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ईपीएफ का किस्तों में भुगतान की अनुमति संभव

सोमेश झा / नई दिल्ली May 05, 2020

कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में भुगतान में देरी या किस्तों में भुगतान करने की सुविधा देकर सरकार कंपनियों को राहत देने पर विचार कर रही है। साथ ही यह भी कवायद की जा रही है कि और ज्यादा कंपनियों को ईपीएफ सब्सिडी योजना का लाभ मिल सके।  सूत्रों के मुताबिक भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के साथ 30 अप्रैल को हुई एक बैठक में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के मुख्य कार्याधिकारी सुनील बर्थवाल ने नियोक्ताओं से कहा कि ईपीएफ में नकदी की स्थिति को शामिल किए बगैर अलग से रिटर्न दाखिल करने के  मसले पर विचार किया जा रहा है।

ईपीएफओ के सीईओ ने नियोक्ताओं को यह भी साफ किया कि अगर वे अपने कर्मचारियों के साथ नए सिरे से वेतन पर समझौता करते हैं तो वे सिर्फ 15,000 रुपये तक मूल वेतन पर ईपीएफ अंशदान काट सकते हैं, भले ही उनका मूल वेतन इस सीमा से ऊपर रहा हो। इससे कंपनियों को न सिर्फ वेतन का बिल कम करने में मदद मिलेगी बल्कि कर्मचारियों को हाथ में ज्यादा वेतन मिल सकेगा।

नियोक्ताओं को 25 मार्च से 3 मई तक  जारी रहे राष्ट्रीय लॉकडाउन के दौरान नकदी संकट रहने की स्थिति को लेकर दो स्पष्टीकरण दाखिल करने पड़ेंगे। केंद्र सरकार धीरे धीरे देश भर में 4 मई से आर्थिक गतिविधियों के संचालन को ढील देना शुरू कर रही है।  ऐसा माना जा रहा है कि ईपीएफओ के सीईओ ने नियोक्ताओं से कहा है, 'अगर आपको लगता है कि आपके पास पूरे पैसे नहीं हैं तो आफ ईसीआर (इलेक्ट्रॉनिक कम चालान) दाखिल कर सकते हैं और बाद में भुगतान कर सकते हैं। आपसे इसके लिए कोई क्षतिपूर्ति नहीं ली जाएगी। आप इसका भुगतान किस्तों में कर सकते हैं, जैसे पहले दिन 30 प्रतिशत, उसके बाद 30 प्रतिशत। आपकी सुविधा और नकदी की स्थिति के मुताबिक किस्तों में भुगतान की सुविधा मुहैया कराई जाएगी।'

ईपीएफओ ने 30 अप्रैल को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा था कि मासिक ईसीआर दाखिल करने को ईसीआर में वैधानिक अंशदान के भुगतान से अलग कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि कंपनियों को ईपीएफओ को यह सूचित करने की जरूरत होगी कि कितने कर्मचारियों के ईपीएफ अंशदान का भुगतान वे करने जा रही हैं, उन्हें ईपीएफ बकाये में वैधानिक अंशदान को नहीं दिखाना होगा।

अभी तक जब कंपनियां अपना रिटर्न दाखिल कर देती हैं, जिसे ईसीआर कहा जाता है, वे उसके साथ ईपीएफ भुगतान भी दाखिल कर देती हैं, जो एकमुश्त कर्मचारियों को दिया जाता है। ऐसा नहीं करने पर उनके ऊपर जुर्माना लगता है। ईपीएफओ ने रविवार को अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (एफएक्यू) की एक सूची जारी की थी, जो ईपीएफ अंशदान दाखिल करने से अलग ईसीआर फाइलिंग को लेकर था। इसमे कहा गया था कि ईपीएफ बकाये का भुगतान बात की तिथि में किया जा सकता है, 'जैसा कि केंद्र सरकार ने घोषित किया है'। ईपीएफओ के सीईओ ने सीआईआई के अधिकारियों से कहा कि इस कदम से फर्मों को 'नकदी के सूक्ष्म प्रबंधन' में मदद मिलेगी। वेबसाइट में दिए एफएक्यू में ईपीएफओ ने कहा है, 'अब ईसीआर फाइल करने को भुगतान प्रक्रिया से अलग कर दिया गया है, ऐसे में ईसीआर फाइलिंग का वक्त अप्रैल 2020 या 15 मई 2020 के पहले हो सकता है और बकाये को निर्धारित तिथि पर या बढ़े हुए निर्धारित समय पर चुकाया जा सकता है, जैसा कि केंद्र सरकार ने घोषणा की है।' सूत्रों ने कहा कि बर्थवाल ने यह संज्ञान में लिया कि कंपनियां नकदी के संकट का सामना कर रही हैं और उन्होंने उनसे कहा कि वे कर्मचारियों को ईपीएफ से अग्रिम निकासी की योजना का लाभ उठाने में मदद करें।

सरकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के दायरे में और ज्यादा कंपनियों को लाए जाने के अनुरोध पर विचार कर रही है, जिसकी घोषणा मार्च में की गई थी। इस योजना के तहत सिर्फ उन कंपनियों के कर्मचारियों को लाभ मिलेगा, जिनमें कर्मचारियोंं की संख्या 100 तक है और उसके 90 प्रतिशत कर्मचारी 15,000 रुपये महीने से कम वेतन पाते हैं। उद्योग चाहते हैं कि 90 प्रतिशत  कर्मचारियों के 15,000 रुपये महीने से कम पाने की शर्त खत्म की जाए, जिसकी वजह से तमाम छोटी फर्में बाहर हो गई हैं। ईपीएफ योजना में कुल ग्राहकों के करीब 16 प्रतिशत और कुल फर्मो के करीब 68 प्रतिशत ही आ रहे हैं, जो कर्मचारियों को ईपीएफ अंशदान देती हैं। 29 अप्रैल तक कुल पात्र 79 लाख कामगारों में से एक तिहाई यानी करीब 26 लाख कामगार सब्सिडी योजना का लाभ उठा पाने में सक्षम थे। वहीं 3,80,000 पात्र संस्थानों में से 1,51,805 ने सब्सिडी ली।

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