेट अस्पताल के प्रमुख ने कहा, 'मुंबई में कम से कम तीन स्थानों, मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ), बीएमसी आयुक्त और कार्यबल द्वारा निर्देश दिए जा रहे थे। इससे केवल भ्रम पैदा होता है।'

उदाहरण के लिए, 8 मई के  सप्ताहांत में परीक्षण से जुड़े नियमों को लेकर काफी भ्रम देखा गया। पहले यह आदेश जारी किया गया कि कोई भी निजी चिकित्सक कोविड-19 परीक्षण के लिए नहीं लिख सकता और केवल सरकारी अधिकारी ही परीक्षण कराने के लिए लिख सकता है। साथ ही, परीक्षण के लिए स्वाब नमूना देने के लिए सभी को बीएमसी क्वारंटीन केंद्र में ही जाना होगा। हालांकि शनिवार को इस आदेश को रद्द कर दिया। सहायक नगर आयुक्त सुरेश काकानी ने मीडिया को बताया कि अब निजी चिकित्सक लक्षण दिखाई देने पर सलाह लिख सकते हैं।

सूत्र बताते हैं कि बीएमसी अधिकारी पहले के आदेश के बारे में आश्वस्त नहीं थे क्योंकि उन्हें लगता था कि इससे लोगअपने लक्षण सार्वजनिक करने से बचेंगे। जैसे, कुछ मरीज अपना गलत पता लिखा रहे थे जिससे उनके परिवार के लोगों को क्वारंटीन केंद्र पर न लाया जाए। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को स्वीकार किया कि भले ही राज्य सरकार के प्रयासों से संक्रमण के प्रसार की दर धीमी हुई है लेकिन अभी यह चेन नहीं टूटी है।

मुंबई के सायन अस्पताल में काम करने वाले पोस्ट ग्रैजुएट मेडिकल छात्र ने कहा कि वे संदिग्ध मरीजों के परिवार के सदस्यों को बिना परीक्षण ही घर जाने के लिए कह देते हैं। हाल ही में सायन अस्पताल मरीजों के कमरों में ही शव रखे जाने को लेकर चर्चा में आया था। अस्पताल के युवा चिकित्सक ने कहा, 'लोग बहुत दूर-दूर से टैक्सी करके आते हैं। संदिग्ध मरीज के बारे में अंतिम परिणाम अगले दिन ही पता चलता है। संदिग्ध के परिवार वालों को क्वारंटीन करने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए वे घर चले जाते हैं।'

उन्होंने बताया कि सायन अस्पताल में बहुत अधिक रोगी आ रहे हैं। लगभग 80 फीसदी रोगी गंभीर रूप से बीमार हैं और अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में जीवन रक्षक प्रणालियां नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'हम लगभग हर दूसरे या तीसरे दिन 40 बेड का कोविड वार्ड तैयार कर रहे हैं। फिर भी हम आने वाले मरीजों के प्रवाह को संभालने में असमर्थ हैं।' उन्होंने कहा कि अब एक ही ऑक्सीजन पोर्ट पर दो से तीन मरीजों को रखा जा रहा है। यहां तक कि केईएम अस्पताल लगभग रोज एक नया कोविड-19 वार्ड तैयार कर रहा है। केईएम के डीन हेमंत देखमुख ने कहा कि अस्पताल में रोजाना कम से कम 40 कोविड मरीज आ रहे हैं।

वहीं, सायन अस्पताल के चिकित्सकों का दावा है कि सेवन हिल्स में कोविड-19 के लिए विशेष रूप से तैयार अस्पताल में 500 से ज्यादा बिस्तरों की सुविधा है। हालांकि सूत्रों का दावा है कि सेवन हिल्स में केवल 20-30 आईसीयू बेड उपलब्ध हैं और उपरोक्त आंकड़ा बीएससी से भी सत्यापित नहीं हो सका। कई लोगों का कहना है कि मुंबई को पहले से ही कोविड-19 के लिए अलग अस्पतालों की जरूरत थी। इससे मरीजों को किसी भी जगह जाने से रोका जा सकता था जबकि ऐसा नहीं करने से संपूर्ण स्वास्थ्य प्रणाली ही संक्रमित हो गई। कर्मचारियों को कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद यहां के कई निजी अस्पतालों को सील कर दिया गया था। अप्रैल के मध्य में जाकर बीएमसी को अहसास हुआ कि केवल अस्पतालों को बंद करना इसका हल नहीं है और उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों को सैनिटाइज कराते हुए खुला रखने का फैसला लिया।

अस्पताल के एक प्रमुख ने कहा, 'सेवन हिल्स शुरू से ही रोगियों को एक जगह रखने का सबसे अच्छा विकल्प था। यह शहर के केंद्र में है, और खाली पड़ा हुआ था। हालांकि, बीएमसी दूसरे अस्पतालों में कोविड रोगियों को ले जाने की अनुमति देता रहा। सेवन हिल्स को सही तरीके से व्यवस्थित किए जाने की आवश्कता थी।' उन्होंने कहा कि बड़े निजी अस्पताल भी रोटेशन प्रक्रिया के तहत इसका प्रबंधन कर सकते थे। रिलायंस इंडस्ट्रीज इस समय सेवन हिल्स में 220 से अधिक बिस्तरों की सुविधाएं उपलब्ध करा रही है।

मुंबई अब आईसीयू बिस्तरों की संख्या को बढ़ा रहा है और यहां अगले दो सप्ताह में 1,200 क्रिटिकल केयर बेड की आवश्यकता है। वर्तमान में लगभग 3,000 बिस्तरों पर ऑक्सीजन सुविधा उपलब्ध है। इन्हें भी अगले पखवाड़े तक बढ़ाकर 5,000 करने की जरूरत है। हालांकि स्वास्थ्य क्षेत्र के पेशेवरों का कहना है कि अभी तक शहर में ऑक्सीजन की आपूर्ति से जुड़ा किसी भी तरह का संकट सामने नहीं आया है।

वेंटिलेटर भी ऑर्डर कर दिए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ई-आईसीयू बनाने की जरूरत है जहां एक वरिष्ठ चिकित्सक दूर बैठकर कई रोगियों की एक साथ निगरानी कर सके।

आगे मॉनसून के रूप में मुंबई के सामने एक बड़ी चुनौती आ रही है। मूसलाधार बारिश के लिए जाना जाने वाला यह शहर कोविड संक्रमण के मामलों में होने वाली वृद्धि को संभालने के लिए तैयार नहीं है और कुछ अनुमानों में दावा किया गया है कि शहर में जून-जुलाई माह में संक्रमण के मामले शीर्ष पर होंगे। चहल ने संकेत दिया है कि मॉनसून के लिए तैयार होना इस समय की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। हालांकि बीएमसी में हुए इस प्रशासकीय बदलाव से आने वाले सप्ताहों में किस तरह स्थिति बदलेगी, इसे लेकर शहर के चिकित्सा हलकों में चिंता है।

 

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