बिजनेस स्टैंडर्ड - कृषि पर कोविड-19 का असर कम रहने की संभावना
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कृषि पर कोविड-19 का असर कम रहने की संभावना

नम्रता आचार्य /  May 09, 2020

बीएस बातचीत

कोविड-19 के कारण शहरों से बड़ी आबादी गांव की ओर चली गई है। ऐसे में राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की भूमिका अहम है, जो ग्रामीण विकास के वित्तपोषण का शीर्ष वित्तीय निकाय है। नाबार्ड के चेयरमैन हर्ष कुमार भानवाला ने नम्रता आचार्य से टेलीफोन पर बातचीत में कृषि और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के बारे में अपना दृष्टिकोण रखा। प्रमुख अंश...

नाबार्ड के विशेष रिफाइनैंस सुविधा की क्या स्थिति है, जो भारतीय रिजर्व बैंक ने उपलब्ध कराया है?

चालू वित्त वर्ष 2020-21 में हमने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) और ग्रामीण सहकारी को 12,000 करोड़ रुपये से ज्यादा नया कर्ज दिया है। रिजर्व बैंक ने हमें 25,000 करोड़ रुपये का रिफाइनैंस विंडो दिया है। रिजर्व बैंक की सुविधा एक साल के लिए है। हम अपने संसाधनों को इसमें मिलाकर ग्रामीण वित्तीय संस्थानों के संसाधनों में बढ़ोतरी करेंगे।


25,000 करोड़ की सुविधा में से आरआरबी और सहकारी को कितना मिलेगा?

इस सुविधा में से मैं उम्मीद करता हूं कि 20,000 करोड़ रुपये उनको मिलेंगे।


छोटे एमएफआई का कहना है कि वे आपकी सहायक इकाइयों से वित्तपोषण को इच्छुक हैं, आपकी राय?

मानकों के मुताबिक सीधे उन्हें वित्तपोषण करने या बड़े एमएफआई के माध्यम से ऐसा करने को लेकर हमारे विकल्प खुले हैं।


कोविड के कृषि पर असर को लेकर क्या आकलन है?

कृषि के कुछ क्षेत्रों में चुनौतियां हैं, लेकिन इस क्षेत्र पर कोविड-19 का सबसे कम असर पडऩे की संभावना है। हम इस साल बेहतर उत्पादन की उम्मीद कर रहे हैं और अगले साल की तैयारी भी अच्छी है। खरीद भी कमोवेश कार्यक्रम के मुताबिक ही चल रही है।


क्या अनाज उठाने को लेकर दिक्कत नजर आ रही है?

फिलहाल स्थिति खराब नहीं है। इस साल पीडीएस के माध्यम से मांग ज्यादा रहने की संभावना है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग गांव मेंं जा रहे हैं और ऐसे में उनकी खाद्य जरूरतें बढ़ेंगी। दरअसल यह स्टॉक उनकी मांग पूरी करने के काम आएगा।


इस साल खरीफ के कर्ज की उठान पर आपका क्या आकलन है?

सामान्यतया खरीफ के लिए कर्ज लिया जाना मई के मध्य में शुरू होता है। कर्ज का प्रवाह मसला नहीं है। अगर किन्हीं छोटे बैंकों में कोई कमी आती है तो हम कोशिश कर रहे हैं कि हम तेज रिफाइनैंस सपोर्ट के माध्यम से उस अंतर को हम पूरा कर दें। 


इस साल किस तरह का कृषि ऋण लिए जाने की आप उम्मीद कर रहे हैं?

इस साल कृषि ऋण का लक्ष्य 15 लाख करोड़ रुपये है। इसमें से 9 लाख करोड़ रुपये फसल ऋण के लिए रखा गया है। हमें भरोसा है कि यह लक्ष्य हासिल हो जाएगा।


खासकर एग्री इन्वेस्टमेंट के लिए दीर्घावधि ऋण की क्या योजना है?

ऑटोमोबाइल क्षेत्र में ट्रैक्टरोंं की बिक्री सकारात्मक है। मुझे कृषि उपकरणों को किराये पर लेने की धारणा भी दिख रही है। नए लोगों का समूह इन सेवाओं की पेशकश कर रहा है। ऐसे में उनकी ओर से मांग आएगी। विस्थापित श्रमिक अपने गांव की ओर लौट रहे हैं, ऐसे में मजदूरों के संकट वाले इलाकों में कृषि का तेजी से मशीनीकरण भी होगा। किसानों के तमाम संगठन सक्रियता से कृषि उत्पादों की खरीद कर स्थानीय स्तर पर आपूर्ति कर रहे हैं। वे बड़ी मूल्य शृंखला से जुडऩे की भी कवायद कर रहे हैं। एपीएमसी के बाहर सीधी खरीद की कवायद भी तेज हो रही है। 


क्या कर्ज टालने की छूट को लेकर आपने अतिरिक्त प्रावधान किए हैं?

हमने फूड पार्कों, गोदामों को रिजर्व बैंक के निर्देशों के मुताबिक कर्ज टालने की सुविधा दी है।

Keyword: NABARD, Harsh Kumar Bhanwala, Agriculture, Rural Development, कृषि, कोविड-19, ग्रामीण विकास, नाबार्ड,
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