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रेटिंग व्यवधान से लगेगा झटका : एजेंसियां

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली May 07, 2020

क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने बाजार नियामक सेबी से कहा है कि कोरोनावायरस के कारण हुए लॉकडाउन के बीच मोरेटोरियम यानी कर्ज भुगतान के लिए मोहलत दिए जाने से रेटिंग प्रक्रिया में हुए व्यवधान का वित्तीय बाजारों पर असर पड़ सकता है।

सूत्रों ने कहा कि सेबी ने पिछले हफ्ते क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के आला अधिकारियों की बैठक पिछले हफ्ते बुलाई थी, जो आर्थिक स्थिति पर चर्चा करने और क्रेडिट गुणवत्ता के परिदृश्य पर अद्यतन जानकारी पाने के लिए हुई थी।

यह बैठक एनबीएफसी की तरफ से जारी 2.5 लाख करोड़ रुपये के ऋणपत्रों की परिपक्वता से पहले बुलाई गई थी। इन प्रतिभूतियों का बड़ा हिस्सा लॉकडाउन के कारण हुए नकदी व भुगतान संकट से पुनर्भुगतान की चुनौतियों की सामना कर रहा है।

सूत्रों ने कहा कि रेटिंग एजेंसियों ने सेबी को वैसे कॉरपोरेट बॉन्ड व वाणिज्यिक प्रतिभूतियों पर रेटिंग की कवायद के बारे मेंं जानकारी दी जो आरबीआई के मोरेटोरियम के दायरे में नहीं है और उन पर तत्काल कदम उठाए जाना था। सेबी खास तौर से इन प्रतिभूतियों को लेकर चिंतित है क्योंकि इनमें म्युचुअल फंडों का खासा निवेश है, जिसका वह विनियमन करता है। पिछले महीने आरबीआई ने म्युचुअल फंडोंं को 50,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी की सुविधा मुहैया कराई थी। सूत्रों ने कहा कि सेबी और रेटिंग एजेंसियों ने कर्ज भुगतान की तीन महीने की मोहलत में बढ़ोतरी की संभावना पर भी विचार किया। रेटिंग फर्मों ने कहा कि रेटिंग की कवायद को टालने से बैंकिंग व्यवस्था पर जोखिम देखने को मिलेगा।

रेटिंग एजेंंसियों ने देनदारों की श्रेणियोंं को रेखांकित किया, जो कर्ज भुगतान में चूक में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कर रहे हैं। एजेंसी ने कहा, खुदरा देनदार और छोटे कारोबारों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।

रेटिंग फर्मों ने एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि एसएमई क्षेत्र में फंसे कर्ज में बढ़ोतरी हुई है। खुदरा देनदारों के लिए बेरोजगारी, छंटनी और वेतन कटौती इस दबाव की मुख्य वजहें हैं और अगर अर्थव्यवस्था मंदी की ओर फिसलती है तो खुदरा देनदारों की तरफ से चूक दोगुनी हो सकती है।

रेटिंग फर्मों ने वित्तीय क्षेत्र पर दबाव को भी रेखांकित किया। एक सूत्र ने कहा, रियल एस्टेट डेवलपर नकदी की बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिसके कारण फंसे कर्ज में और बढ़ोतरी हो सकती है।क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने कुछ निश्चित कर्ज पर सॉवरिन गारंटी के स्थायित्व का मसला उठाया और यह भी कहा कि क्या उधार देने के लिए निजी लेनदारों की खातिर पर्याप्त गारंटी उपलब्ध है। सेबी ने रेटिंग फर्मों के लिए दिशानिर्देश जारी किया था और उनसे कहा था कि उन कंपनियों को वह डिफॉल्ट का तमगा न दे जो मौजूदा राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण बकाया नहीं चुका पा रही हैं।

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