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अरविंद फैशंस ने भुगतान पर रोक का विकल्प अपनाया

अभिजित लेले / मुंबई May 05, 2020

अहमदाबाद के लालभाई समूह की इकाई अरविंद फैशंस लिमिटेड (एएफएल) ने अपनी ऋण अदायगी को कुछ समय तक रोकने के विकल्प का सहारा लिया है। कोविड-19 की वजह से लागू लॉकडाउन की वजह से कंपनी को स्टोर बंद होने से वित्तीय चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। 

कोविड-19 राहत उपायों के तौर पर आरबीआई ने 27 मार्च, 2020 को बैंकों से कर्जदारों के ऋण भुगतान पर तीन महीने की रोक यानी तीन महीने तक ईएमआई नहीं चुकाने का विकल्प मुहैया कराने को कहा था।

कंपनी परिचालन पर प्रभाव और मांग में कमी की भरपाई करने के लिए खर्च में कटौती करने जैसे कई कदम उठा रही है। रेटिंग एजेंसी केयर के अनुसार, कंपनी के प्रवर्तक 50 करोड़ रुपये के असुरक्षित ऋणों को आगे बढ़ा रहे हैं और अप्रैल 2020 में बैंकों द्वारा स्वीकृत 40-545 करोड़ रुपये की आपात ऋण सीमा का इस्तेमाल कर रहे हैं। एएफएल अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाइयों और दो संयुक्त उपक्रमों (जेवी) के जरिये भारत में अपने स्वयं के और लाइसेंस प्राप्त परिधानों की थोक एवं खुदरा बिक्री करती है। कंपनी के टेक्सटाइल ब्रांडों में एरो, जीएपी, टोमी हिलफिगर, कैल्विन क्लीन, फ्लाइंग मशीन और सेफोरा मुख्य रूप से शामिल हैं।

केयर ने एएफएल की बैंक देनदारियों की दीर्घावधि रेटिंग पर अपना नजरिया 'स्टेबल' से बदलकर 'निगेटिव' कर दिया है जिससे कोविड-19 महामारी की वजह से उसके रिटेल आउटलेटों के अस्थायी तौर पर बंद रहने के कारण एएफएल के क्रेडिट प्रोफाइल पर विपरीत प्रभाव का पता चलता है।

कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए कदमों को देखते हुए देश में एएफएल ने अपने सभी स्टोरों का परिचालन रोक दिया है। इससे मध्यावधि में कंपनी के मुनाफे पर प्रभाव पड़ सकता है।

समेकित स्तर पर कंपनी की नकदी स्थिति ऋण रोक की वजह से अनुकूल बने रहने की संभावना है। कंपनी का परिचालन कार्यशील पूंजी केंद्रित है, क्योंकि उसे अपने रिटेल व्यवसाय में बड़ी तादाद में माल मौजूद रखना पड़ता है।

वित्त वर्ष 2019 में एएफएल की कार्यशील पूंजी उधारी बढ़ गई थी। यह 31 मार्च 2018 के 785 करोड़ रुपये से बढ़कर 31 मार्च, 2019 तक 879 करोड़ रुपये हो गई। वहीं 31 दिसंबर 2019 तक यह बढ़कर 967 करोड़ रुपये पर पहुंच गई थी।

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