बिजनेस स्टैंडर्ड - कारोबार को पटरी पर लाने में जुटे निजी अस्पताल
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, October 30, 2020 07:32 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

कारोबार को पटरी पर लाने में जुटे निजी अस्पताल

सोहिनी दास और रुचिका चित्रवंशी /  May 05, 2020

देश कोविड-19 के साथ 'जीने' को तैयार है। ऐसे में निजी अस्पताल शृंखलाएं भी अपने कारोबार को सामान्य स्तर पर लाने की तैयारी कर रही हैं, जिनकी आमदनी में लॉकडाउन के दौरान भारी गिरावट आई है। ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों का आवागमन सामान्य होने पर अस्पताल में भर्ती लोगों की संख्या बढ़ेगी। मई तक अस्पतालों के 50 फीसदी बेड भर जाएंगे। इसके बाद कुछ समय में यह आंकड़ा 75 फीसदी पर पहुंच जाएगा।

लॉकडाउन के बाद की रणनीति का एक मुख्य हिस्सा बड़ी तादाद में मरीजों की जांच करना है, भले ही वे अस्पताल में एक दिन भर्ती हो रहे हों। विश्लेषकों का मानना है कि इससे न केवल चिकित्साकर्मी बिना लक्षणों वाले मरीजों से संक्रमित होने से बचेंगे, बल्कि यह आमदनी के स्रोत के रूप में भी काम करेगा।

पहले मुंबई में बहुत से अस्पतालों को उनके कर्मचारी पॉजिटिव पाए जाने की वजह से बंद किया गया था। इन अस्पतालों में पीडी हिंदुजा, ब्रीच कैंडी, वॉकहार्ट आदि शामिल हैं। निजी अस्पतालों द्वारा संचालित प्रयोगशालाओं का हिस्सा उन निजी प्रयोगशालाओं की सूची में बढ़ रहा है, जिन्हें भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) से रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलिमरैस चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) जांच की मंजूरी मिली है। उदाहरण के लिए दिल्ली में इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स (सार्वजनिक-निजी अस्पताल) और श्री गंगा राम हॉस्पिटल की प्रयोगशालाओं को आईसीएमआर से मंजूरी मिली है। इसी तरह अहमदाबाद में जाइडस हॉस्पिटल, मुंबई में एचएन रिलायंस, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, पीडी हिंदुजा हॉस्पिटल तथा नानावती हॉस्पिटल और कोलकाता में अपोलो ग्लेनईगल्स एवं इमामी समूह द्वारा चलाए जा रहे एएमआरआई हॉस्पिटल को देश की शीर्ष स्वास्थ्य अनुसंधान संस्था से मंजूरी मिली है। अस्पतालों का मानना है कि यह कदम मरीजों के इलाज की दक्षता बढ़ाने और अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए अहम है।

देश की दूसरी सबसे बड़ी निजी अस्पताल शृंखला फोर्टिस हेल्थकेयर के प्रबंध निदेशक और सीईओ आशुतोष रघुवंशी ने कहा, 'नए हालात में हमें यह मानना पड़ेगा कि हर मरीज संभावित रूप से संक्रमित है और उसकी वजह से हमें क्षमता बढ़ानी होगी। जांच के स्तर पर हमारे पास क्षमता है।' फोर्टिस के स्वामित्व वाली एसआरएल डायग्नोस्टिक्स तभी से कोविड-19 मरीजों की जांच कर रही है, जब से निजी प्रयोगशालाओं को जांच की मंजूरी दी गई है।

मेडिका ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन आलोक राय ने कहा कि उन्होंने अपनी प्रयोगशाला में जांच की मंजूरी हासिल करने के लिए आईसीएमआर से संपर्क साधा है। मेडिका ने अपने अस्पताल में आने वाले हर मरीज की जांच करने की योजना बनाई है।

रॉय से पूछा गया कि क्या वे विश्लेषकों की तरह इसे निरंतर आमदनी के एक स्रोत के रूप में देखते हैं? उन्होंने कहा कि इन जांचों में लागत के अलावा केवल 10 फीसदी मार्जिन मिलेगा। राय ने कहा, 'मैं इसे आमदनी के एक बड़े स्रोत के रूप में नहीं देखता हूं क्योंकि हमें समय-समय पर अपने डॉक्टरों और कर्मचारियों की भी जांच करनी होगी। इस तरह हम मरीज की एक बार जांच करेंगे, लेकिन हमें डॉक्टरों की बार-बार करनी होगी। इस तरह हमारी जो कमाई होगी, वह आंतरिक जांच में चली जाएगी।'

