बिजनेस स्टैंडर्ड - पड़ोसी देशों से निवेश पर अंकुश
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पड़ोसी देशों से निवेश पर अंकुश

श्रीमी चौधरी और शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली 05 10, 2020

सरकार चीन समेत सात पड़ोसी देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर 10 फीसदी 'लाभप्रद स्वामित्व' की सीमा लगा सकती है। इन देशों की निवेशक कंपनी या व्यक्ति को इस सीमा से अधिक निवेश करने के लिए सरकार की मंजूरी लेनी होगी।

यह 10 फीसदी सीमा कंपनी अधिनियम 2013 के तहत अहम लाभप्रद स्वामित्व (एसबीओ) के नियमों की तर्ज पर है। उन नियमों के मुताबिक अगर ऐसे निवेशक खुद के बारे में जानकारी नहीं देते हैं तो कंपनियों को ऐसे स्वामियों की पहचान करने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। इस परिभाषा के तहत अहम लाभप्रद स्वामियों (एसबीओ) को अपने स्वामित्व, शेयरधारिता ढांचे आदि के बारे में अनिवार्य रूप से विस्तृत घोषणा करनी होगी। इससे सरकार को बेनामी लेनदेन की पहचान करने और काले धन को सफेद बनाने की गतिविधियों को रोकने में मदद मिलती है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार ने 10 फीसदी की सीमा इसलिए रखी है क्योंकि वह चीन से मौजूदा एफडीआई पर दबाव नहीं बढ़ाना चाहती है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभागों और मंत्रालयों की राय पर विचार-विमर्श करने के बाद इस पर जल्द एक व्यापक अधिसूचना जारी होने के आसार हैं।

इस कदम से सरकार को मौकापरस्त विदेशी कंपनियों के आक्रामक अधिग्रहण से घरेलू कंपनियों को बचाने में मदद मिलेगी, विशेष रूप से इन देशों की कंपनियों से। इस कदम से यह स्पष्टता भी आएगी कि विदेशी निवेशकों को अप्रैल में घोषित नए एफडीआई नियमों की किस तरह व्याख्या करनी चाहिए। इन नियमों के तहत भारत के सीमावर्ती देशों से आने वाले निवेश के लिए सरकार से पहले मंजूरी लेना जरूरी होगा।

सूत्रों ने कहा कि इस घोषणा के बाद विभिन्न भागीदारों, वकीलों और कस्टोडियन ने स्पष्टता के लिए सरकार से संपर्क किया था। इसके चलते सरकार ने स्वामित्व की परिभाषा की समीक्षा करने का फैसला लियाा। इस समय एफडीआई नीति के तहत लाभप्रद स्वामित्व को लेकर कोई कानूनी परिभाषा या नियम नहीं हैं। इससे बड़े निजी इक्विटी फंडों या वेंचर कैपिटल कंपनियों के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है।

एक अधिकारी ने कहा कि उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग 'लाभप्रद स्वामित्व' की मौजूदा घरेलू परिभाषा को अपनाने के पक्ष में है, जिसमें विदेशी निवेश के उद्देश्य के लिए इसे कंपनी के 10 फीसदी शेयर माना गया है। हालांकि अंतिम फैसला गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के सुझावों पर विचार-विमर्श करने के बाद लिया जाएगा।

सूत्रों ने कहा कि नई परिभाषा का दायरा वैश्विक होगा, जिसमें सभी देशों से आने वाला निवेश शामिल होगा। हालांकि मौजूदा या भविष्य में एफडीआई के स्वामित्व के हस्तांतरण के लिए सरकार की अनिवार्य रूप से मंजूरी का नया नियम केवल उसी स्थिति में लागू होगा, जब इन सात पड़ोसी देशों के नागरिकों या कंपनियों के पास किसी भारतीय कंपनी में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 10 फीसदी शेयर या मत अधिकार होंगे।

 

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