बिजनेस स्टैंडर्ड - महामारी से जंग और फर्जी खबरों की बाढ़
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, June 03, 2020 07:11 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

महामारी से जंग और फर्जी खबरों की बाढ़

तकनीकी तंत्र
देवांशु दत्ता /  May 06, 2020

फरवरी के मध्य से ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कोरोनावायरस को लेकर 'इन्फोडेमिक' यानी गलत सूचनाओं के प्रसार के बारे में चेतावनी देता रहा है। इन्फोडेमिक की स्थिति में सूचनाओं की भरमार होती है लेकिन जरूरी नहीं कि वे सही हों। तथ्यों, फर्जी खबरों और विशुद्ध रूप से अटकलबाजियों की मिली-जुली बमबारी नागरिकों एवं नीति-निर्माताओं की जिंदगी को काफी मुश्किल बना देती है।

इस वायरस के उद्गम के बारे में निराधार साजिश की गंध तलाशने वाले सिद्धांत पेश किए गए हैं। जबकि वैज्ञानिकों के बीच इस बात पर लगभग सहमति है कि वायरस को प्रयोगशाला में नहीं बनाया गया। हमें इसके इलाज के बारे में भी तमाम बेसिर-पैर की बातें देखने-सुनने को मिली हैं।

किसी तरह की चिकित्सकीय पृष्ठभूमि न रखने वाली प्रमुख हस्तियों ने होम्योपैथी, गोमूत्र के सेवन और शरीर पर तेज चमक वाली रोशनी और पराबैगनी किरणें डालने जैसे इलाज सुझाए हैं। ऐसी इलाज-पद्धतियां भी देखने को मिली हैं जो पीएच स्तर बदल देने का दावा करती हैं। धार्मिक गुरुओं ने कहा है कि पूजा-पाठ एवं नमाज से कोरोना से बचा जा सकता है।

कुछ मशहूर गैर-वैज्ञानिकों ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन को संभावित कोविड-हत्यारा बताया है। इस दवा का क्लिनिकल परिवेश में परीक्षण किया गया लेकिन इसे कोरोनावायरस के खिलाफ कारगर न पाए जाने के बाद नकार दिया गया क्योंकि इसके खतरनाक पश्चवर्ती प्रभाव भी देखे गए। इसके बावजूद इस दवा की आपूर्ति को लेकर गंभीर किस्म का कूटनीतिक विवाद पैदा हो गया था।

कुछ टिप्पणीकारों ने यह भी कहा है कि वायरस गर्म वातावरण में मर जाएगा लेकिन उन्होंने इस बात को नजरअंदाज किया है कि खाड़ी देशों और ऑस्ट्रेलिया के गर्म मौसम में भी यह खूब फैला है। हमने कुछ आशावादियों को चंद दिनों में ही वैक्सीन बन जाने का दावा करते हुए देखा है। यह बात सच है कि दुनिया भर में करीब दर्जन भर टीमें वैक्सीन तैयार करने की कोशिशों में लगी हुई हैं लेकिन अब तक सबसे जल्द तैयार की गई वैक्सीन के बनने में भी चार साल से अधिक लग गए थे। ऐसे में अगर कोई वैक्सीन वाकई में वर्ष 2020 में आ जाती है तो यह चमत्कार ही होगा। यहां तक कि 2021 में भी वैक्सीन का आना किसी सुखद आश्चर्य से कम नहीं होगा। सोशल मीडिया के इस दौर में इन सभी गतिरोधों और भुलावों को वीडियो एवं ग्राफिक्स की शक्ल में परोस दिया गया और लगातार फॉरवर्ड होते हुए अब तक इन्हें एक अरब से भी अधिक लोग देख चुके हैं। इनका बड़ा हिस्सा खतरनाक रूप से बकवास है और इनमें भारी मीडिया पहुंच रखने वाले बड़े नेताओं की भी इसमें बड़ी भूमिका है। आखिर कोई स्वास्थ्य से संबंधित गलत सूचनाओं एवं फर्जी खबरों के फैलाव को कोई कैसे रोक सकता है? पहली बात तो यह है कि मीडिया को छद्म-विज्ञान पर आधारित खबरों को प्रमुखता से कवरेज बंद करने की जरूरत है। ब्लीच थेरेपी और गोमूत्र जैसे दावों को लेकर 'संतुलित कवरेज' देने का सवाल ही नहीं खड़ा होना चाहिए।

