बिजनेस स्टैंडर्ड - 'मांग बढ़ाने के लिए लोगों के हाथों में दिया जाए पैसा'
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, May 26, 2020 11:20 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

'मांग बढ़ाने के लिए लोगों के हाथों में दिया जाए पैसा'

आदिति फडणीस /  May 05, 2020

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अभिजित बनर्जी ने कोविड-19 संकट के आर्थिक दुष्प्रभावों पर मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ वीडियो चर्चा में कहा कि भारत में एक बड़े प्रोत्साहन पैकेज की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मांग पैदा करने के लिए यह पैसा नकद अनुदान के रूप मे लोगों के हाथ में दिया जाना चाहिए, भले ही इसके कुछ हिस्से का गबन हो जाए।

बनर्जी ने कहा कि इस कार्य में राज्य सरकारों को एनजीओ की मदद लेनी चाहिए ताकि यह पैसा उन लोगों तक पहुंचाया जा सके, जिन्हें इसकी जरूरत है। बनर्जी ने कहा कि नकद हस्तांतरण का दायरा अत्यंत निर्धनों के अलावा ज्यादा व्यापक होना चाहिए। अर्थशास्त्री और पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने भी पिछले सप्ताह राहुल के साथ इसी तरह की चर्चा की थी।

राहुल ने कहा कि कोविड-19 लॉकडाउन की वजह से बहुत से लघु एवं मझोले उद्योगों पर चोट पड़ी है, जो इस झटके से दिवालिया हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसकी कीमत नौकरियों में कमी के रूप में चुकानी होगी। बनर्जी ने कहा, 'इसी वजह से हममें से बहुत से लोग यह कह रहे हैं कि हमें प्रोत्साहन पैकेज की दरकार है।'

उन्होंने कहा, 'यही कदम अमेरिका, जापान और यूरोप उठा रहे हैं। असल में हमने बड़े पर्याप्त प्रोत्साहन पैकेज का निर्णय नहीं किया है। हम अब भी जीडीपी के एक फीसदी के बारे में बात कर रहे हैं। अमेरिका ने जीडीपी का 10 फीसदी प्रोत्साहन पैकेज दिया है।'

भारत को अमेरिका से सीख लेनी चाहिए, जो मांग बढ़ाने के लिए लोगों के हाथ में पैसा दे रहा है। बनर्जी ने कहा कि लाभार्थी गरीबों में से होने चाहिए। मगर यह तय करना महत्त्वपूर्ण है कि लक्षित लोगों के लिए क्या मापदंड हो। अर्थशास्त्री ने कहा, 'मेरा मानना है कि आबादी के निचले 60 फीसदी लोग होने चाहिए। हम उन्हें कुछ पैसा दें और मेरा मानना है कि इससे कुछ गलत नहीं होगा।' उन्होंने कहा, 'निश्चित रूप से लॉकडाउन से जल्द बाहर निकलना बीमारी पर निर्भर करता है। आप उस समय लॉकडाउन नहीं हटाना चाहेंगे, जब बहुत से लोग बीमार पड़ रहे हैं। हमें बीमारी के काल चक्र को लेकर सतर्क रहना होगा।' राहुल ने खाद्य की समस्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कैसे राशन कार्डों की वजह से यह लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। बनर्जी ने कहा कि जिस व्यक्ति को राशन की जरूरत है, उसे फिलहाल अस्थायी राशन कार्ड दिया जा सकता है।

उन्होंने कहा, 'अन्य राशन कार्र्डों को स्थगित कर दिया जाए, केवल अस्थायी कार्डों को चालू रखा जाए। जिस व्यक्ति को राशन कार्ड की जररूरत है, उसे अस्थायी राशन कार्ड दिया जाए। यह व्यवस्था तीन महीने और जरूरत पडऩे पर तीन महीने और बढ़ाई जा सकती है। जो व्यक्ति राशन कार्ड लेने आए, उसे यह मुहैया कराया जाए। इसे हस्तांतरण का आधार बनाया जाना चाहिए। मेरा मानना है कि हमारे पास पर्याप्त भंडार है।' लॉकडाउन की वजह से फंसे और कोई रोजगार, ठिकाना या खाना न होने की वजह से घर जाना चाहने वाले लोगों के मुद्दे पर दोनों ने सहमति जताई कि इससे बेहतर तरीके से निपटा जा सकता था। इसमें विकेंद्रित प्रणाली की जरूरत थी, जहां प्रवासी श्रमिकों की आवाजाही को केंद्र द्वारा संभाला जाना चाहिए था।

बनर्जी ने इस विषय में इंडोनेशिया का उदाहरण दिया और कहा कि भारत को इसे अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'इंडोनेशिया ने फैसला किया है कि वह नकद हस्तांतरण करेगा। यह पूरा पैसा सामुदायिक निर्णय की प्रक्रिया के जरिये दिया जाएगा। इसलिए समुदाय यह फैसला करेगा कि किन लोगों को जरूरत है और उन्हें हस्तांतरण के लिए चुनेगा। हम इस मुद्दे पर इंडोनेशिया सरकार के साथ काम कर चुके हैं। हमने महसूस किया कि इसमें कोई खामी नहीं है।'

Keyword: Abhijit Banerjee, Economist, Nobel Prize, Rahul Gandhi, Video Conference, Lockdown, नोबेल पुरस्कार, अभिजित बनर्जी, राहुल गांधी,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आर्ईसीए में बदलाव से बैंकों को होगी सहूलियत?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.