दूसरी ओर निजी अस्पतालों की जांच की लागत भी घटेगी क्योंकि नमूने लेने की लागत काफी कम है। उद्योग से जुड़े लोगों का दावा है कि अस्पतालों के लिए हर मरीज की पीसीआर जांच की लागत 2,000 से 2,500 रुपये से अधिक नहीं होगी। हालांकि कुछ ऐसी खबरें आई हैं कि अस्पतालों के ज्यादा पैसा वसूलने पर प्रशासन की नजर है। ऐसे अस्पतालों में से एक मुंबई का नानावटी अस्पताल है, जो बीएमसी के निशाने पर आ गया है। इस अस्पताल में कोरोना के इलाज के लिए भर्ती होने वाले मरीजों ने मोटा बिल थमाने की शिकायत की थीं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अस्पताल बिना लक्षणों वाले मरीजों की जांच के लिए आईसीएमआर का वी9 फॉर्म भरते समय 'अन्य' उपबंध का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस फॉर्म में उन मरीजों की श्रेणियां बनाई गई हैं, जिनकी जांच की जा सकती है। अस्पतालों के ओपीडी में भी धीरे-धीरे रौनक लौट रही है। अपोलो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स सोमवार से तृतीयक और द्विïतीयक परिचालन बहाल करने की योजना बनाई है। अस्पताल 75 फीसदी बेड भरने की उम्मीद कर रहा है। इस अस्पताल ने अपने परिचालन को बहाल करने के लिए तीन स्तरीय योजना बनाई है। इसकी शुरुआत बाह्य रोगियों से होगी। इसके बाद उन मरीजों को लिया जाएगा, जिन्हें एक या दो दिन भर्ती करने की जरूरत है।

अपोलो हॉस्पिटल्स के मुख्य वित्त अधिकारी अखिलेश कृष्णन ने कहा, 'हम सरकार के आदेशों से पूरा परिचालन शुरू कर रहे हैं। हम सभी आवश्यक एहतियात बरतेंगे। हमारा अनुमान है कि अगले महीने तक धीरे-धीरे परिचालन पटरी पर आ जाएगा।' अपोलो कोविड मरीजों का भी इलाज कर रहा है। अब यह उन गैर-कोरोना मरीजों को भी फिर से सेवाएं देना शुरू करेगा, जिन्हें सरकारी अस्पतालों में उचित देखभाल नहीं मिलने के आसार हैं।

मरीजों की तादाद भी बढ़ रही है क्योंकि बाजार में कुछ मांग पहले से दबी हुई थी। मेडिका के पिछले सप्ताह अपना ओपीडी खोलने के बाद मरीजों की दैनिक संख्या 100 से बढ़कर अब करीब 180 से 200 पर पहुंच गई है। राय ने दावा किया, 'मई के अंत तक हमारे अस्पताल में 50 फीसदी बेड भर जाएंगे। अस्पताल ने जून के अंत तक कोविड-19 से पहले के स्तरों को हासिल करने का लक्ष्य तय किया है।'

हालांकि कुछ अस्पताल शृंखलाएं धीरे-धीरे सुधार को लेकर सतर्क हैं। रघुवंशी का मानना है कि अस्पतालों को लोगों और बेडों के बीच दूरी बढाऩी होगी और कर्मचारियों को बारी-बारी से काम पर बुलाना होगा।

विश्लेषकों का भी ऐसा ही मानना है । एडलवाइस के अंकित हेतलकर ने कहा, 'अस्पतालों के लिए कारोबार सामान्य होने में समय लगेगा। हमारा मानना है कि वित्त वर्ष 2021 की पहली छमाही में ऑपरेशनों की संख्या कम रहने के आसार हैं और पूरे वित्त वर्ष 2021 में आमदनी कमजोर रहेगी।'

रघुवंशी का मानना है कि तृतीयक यानी विशेष चिकित्सा जरूरत वाले मरीजों की आवक शुरू होने में थोड़ा समय लगेगा। ऐसा घरेलू यात्रा के प्रतिबंधों में ढील दिए जाने पर ही संभव होगा। बहुत से मरीज किसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए जिलों से बड़े शहरों में आते हैं। इसके अलावा बड़ी अस्पताल शृंखलाओं के राजस्व में विदेशी मरीजों का हिस्सा करीब 10 से 12 फीसदी है। मगर ऐसे मरीजों के लिए अस्पतालों को कुछ इंतजार करना होगा। हालात लगातार बदल रहे हैं, इसलिए इन प्रक्रियाओं और नियमों को बनाने में कुछ समय लगेगा। उनका मानना है कि स्थितियां सामान्य होने या कारोबार के सामान्य स्तर पर आने में कम से कम दो तिमाही लगेंगी।

लॉकडाउन के बाद के दौर में चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराने में तकनीक के इस्तेमाल का रुझान बढ़ेगा। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने जिन अस्पतालों से बातचीत की, उन्होंने कहा कि टेली-मेडिसन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का चलन आगे भी बना रहेगा। उदाहरण के लिए फोर्टिस तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है, जिसमें एक वरिष्ठ डॉक्टर किसी मरीज के इलाज में नर्स या रेजिडेंट डॉक्टर को निर्देश दे सकता है। इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा फायदा यह है कि भौगोलिक दूरी कोई बाधा नहीं बनती है और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।

Keyword: Hospital, Staff, Expenditure, Medical, Covid-19, Lockdown, देशबंदी, अस्पताल, इंजीनियरिंग, मरीज, इलाज, चिकित्सा पर्यटन,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या एयर इंडिया के बोली नियमों में बदलाव से आकर्षित होंगे निवेशक?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.