दूसरा, पहले से ही कम शोध संसाधनों को वैज्ञानिक आधार के बगैर स्वप्निल इलाज एवं थेरेपी के परीक्षण में नहीं लगाया जाना चाहिए। दुर्भाग्य से भारत समेत कई देशों में कई मंत्रालय इस काम में लगे हुए हैं। होम्योपैथी और गोमूत्र से इलाज जैसी चीजों के लिए सार्वजनिक कोष के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन या रेमडेसिविर जैसी दवा काम करे या न करे, लेकिन उसे क्लिनिक स्तर पर डॉक्टरी प्रयोग एवं परीक्षण के दौर से गुजरने की जरूरत है। दुर्भाग्य की बात है कि महामारी के दौरान शोध के स्वर्णिम मानकों का पालन कर पाना संभव नहीं हो सकता है। ऐसे परीक्षणों में हरसंभव स्तर तक दृढ़ता बरती जानी चाहिए। अमेरिकी दवा कंपनी गिलियड की संभावित रूप से कारगर दवा रेमडेसिविर के अधिक शक्तिशाली संस्करण का परीक्षण किया जा रहा है। इसका प्रयोगशालाओं में परीक्षण हो चुका है और अब आपात आधार पर इसका परीक्षण चल रहा है।

शोधकर्ताओं को विकास के अलग स्तरों वाली दवाओं एवं वैक्सीन के बारे में सुसंगत जानकारी की जरूरत है। वैज्ञानिकों को बेहतर संचारक बनने की जरूरत है और मीडिया को वैज्ञानिकों के साथ संवाद के बेहतर तरीके जानने की दरकार है। यह एक दोतरफा प्रक्रिया है।

वैज्ञानिकों को यह सीखना है कि एक आम आदमी उनके विषय को किस तरह समझ सकता है। वैज्ञानिकों को यह भी सीखना होगा कि जनसाधारण की समझ में आने वाली जबान में गलत धारणाओं को किस तरह खारिज करना है। उसी के साथ मीडिया को वैज्ञानिकों द्वारा किए गए वास्तविक दावों (संभवत: गलत लेकिन प्रशंसा-योग्य) और ढोंगियों के दावों के बीच फर्क करना भी सीखना होगा।

मसलन, जब यह दावा किया जाता है कि क्वांटम भौतिकी की वजह से होम्योपैथी का कोई इलाज कोरोनावायरस पर असरदार है तो वैज्ञानिकों को सामने आकर यह साफ-साफ कहना चाहिए कि यह कारगर नहीं है। इसी तरह से जब मिस यूनिवर्स स्पद्र्धा का पूर्व प्रस्तोता यह कहता है कि ब्लीच निगलना या शरीर पर चमकीली रोशनी डालने से इस वायरस को खत्म किया जा सकता है तो डॉक्टरों को सामने आकर कहना चाहिए कि 'नहीं, ब्लीच तो जहर है।'

सरकारों को भी गलत सूचनाओं से निपटने में अहम भूमिका निभानी है। वरिष्ठ अफसरशाह और नेताओं को छद्मवैज्ञानिक बयानों से परहेज करना चाहिए। नीति-निर्माताओं को अस्तित्वहीन बकवास इलाजों पर छद्मवैज्ञानिक शोध के लिए पैसे देने से भी बचना चाहिए। अधिकारियों को फर्जी खबरें एवं अफवाहों को खारिज करने के साथ यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि खंडन को मुख्यधारा के मीडिया एवं सोशल मीडिया पर प्रमुखता से जगह मिले।

Keyword: WHO, Infodemic, Covid-19, Health, Treatment, महामारी, फर्जी खबर, डब्ल्यूएचओ, गलत सूचना, इन्फोडेमिक, होम्योपैथी, गोमूत्र,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या प्रधानमंत्री के आश्वासन के बाद उद्योग जगत में लौटेगा आत्मविश्वास?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.